तुम्हारी मुस्कान का सबसे सुंदर पहलू यह था,
कि वह अक्सर अपने लिए नहीं होती थी,
हमारी छोटी-सी खुशी भी
तुम्हारे चेहरे पर बड़ी चमक बनकर आ जाती थी माँ।
स्कूल से लौटते समय
दरवाज़े पर तुम्हारा मुस्कुराकर देखना,
दिन भर की थकान का नहीं,
पूरे बचपन का सबसे प्यारा स्वागत था।
कई बार घर में पैसों की तंगी रही होगी,
कई चिंताएँ भी रही होंगी,
मगर तुम्हारी मुस्कान ने हमें
कभी अभावों का बोझ महसूस नहीं होने दिया।
तुम्हारे मुस्कुराने का मतलब सिर्फ़ खुश होना नहीं था,
वह एक आश्वासन भी था,
कि चाहे हालात जैसे भी हों,
घर अब भी सुरक्षित है।
जब पहली बार कुछ हासिल किया,
तो अपनी खुशी से ज़्यादा
तुम्हारी मुस्कान को देखता रह गया,
क्योंकि उसमें मेरे लिए गर्व साफ़ दिखाई देता था।
तुम्हारी मुस्कान ने कभी शोर नहीं किया,
वह चुपचाप दिल तक पहुँची,
जैसे कोई कह रहा हो,
"मैं हूँ, चिंता मत करो।"
आज भी जब किसी माँ को
अपने बच्चे को देखकर मुस्कुराते देखता हूँ,
अनायास तुम्हारी याद आ जाती है,
क्योंकि वह भाव दुनिया में सबसे सच्चा लगता है।
तुम्हारी मुस्कान में एक अजीब सादगी थी,
न कोई दिखावा, न कोई अपेक्षा,
बस अपनों को खुश देखकर
दिल से निकली हुई तसल्ली थी माँ।
घर की सबसे अच्छी यादों में
तुम्हारी मुस्कुराहट हमेशा शामिल रहती है,
क्योंकि उसी ने साधारण दिनों को भी
ख़ास बना दिया था।
जब मैं गलती करता था,
तुम डाँटने के बाद भी मुस्कुरा देती थीं,
और उसी मुस्कान से समझ आ जाता था
कि नाराज़गी से बड़ा तुम्हारा प्यार है।
तुम्हारी मुस्कान ने मुझे सिखाया
कि खुश रहना और खुश रखना अलग बातें हैं,
तुमने हमेशा दूसरी बात को चुना माँ।
कुछ लोग शब्दों से हिम्मत देते हैं,
तुम्हारी मुस्कान यह काम कर देती थी,
बिना कुछ कहे ही
मन का बोझ हल्का हो जाता था।
तुम्हारे चेहरे की वह संतुष्टि,
जब हम सब एक साथ बैठकर खाना खाते थे,
आज समझ आता है,
वह मुस्कान प्रेम का सबसे सरल रूप थी।
तुम्हारी मुस्कान किसी उपलब्धि की मोहताज नहीं थी,
हम सबका साथ ही उसके लिए काफ़ी था,
और शायद यही निस्वार्थ प्रेम की पहचान है माँ।
ज़िंदगी ने बहुत सुंदर दृश्य दिखाए,
बहुत चेहरे भी मिले,
मगर जो सुकून तुम्हारी मुस्कान को देखकर मिलता था,
वह आज तक किसी और जगह नहीं मिला माँ।
जब भी मैं कोई अच्छी ख़बर लेकर घर आता था,
सबसे पहले तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान आती थी,
उस दिन समझ नहीं पाया,
कि मेरी खुशी से ज़्यादा खुश होने का हुनर सिर्फ़ माँओं को आता है।
तुम्हारी मुस्कान में कभी दिखावा नहीं था,
वह थकी हुई सुबहों के बाद भी वैसी ही रहती थी,
जैसे तुम अपने हिस्से की परेशानियाँ छुपाकर
हमारे हिस्से का सुकून बचाए रखती थीं माँ।
बचपन में जब डरकर तुम्हारे पास आता था,
तुम कुछ ख़ास नहीं कहती थीं,
बस मुस्कुरा देती थीं,
और आधा डर वहीं ख़त्म हो जाता था।
घर में सब कुछ ठीक है या नहीं,
यह जानने के लिए मुझे कभी शब्दों की ज़रूरत नहीं पड़ी,
तुम्हारी मुस्कान ही बता देती थी
कि आज घर में सुकून है माँ।
तुम्हारे चेहरे की सबसे सुंदर बात
तुम्हारी मुस्कान नहीं,
उसके पीछे छुपा वह अपनापन है
जो हर बार दिल को हल्का कर देता है।
कई बार लगता है,
मैंने ज़िंदगी में जितनी मेहनत की,
उसका सबसे प्यारा इनाम
तुम्हें मुस्कुराते हुए देखना है माँ।
तुम्हारी मुस्कान किसी उत्सव की तरह नहीं,
एक आदत की तरह थी,
जो हर दिन घर के माहौल को
थोड़ा और नरम बना देती थी।
जब मैं उदास होता था,
तुम मेरी परेशानी पूरी तरह समझो या नहीं,
तुम्हारी मुस्कुराहट यह ज़रूर जता देती थी
कि मुझे अकेले नहीं झेलना पड़ेगा।
तुम्हारी मुस्कान में अक्सर थकान भी होती थी,
लेकिन शिकायत नहीं,
यही बात उसे और सम्मान के योग्य बना देती है माँ।
दुनिया में बहुत लोग खुश दिखाई देते हैं,
पर तुम्हारी मुस्कान अलग थी,
उसमें अपने लिए नहीं,
हमारे लिए की गई दुआएँ बसती थीं।
जब कभी तुम खुलकर हँसती थीं,
पूरा घर जैसे थोड़ा और अपना लगने लगता था,
मानो दीवारों तक को
तुम्हारी खुशी की आदत हो गई हो।
तुम्हारी मुस्कान ने हमें यह सिखाया
कि मज़बूती हमेशा कठोर नहीं होती,
कभी-कभी वह नरमी से भी
पूरा घर संभाल लेती है माँ।
मुझे याद नहीं कि बचपन का सबसे महँगा खिलौना कौन सा था,
लेकिन यह याद है
कि तुम्हारी मुस्कान देखकर
हर छोटी चीज़ बड़ी खुशी लगती थी।
तुम्हें मुस्कुराते देखना
किसी इच्छा पूरी होने जैसा लगता है,
क्योंकि जिसने हमेशा सबकी खुशी चाही हो,
उसे खुश देखना ही सबसे बड़ा सुकून है माँ।
अगर मेरी ज़िंदगी की सबसे प्यारी तस्वीर चुननी हो,
तो वह कोई समारोह या उपलब्धि नहीं होगी,
वह बस तुम्हारा मुस्कुराता हुआ चेहरा होगा,
जिसमें मेरा पूरा बचपन आज भी बसा है माँ।