माँ,
जब मैं छोटा था,
तुम मेरा हाथ पकड़कर सड़क पार कराती थीं,
आज मैं बड़ा हो गया हूँ,
पर जीवन के हर मोड़ पर
तुम्हारी सीख मेरा हाथ थामे रहती है।
तुमने मुझे सिर्फ़ चलना नहीं सिखाया,
गिरकर फिर उठना भी सिखाया,
और शायद इसी वजह से
मुश्किल समय में भी
मुझे उम्मीद दिखाई देती है।
माँ,
तुम्हारी परवाह की सबसे खूबसूरत बात यह थी
कि उसमें कोई शर्त नहीं थी।
तुम मेरी ख़ुशी में खुश होती थीं,
मेरे दुःख में बेचैन,
और मेरी खामोशी में भी
मेरा हाल समझ लेती थीं।
आज भी जब मन बहुत थक जाता है,
तो किसी जगह नहीं,
तुम्हारी याद में सुकून ढूँढ़ता है,
क्योंकि माँ का प्यार
उम्र के साथ पुराना नहीं,
और गहरा होता जाता है।
माँ,
मेरी हर छोटी जीत पर
तुम्हारी आँखों में जो चमक आ जाती थी,
वह किसी इनाम से बड़ी लगती थी।
तुमने मुझे ऊँचा उड़ना सिखाया,
पर यह भी सिखाया
कि लौटकर अपनों के पास आना मत भूलना।
आज जब लोग मेरी अच्छाइयों की बात करते हैं,
मैं मुस्कुरा देता हूँ,
क्योंकि मुझे पता है
उनमें सबसे बड़ा हिस्सा तुम्हारी परवरिश का है।
माँ,
तुम्हारी ममता का कोई शोर नहीं था,
वह सुबह की जल्दी में भी थी,
रात की थकान में भी थी,
और मेरी हर चिंता से पहले मौजूद थी।
तुमने कभी अपने प्यार को शब्दों में नहीं बाँधा,
बस हर दिन उसे जीकर दिखाया।
शायद इसी लिए
दुनिया में बहुत लोग अपने लगते हैं,
पर माँ जैसा कोई नहीं लगता।