माँ,
तुम्हारी सबसे बड़ी विशेषता यह नहीं
कि तुमने मुझे संभाला,
बल्कि यह है
कि तुमने मुझे इतना भरोसा दिया
कि मैं खुद को संभालना सीख गया।
जब मैं छोटा था,
तुम मेरे बस्ते का बोझ उठाती थीं,
आज समझता हूँ,
तुमने सिर्फ़ किताबें नहीं,
मेरी चिंताओं का भार भी उठाया था।
माँ,
तुम्हारे प्रेम में कभी कोई शोर नहीं था,
वह रोज़मर्रा की उन बातों में था
जिन्हें उस समय साधारण समझा,
और आज सबसे अनमोल मानता हूँ।
जब मैं किसी बात पर उदास होता था,
तुम हमेशा कारण नहीं पूछती थीं,
कभी-कभी बस मेरे पास बैठ जाती थीं,
और वही साथ
मन को फिर से हल्का कर देता था।
तुम्हारी आदत थी
मेरी पसंद याद रखना,
मेरी ज़रूरत समझना,
और मेरी ख़ुशी में
अपने हिस्से की खुशी ढूँढ़ लेना।
माँ,
तुमने मुझे यह नहीं सिखाया
कि जीवन में कभी मत गिरना,
तुमने सिखाया
कि गिरने के बाद भी सम्मान के साथ उठना है।
जब घर में सब अपने कामों में व्यस्त होते थे,
तुम्हारी नज़र फिर भी
हर किसी की ज़रूरत पर होती थी,
और यही तुम्हारे स्नेह की सबसे सुंदर पहचान है।
तुम्हारी डाँट भी अजीब थी,
उसमें नाराज़गी कम
और चिंता ज़्यादा होती थी,
इसलिए समय बीतने के बाद भी
वह याद बनकर मुस्कुरा देती है।
माँ,
तुम्हारे हाथों में
सिर्फ़ स्नेह नहीं था,
एक भरोसा था
जो हर डर को थोड़ा छोटा कर देता था।
जब मैं अपनी पहली असफलता से गुज़रा,
दुनिया ने सलाह दी,
तुमने गले लगा लिया,
और उस एक पल ने
कई शब्दों से ज़्यादा असर किया।
तुमने कभी अपनी अच्छाई का बखान नहीं किया,
तुम बस अच्छी रहीं,
और शायद यही वजह है
कि तुम्हारा सम्मान दिल से निकलता है।
माँ,
तुम्हारी मौजूदगी ने
घर को सिर्फ़ एक जगह नहीं रहने दिया,
उसे ऐसा एहसास बना दिया
जहाँ लौटकर मन शांत हो जाता था।
आज जब मैं दूसरों के लिए
थोड़ा धैर्य दिखाता हूँ,
थोड़ी संवेदना रखता हूँ,
तो महसूस होता है
कि तुम्हारी परवरिश अब भी मेरे भीतर जीवित है।
तुम्हारी सबसे बड़ी उपलब्धि
शायद कोई पहचान नहीं,
बल्कि वे संस्कार हैं
जो तुमने हमारे भीतर बोए,
और जो आज भी फल दे रहे हैं।
माँ,
अगर जीवन की सबसे सुंदर आदत चुननी हो,
तो मैं तुम्हें याद करना चुनूँगा,
क्योंकि तुम्हारी याद में
प्रेम भी है,
सुकून भी है,
और अपने होने का एहसास भी।
माँ,
तुम्हारे होने से घर बड़ा नहीं था,
लेकिन दिल हमेशा भरा हुआ लगता था,
क्योंकि तुम हर कोने में
अपनापन छोड़ जाती थीं।
जब मैं छोटा था,
तुम मेरे जूते के फीते बाँधती थीं,
आज समझता हूँ,
तुम सिर्फ़ फीते नहीं,
मेरे आत्मविश्वास को भी बाँध रही थीं।
माँ,
तुम्हारी सबसे बड़ी खूबी यह है
कि तुमने कभी मुझे
मेरी कमियों से नहीं आँका,
तुमने हमेशा मुझमें वह देखा
जो मैं बन सकता था।
दुनिया अक्सर परिणाम देखती है,
तुमने हमेशा प्रयास देखा,
और यही वजह है
कि तुम्हारे सामने हार भी इतनी बुरी नहीं लगती थी।
माँ,
तुम्हारी चिंता में घबराहट नहीं होती,
उसमें अपनापन होता है,
जो हर बार यह एहसास दिलाता है
कि कोई है जो दिल से मेरा है।
जब मैं घर लौटता था,
तुम्हारा पहला सवाल
मेरे दिन के बारे में होता था,
और उस एक सवाल में
पूरे दिन की थकान उतर जाती थी।
तुमने मुझे कभी यह नहीं सिखाया
कि लोगों से बड़ा कैसे बनना है,
तुमने सिखाया
कि लोगों के दिल में जगह कैसे बनानी है।
माँ,
तुम्हारी ममता का सबसे सुंदर रूप
तुम्हारी सतर्क नज़र थी,
जो मेरी मुस्कान के पीछे छुपी उदासी भी
पकड़ लिया करती थी।
कई बार मैंने तुम्हें
अपनी खुशी टालते देखा,
सिर्फ़ इसलिए कि
हमारी खुशी पूरी हो सके,
और तुमने इसे कभी त्याग नहीं कहा।
माँ,
तुम्हारे साथ बिताए हुए साधारण दिन
आज सबसे अनमोल लगते हैं,
क्योंकि उनमें दिखावा नहीं,
सिर्फ़ सच्चा अपनापन था।
जब मैं किसी कठिन रास्ते पर चलता हूँ,
तो तुम्हारी सीख साथ चलती है,
जैसे तुमने हाथ छोड़ दिया हो,
पर मार्गदर्शन नहीं।
तुम्हारा प्रेम कभी शर्तों में नहीं बँधा,
वह मेरी सफलताओं का मेहमान नहीं था,
वह मेरी असफलताओं का भी साथी था।
माँ,
तुम्हारी मुस्कान देखकर
हमेशा लगता था
कि सब ठीक हो जाएगा,
और यह भरोसा
किसी भी सलाह से ज़्यादा मूल्यवान था।
अगर मेरे भीतर थोड़ी-सी भी संवेदनशीलता है,
तो वह तुम्हारी देन है,
क्योंकि तुमने मुझे सिखाया
कि मज़बूत होना और दयालु होना
एक साथ संभव है।
माँ,
मेरे जीवन की सबसे सुंदर सच्चाई यह है
कि मुझे तुम्हारा प्रेम मिला,
क्योंकि दुनिया में बहुत लोग मिल जाते हैं,
लेकिन माँ जैसी निस्वार्थ छाँव
किस्मत वालों को ही मिलती है।
माँ,
मेरी हर जीत में मेरा नाम लिखा होगा,
लेकिन उसके पीछे खड़ी दुआओँ पर
सिर्फ़ तुम्हारा हक़ है।
माँ,
तुम्हारा प्रेम कभी ऊँची आवाज़ में नहीं बोला,
फिर भी जीवन में सबसे गहरा असर
उसी ने छोड़ा है।
जब दुनिया ने मुझसे पूछा
मैं क्या बनना चाहता हूँ,
तुमने बस इतना पूछा,
"खुश तो रहोगे ना?"
और यही सवाल सबसे कीमती था।
माँ,
तुम्हारी परवाह की आदत
आज भी नहीं बदली,
बस अब फ़ोन पर पूछा गया
"खाना खाया?" सुनाई देता है।
मेरे बचपन की सबसे सुरक्षित जगह
कोई कमरा नहीं था,
वह तुम्हारा साथ था,
जहाँ डर आने से पहले ही लौट जाता था।
माँ,
तुमने मुझे कभी परफेक्ट नहीं चाहा,
तुमने मुझे अच्छा इंसान बनते देखना चाहा,
और यही तुम्हारे प्रेम की सुंदरता है।
जब मैं थक जाता हूँ,
तो आराम किसी बिस्तर से नहीं,
तुम्हारी याद से मिलता है,
क्योंकि सुकून का पहला परिचय
तुम्हीं थीं।
माँ,
तुम्हारी सबसे बड़ी ख़ासियत यह है
कि तुम मेरी बातों से नहीं,
मेरी ख़ामोशियों से भी रिश्ता रखती हो।
कई लोग मेरी सफलताओं पर खुश हुए,
लेकिन मेरी छोटी-सी मुस्कान पर भी
जो सबसे ज़्यादा खुश हुई,
वह तुम थीं।
माँ,
तुम्हारा नाम लेते ही
कोई बड़ी कहानी याद नहीं आती,
बस बहुत सारे छोटे-छोटे पल याद आते हैं
जो जीवन को सुंदर बनाते हैं।
जब मैं खुद पर शक करने लगता हूँ,
तुम्हारा विश्वास याद आता है,
और वही मुझे फिर से
अपने पैरों पर खड़ा कर देता है।
माँ,
तुमने मुझे दुनिया से लड़ना नहीं सिखाया,
तुमने सिखाया
कि दुनिया जैसी भी हो,
दिल अच्छा बनाए रखना।
मेरे जीवन की सबसे सुंदर विरासत
कोई वस्तु नहीं,
तुम्हारे दिए हुए संस्कार हैं,
जो हर दिन मेरा साथ निभाते हैं।
माँ,
तुम्हारी ममता की सबसे बड़ी पहचान यह है
कि वह समय के साथ कम नहीं हुई,
मैं बड़ा होता गया,
और तुम्हारी चिंता भी मेरे साथ बड़ी होती गई।
अगर प्रेम को एक चेहरे की ज़रूरत हो,
अगर सुकून को एक नाम चाहिए हो,
तो मेरे लिए वह हमेशा
"माँ" ही रहेगा।