माँ,
जब दुनिया ने मुझे
मेरी कमियों से पहचाना,
तुमने मेरी कोशिशों को देखा।
जब रास्ते कठिन हुए,
तुमने मंज़िल नहीं दिखाई,
चलते रहने का हौसला दिया।
आज जो कुछ अच्छा मुझमें बचा है,
वह मेरी जीत नहीं,
तुम्हारी परवरिश का असर है।
माँ,
तुम्हारी ममता कोई कहानी नहीं
जो सुनाई जाए,
वह तो वह एहसास है
जो उम्र भर साथ चलता है।
मैं बड़ा हो गया हूँ,
पर आज भी जब मन थक जाता है,
सुकून तुम्हारी याद में ही मिलता है।
माँ,
घर की सबसे शांत जगह में भी
तुम्हारी आवाज़ की हल्की-सी गूँज रहती है,
जैसे दीवारों ने अब तक
तुम्हारी ममता सँभालकर रखी हो।
जब मैं छोटा था,
तुम मेरे जूतों के फीते बाँधती थीं,
आज मैं बड़ा हो गया हूँ,
पर उलझनें अब भी
तुम्हारी सीखों से ही सुलझती हैं।
तुमने कभी बड़े-बड़े वादे नहीं किए,
बस हर सुबह मेरे लिए
एक नया भरोसा रख दिया,
और हर रात
मेरे नाम की चिंता अपने तकिए के नीचे।
माँ,
तुम्हारे हाथों की रोटी में
सिर्फ़ स्वाद नहीं होता था,
उसमें वह अपनापन होता था
जो दुनिया की किसी दावत में नहीं मिला।
जब-जब जीवन ने
मुझे मेरी सीमाएँ दिखाईं,
तुमने मेरी क्षमताएँ याद दिलाईं,
और जब-जब मैं खुद से रूठा,
तुम मेरे पक्ष में खड़ी रहीं।
तुम्हारा प्रेम नदी की तरह था,
कभी शोर नहीं करता था,
पर हर प्यासे हिस्से तक
चुपचाप पहुँच जाता था।
आज भी मेरी हर अच्छी आदत में
तुम्हारा अक्स दिखाई देता है,
हर सही निर्णय में
तुम्हारी सीख बोलती है,
और हर सच्ची मुस्कान में
तुम्हारी परवरिश चमकती है।
माँ,
कुछ रिश्ते जीवन का हिस्सा होते हैं,
पर तुम वह रिश्ता हो
जिससे जीवन को अर्थ मिला।
तुम्हारा होना
किसी उपलब्धि जैसा नहीं था,
वह तो साँसों की तरह था—
जब तक साथ रहा,
उसकी कीमत पूरी तरह समझ नहीं आई।
अब जब पीछे मुड़कर देखता हूँ,
तो महसूस होता है कि
मेरी सबसे बड़ी दौलत,
सबसे सुरक्षित पनाह,
और सबसे सुंदर याद—
तुम ही हो, माँ।