Maa Par Shayari
माँ, तुम्हारे पास कोई जादू नहीं था, फिर भी मेरी हर परेशानी तुम्हारे पास आकर थोड़ी छोटी हो जाती थी, शायद प्रेम की सबसे बड़ी शक्ति यही होती है।
जब मैं स्कूल से लौटता था, तुम्हारा दरवाज़े पर मिलना उस समय एक रोज़ की बात लगती थी, आज समझता हूँ, किसी का इंतज़ार करना भी प्रेम का एक सुंदर रूप है।
माँ, तुमने कभी यह नहीं पूछा कि मैं दूसरों से कितना आगे हूँ, तुम्हें बस यह जानना होता था कि मैं अपने रास्ते पर ठीक हूँ या नहीं।
तुम्हारी आदत थी मेरी पसंद की चीज़ याद रखना, चाहे मैं खुद भूल जाऊँ, और उन छोटी-छोटी बातों में तुम्हारा बड़ा-सा प्रेम छुपा होता था।
जब मैं बीमार पड़ता था, दवा डॉक्टर देता था, लेकिन ठीक होने का भरोसा तुम्हारी मौजूदगी देती थी।
माँ, तुम्हारी ममता ने मुझे सिर्फ़ सुरक्षित नहीं रखा, उसने मुझे यह भी सिखाया कि किसी अपने का ख़याल कैसे रखा जाता है।
तुमने कभी अपनी थकान को हमारे सामने जगह नहीं दी, लेकिन हमारी थकान तुमसे छुपी नहीं रहती थी, और यही तुम्हारे स्नेह की गहराई थी।
जब मैं किसी बात पर चुप हो जाता था, तुम उस ख़ामोशी को भी सुन लेती थीं, जैसे माँ का दिल बच्चों के शब्दों से आगे देखता हो।
माँ, तुम्हारे हाथों की बनी साधारण-सी चाय भी आज याद आती है, क्योंकि उसमें स्वाद से ज़्यादा अपनापन घुला होता था।
तुमने मुझे कभी ऊँचे सपने देखने से नहीं रोका, लेकिन हमेशा यह याद दिलाया कि ऊँचाई पर पहुँचकर भी ज़मीन से जुड़े रहना।
जब जीवन में पहली बार हार मिली, दुनिया ने कारण पूछे, तुमने हाल पूछा, और यही फ़र्क माँ को सबसे अलग बनाता है।
माँ, तुम्हारी सबसे बड़ी खूबी तुम्हारा धैर्य है, तुमने मेरी गलतियों को मेरे ख़िलाफ़ नहीं, मेरे सीखने के पक्ष में इस्तेमाल किया।
तुम्हारे प्रेम में कोई शर्त नहीं थी, कोई तुलना नहीं थी, बस एक शांत-सा विश्वास था कि मैं अच्छा कर सकता हूँ।
जब मैं आज अपने भीतर थोड़ी-सी भी अच्छाई देखता हूँ, तो उसमें तुम्हारा प्रतिबिंब दिखाई देता है, क्योंकि मेरे चरित्र की जड़ें तुम्हारी परवरिश में हैं।
माँ, अगर जीवन को एक सुरक्षित एहसास में बदलना हो, तो वह तुम्हारी ममता होगी, क्योंकि तुम्हारे प्रेम ने मुझे सिर्फ़ बड़ा नहीं किया, मुझे भीतर से मज़बूत भी बनाया।
माँ, तुम्हारी सबसे सुंदर बात यह थी कि तुम्हें मेरे शब्दों की नहीं, मेरे चेहरे की भाषा समझ आती थी, मैं "ठीक हूँ" कह देता था, और तुम फिर भी पूछ लेती थीं, "सच बताओ, बात क्या है?"
जब मैं छोटा था, तुम मेरे बैग में किताबें रखती थीं, आज समझता हूँ, तुम सिर्फ़ किताबें नहीं, मेरे भविष्य के सपने सजा रही थीं।
माँ, तुम्हारे प्रेम में कभी जल्दबाज़ी नहीं थी, तुमने मुझे अपने समय से बढ़ने दिया, गिरने दिया, सीखने दिया, लेकिन कभी अकेला नहीं छोड़ा।
तुम्हारी परवाह का तरीका भी कितना अनोखा था, तुम पूछती कम थीं, ध्यान ज़्यादा रखती थीं, और यही ख़ामोश देखभाल सबसे गहरा अपनापन बन जाती थी।
जब घर में सब अपने कामों में लगे होते थे, तुम्हारा ध्यान फिर भी सब पर होता था, किसने खाना खाया, कौन थका हुआ है, कौन चुप है, तुम्हारे लिए कोई भी छोटा नहीं था।
माँ, तुमने मुझे यह नहीं सिखाया कि जीवन में हमेशा जीतना है, तुमने सिखाया कि हार के बाद भी सम्मान के साथ खड़ा रहना है।
तुम्हारी मुस्कान में एक अलग ही संतोष था, जैसे हमारी खुशियाँ ही तुम्हारी सबसे बड़ी उपलब्धि हों, और शायद सच भी यही था।
जब कभी मैं देर से घर लौटता था, तुम्हारी नाराज़गी से पहले तुम्हारी राहत दिखाई देती थी, और उस पल समझ आता था कि प्रेम का पहला नाम चिंता है।
माँ, तुम्हारी गोद सिर्फ़ आराम की जगह नहीं थी, वह वह जगह थी जहाँ डर अपने आप छोटा हो जाता था और भरोसा बड़ा।
तुमने कभी अपने संघर्षों को हमारे सामने बड़ा नहीं बनने दिया, तुमने मुस्कुराकर बहुत कुछ सह लिया, ताकि हमारा बचपन हल्का बना रहे।
जब मैं अपने जीवन की नींव को देखता हूँ, तो उसमें तुम्हारी सीख, तुम्हारा धैर्य, तुम्हारी ममता, सब कुछ जुड़ा हुआ दिखाई देता है।
माँ, तुम्हारी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि तुमने प्रेम को कर्तव्य नहीं बनाया, और कर्तव्य को बोझ नहीं बनने दिया, दोनों को इतनी सहजता से निभाया कि वह जीवन का स्वाभाविक हिस्सा लगने लगा।
तुम्हारी आँखों में हमेशा मेरे लिए उम्मीद रहती थी, यहाँ तक कि तब भी जब मैं खुद पर भरोसा खोने लगता था, और वही उम्मीद मुझे फिर संभाल लेती थी।
जब दुनिया मुझे मेरे परिणामों से पहचानती है, तुम मुझे मेरे होने से पहचानती हो, और यही प्रेम का सबसे शुद्ध रूप है।
माँ, अगर मेरे जीवन की सबसे सच्ची प्रेरणा का नाम पूछा जाए, तो मैं किसी महान व्यक्ति का नाम नहीं लूँगा, मैं बस तुम्हारा नाम लूँगा, क्योंकि तुमने बिना शोर किए मुझे जीवन का सबसे सुंदर पाठ पढ़ाया है— अच्छा इंसान बने रहना।
माँ, तुम्हारे साथ बिताया बचपन अब यादों में बसता है, लेकिन उसकी गर्माहट आज भी वैसी ही है, जैसे तुम्हारे हाथ ने अभी-अभी मेरे सिर को सहलाया हो।
जब मैं किसी बात पर घबरा जाता था, तुम हमेशा समाधान नहीं देती थीं, कभी-कभी बस इतना कहती थीं, "मैं हूँ ना," और वही दो शब्द मेरे लिए पूरी हिम्मत बन जाते थे।
माँ, तुम्हारी सबसे बड़ी खूबी यह थी कि तुमने मुझे कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया, चाहे दुनिया साथ हो या नहीं, तुम्हारा विश्वास हमेशा साथ रहा।
तुमने मेरे सपनों को अपना सपना बना लिया, मेरी चिंताओं को अपनी चिंता बना लिया, और यह सब इतने सहज ढंग से किया कि मुझे उसका भार कभी महसूस ही नहीं हुआ।
जब मैं छोटा था, तुम मेरे कपड़ों की सिलवटें ठीक करती थीं, आज समझता हूँ, तुम सिर्फ़ कपड़े नहीं, मेरा आत्मविश्वास सँवार रही थीं।
माँ, तुम्हारी डाँट में भी प्रेम था, तुम्हारी ख़ामोशी में भी, और तुम्हारी मुस्कान में तो पूरा घर बसता था।
तुमने मुझे कभी यह नहीं सिखाया कि लोग क्या कहेंगे, तुमने सिखाया कि सही क्या है, और यही सीख हर मोड़ पर काम आई।
जब जीवन ने मुझे कठिन फैसलों के सामने खड़ा किया, तो तुम्हारे संस्कार मेरे भीतर दिशा बनकर खड़े रहे।
माँ, तुम्हारी परवाह का दायरा सिर्फ़ मेरे वर्तमान तक नहीं था, तुम मेरे कल के लिए भी सोचती थीं, और मेरे भीतर अच्छे भविष्य के बीज बोती थीं।
तुम्हारे हाथों में एक अजीब-सा सुकून था, चोट छोटी हो या बड़ी, तुम्हारा स्पर्श दर्द से पहले मन को ठीक कर देता था।
जब मैं कोई गलती करता था, तुम मुझे ठुकराती नहीं थीं, तुम मुझे समझाती थीं, और यही वजह है कि मैंने खुद को सुधारना सीखा।
माँ, तुम्हारी ममता का कोई शोर नहीं था, वह हर दिन की छोटी-छोटी बातों में थी, कभी टिफ़िन में रखे अतिरिक्त निवाले में, कभी बिना वजह किए गए हालचाल में।
तुमने मुझे यह एहसास दिया कि प्रेम का मतलब सिर्फ़ कहना नहीं, निभाना भी होता है, और तुमने यह बात हर दिन अपने व्यवहार से साबित की।
जब मैं आज अपने जीवन को देखता हूँ, तो समझ आता है कि मेरी कई मज़बूतियाँ दरअसल तुम्हारे विश्वास से जन्मी हैं।
माँ, अगर मुझे दुनिया की सबसे सच्ची दौलत चुननी हो, तो मैं तुम्हारा प्रेम चुनूँगा, क्योंकि वही एक चीज़ है जो हर परिस्थिति में मुझे भीतर से समृद्ध बनाती है।
माँ, तुम्हारा होना कभी किसी एक दिन की खुशी नहीं था, वह तो जीवन की वह स्थिरता थी जिस पर मेरा पूरा बचपन टिका रहा।
जब दुनिया बहुत बड़ी लगती थी, मैं तुम्हारा हाथ पकड़ लेता था, और अचानक सब कुछ आसान लगने लगता था, शायद भरोसा सबसे पहले तुमसे ही सीखा था।
माँ, तुमने मुझे सिर्फ़ चलना नहीं सिखाया, तुमने यह भी सिखाया कि रास्ता कितना भी कठिन हो, इंसानियत साथ नहीं छोड़नी चाहिए।
तुम्हारी परवाह का अंदाज़ अलग था, तुम मेरे सपनों के बारे में भी सोचती थीं, और मेरी थकान के बारे में भी, जैसे मेरी हर खुशी और हर चिंता तुम्हारे दिल से होकर गुज़रती हो।
जब मैं सफल हुआ, तुम सबसे ज़्यादा खुश हुईं, और जब मैं असफल हुआ, तुम सबसे ज़्यादा साथ खड़ी रहीं, यही तो माँ होने की सबसे सुंदर पहचान है।
माँ, तुम्हारे प्रेम ने कभी मुझसे कुछ माँगा नहीं, उसने बस मुझे स्वीकार किया, मेरी कमियों सहित, मेरी गलतियों सहित, पूरी तरह।
तुम्हारी गोद में बैठकर मैंने पहली बार सुकून महसूस किया, और जीवन भर उसी सुकून की तलाश करता रहा, जो तुम्हारे पास सहज ही मिल जाता था।
तुमने कभी अपने योगदान की चर्चा नहीं की, लेकिन आज पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो मेरी हर अच्छी आदत के पीछे तुम्हारी कोई न कोई सीख खड़ी दिखाई देती है।
माँ, तुम्हारी चिंता कभी रोकने वाली नहीं थी, वह संभालने वाली थी, तुम उड़ान से नहीं डरती थीं, बस यह चाहती थीं कि मैं सुरक्षित लौट आऊँ।
जब मैं बीमार पड़ता था, तुम्हारा चेहरा देखकर लगता था कि दर्द मुझे नहीं, तुम्हें ज़्यादा हो रहा है, और तभी समझ आता है कि ममता कितनी गहरी होती है।
तुम्हारे हाथों का बनाया साधारण भोजन आज भी याद आता है, क्योंकि उसमें स्वाद से पहले अपनापन परोसा जाता था।
माँ, तुमने मुझे यह नहीं सिखाया कि दुनिया में सबसे बड़ा कैसे बनना है, तुमने सिखाया कि दिल का छोटा कभी मत होना।
जब जीवन की राहों में उलझन आती है, तो तुम्हारी कही हुई साधारण बातें अचानक बहुत गहरी लगने लगती हैं, जैसे समय ने उनकी कीमत समझाई हो।
तुम्हारी मौजूदगी ने घर को सिर्फ़ रहने की जगह नहीं बनाया, उसे ऐसा ठिकाना बनाया जहाँ लौटकर मन शांत हो जाता था।
माँ, अगर मेरे जीवन की सबसे सुंदर परिभाषा लिखनी हो, तो उसमें सफलता, धन या पहचान नहीं, तुम्हारा प्रेम, तुम्हारी सीख, तुम्हारी ममता और तुम्हारा साथ होगा, क्योंकि इन्हीं से मेरा संसार बना है।