माँ की याद अक्सर तब आती है
जब जीवन किसी कठिन सवाल के सामने खड़ा कर देता है।
तब उनकी कोई पुरानी बात
अचानक जवाब बनकर सामने आ जाती है।
आज भी जब घर लौटता हूँ,
तो एक पल के लिए लगता है
जैसे माँ आवाज़ देंगी —
"आ गए?"
कुछ इंतज़ार कभी पूरी तरह ख़त्म नहीं होते।
माँ की याद में सबसे गहरी बात यह है
कि समय बीत जाता है,
लेकिन उनसे जुड़ी भावनाएँ
उम्र के साथ और साफ़ होती जाती हैं।
कई बार कोई साधारण सी बात
पूरा बचपन याद दिला देती है।
रसोई की कोई ख़ुशबू,
पुरानी अलमारी,
या कोई भूली हुई आदत।
माँ को याद करना
अतीत में लौटना नहीं है,
बल्कि उस प्रेम को फिर से महसूस करना है
जिसने कभी हमें बिना शर्त अपनाया था।
जब मैं थककर बैठ जाता हूँ,
तो माँ की याद
हिम्मत की तरह आती है।
जैसे वे अब भी कह रही हों —
"इतनी जल्दी हार मत मानो।"
कुछ लोग जीवन में साथ चलते हैं,
और कुछ लोग जीवन का हिस्सा बन जाते हैं।
माँ उन रिश्तों में हैं
जो साँसों की तरह महसूस होते हैं।
आज भी किसी उपलब्धि के बाद
दिल में एक ख़ाली जगह रह जाती है।
क्योंकि सबसे प्यारी बधाई
जिससे सुनना चाहता था,
वह अब यादों में बसती है।
माँ की याद का दर्द
केवल उनकी कमी का नहीं,
उनके प्रेम की गहराई का भी होता है।
जितना बड़ा प्रेम,
उतनी ही गहरी याद।
कभी-कभी उनकी पुरानी बातें याद करके
हँसी भी आ जाती है।
यादें केवल रुलाती नहीं,
वे कई बार पुराने दिनों की धूप भी लौटा लाती हैं।
जब जीवन बहुत व्यस्त हो जाता है,
तब भी माँ की याद
अपने लिए जगह बना ही लेती है।
कुछ रिश्ते कभी पीछे नहीं छूटते।
माँ की तस्वीर को देखना
सिर्फ़ एक चेहरा देखना नहीं,
एक पूरी दुनिया को याद करना है
जो कभी मेरे आसपास थी।
आज भी जब किसी को
वैसा स्नेह देते हुए देखता हूँ,
तो माँ याद आती हैं।
क्योंकि प्रेम का मेरा पहला परिचय
उन्हीं से हुआ था।
माँ की यादों में
कई अधूरी बातें भी रहती हैं,
जो कभी कह नहीं पाए,
और कई धन्यवाद भी,
जो दिल में ही रह गए।
समय ने यह सिखाया है
कि माँ को खोया नहीं जा सकता।
वे बस एक रूप से दूसरे रूप में चली जाती हैं —
यादों में,
संस्कारों में,
और उन सभी अच्छाइयों में
जो उन्होंने हमारे भीतर छोड़ दीं।
कभी-कभी रात बहुत शांत होती है,
और उसी ख़ामोशी में
माँ की याद सबसे ज़्यादा सुनाई देती है।
बिना किसी आवाज़ के,
बिना किसी आहट के,
बस दिल के बहुत क़रीब।
कभी-कभी सुबह की पहली चाय के साथ
माँ की याद भी चली आती है।
बिना किसी वजह के,
बस यूँ ही...
जैसे दिल ने चुपचाप उनका नाम लिया हो।
आज भी जब कोई मेरी चिंता करता है,
तो माँ याद आती हैं।
क्योंकि दुनिया की परवाह और माँ की फ़िक्र में
एक अलग ही अपनापन होता है।
कुछ यादें तस्वीरों में नहीं मिलतीं,
वे आदतों में मिलती हैं।
मेरे भीतर आज भी
माँ की सिखाई हुई कई बातें
बिना कहे जीती रहती हैं।
जब कभी जीवन में कोई बड़ी खुशी आती है,
तो उसके साथ एक छोटी सी कसक भी आती है।
मन कहता है,
काश माँ यह पल देख पातीं।
माँ की यादें कभी बोझ नहीं बनतीं,
वे तो जीवन की उस मुलायम रोशनी जैसी हैं
जो अँधेरे दिनों में भी
रास्ता दिखाती रहती है।
बचपन की गलियों से गुज़रना
आज भी आसान नहीं लगता।
हर मोड़ पर कोई न कोई याद
माँ का ज़िक्र कर ही देती है।
कई बार मैं खुद को
वैसी ही बातें कहते हुए पाता हूँ
जैसी माँ कहा करती थीं।
तब लगता है,
वे कहीं गई नहीं हैं,
बस मेरे भीतर रहने लगी हैं।
माँ की याद में सबसे ज़्यादा
उनकी आवाज़ याद आती है।
वह आवाज़ जो डाँटती भी थी,
समझाती भी थी,
और सबसे ज़्यादा संभालती थी।
समय ने बहुत कुछ बदल दिया,
लेकिन माँ को याद करने का तरीका नहीं बदला।
आज भी मन उन्हें
उसी अपनापन से पुकारता है।
जब कोई पुराना गीत सुनाई देता है,
या कोई पुरानी ख़ुशबू महसूस होती है,
तो माँ की याद अचानक पास आ बैठती है।
यादों का अपना कोई रास्ता नहीं होता।
माँ की कमी हर दिन महसूस नहीं होती,
लेकिन कुछ दिन ऐसे होते हैं
जब दिल बहुत धीरे से पूछता है —
"अगर माँ होतीं तो क्या कहतीं?"
आज भी जब मैं किसी सही काम पर गर्व करता हूँ,
तो सबसे पहले माँ याद आती हैं।
क्योंकि मेरे भीतर की कई अच्छाइयाँ
उनकी परवरिश की देन हैं।
माँ की याद में आँसू ही नहीं होते,
कई बार मुस्कान भी होती है।
उनकी कही हुई मज़ेदार बातें,
उनकी छोटी आदतें,
सब कुछ दिल को गर्माहट दे जाता है।
जीवन आगे बढ़ता रहता है,
लेकिन कुछ रिश्ते पीछे नहीं छूटते।
माँ उन्हीं रिश्तों में से एक हैं,
जो समय के साथ और गहरे होते जाते हैं।
कभी-कभी रात को देर तक जागते हुए
माँ बहुत याद आती हैं।
क्योंकि दुनिया चाहे कितनी भी बदल जाए,
दिल को सुकून देने वाली कुछ आवाज़ें
कभी पुरानी नहीं होतीं।
माँ की याद का सबसे सुंदर पहलू यह है
कि वह केवल एक अनुपस्थिति नहीं,
एक उपस्थिति भी है।
उनकी सीख में,
उनकी दुआओँ में,
और उन सभी रास्तों में
जहाँ आज भी उनका असर दिखाई देता है।
माँ की याद किसी एक दिन नहीं आती,
वह तो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में
अचानक किसी मोड़ पर मिल जाती है।
कभी किसी पुराने स्वाद में,
कभी किसी परिचित आवाज़ में।
कई बार कोई अच्छी ख़बर मिलती है,
और सबसे पहले मन करता है
कि माँ को बताऊँ।
फिर याद आता है,
कुछ रिश्ते अब बातों में नहीं,
यादों में जवाब देते हैं।
माँ की कमी हमेशा शोर नहीं करती,
कभी-कभी वह एक शांत खालीपन बनकर रहती है,
जो किसी खास पल में
अचानक महसूस होने लगता है।
आज भी जब कोई मुश्किल आती है,
अनजाने में वही बातें याद आती हैं
जो माँ कभी समझाया करती थीं।
लगता है जैसे उनकी सीख
अब भी मेरे साथ चल रही हो।
बचपन की यादों में
सबसे साफ़ जो चेहरा दिखाई देता है,
वह माँ का होता है।
शायद कुछ लोग समय से नहीं,
दिल से जुड़े होते हैं।
माँ की याद केवल उदासी नहीं लाती,
वह कई मुस्कुराहटें भी लौटा लाती है।
पुराने दिनों की,
छोटी-छोटी बातों की,
और उस अपनापन की
जो आज भी दिल में बसा है।
कभी-कभी घर के किसी कोने से गुज़रते हुए
ऐसा लगता है
जैसे माँ अभी भी वहीं हों,
किसी काम में व्यस्त,
और मुझे आवाज़ देने वाली हों।
समय बहुत कुछ बदल देता है,
लेकिन माँ से जुड़ी यादों का रंग
अजीब तरह से फीका नहीं पड़ता।
वह सालों बाद भी
उतना ही अपना लगता है।
जब मैं अपने भीतर की अच्छाइयों को देखता हूँ,
तो उनमें माँ की झलक मिलती है।
तब एहसास होता है
कि कुछ लोग चले जाने के बाद भी
हमारे व्यक्तित्व में बसे रहते हैं।
माँ की याद का सबसे कोमल हिस्सा यह है
कि वह केवल अतीत की बात नहीं,
आज के जीवन का भी हिस्सा होती है।
उनकी सीख, उनका स्नेह,
कई निर्णयों में साथ रहता है।
कुछ दिनों में उनकी याद
हल्की हवा की तरह आती है,
और कुछ दिनों में
पूरे बचपन को साथ ले आती है।
यादों का भी अपना मौसम होता है।
जब जीवन बहुत थका देता है,
तब माँ की याद में
एक अलग तरह का सुकून मिलता है।
जैसे किसी ने दूर से ही कह दिया हो —
"सब ठीक हो जाएगा।"
माँ को याद करना
सिर्फ़ उनकी कमी महसूस करना नहीं,
उनके प्रेम को फिर से महसूस करना भी है,
जो समय की सीमाओं से बड़ा लगता है।
आज भी कई बार
उनकी कही हुई साधारण बातें याद आती हैं,
और हैरानी होती है
कि कितनी गहराई से वे जीवन को समझती थीं।
माँ की यादों में दर्द ज़रूर है,
लेकिन उससे कहीं अधिक कृतज्ञता है।
क्योंकि हर याद यह बताती है
कि मुझे जीवन में ऐसा प्रेम मिला था
जो आज भी मेरा सहारा बना हुआ है।
शायद माँ की सबसे सुंदर विरासत यही है
कि उनकी अनुपस्थिति में भी
उनका स्नेह अनुपस्थित नहीं होता।
वह यादों, संस्कारों और दुआओँ की तरह
हमारे भीतर जीवित रहता है।