माँ की गोद से बड़ा
आराम शायद कहीं नहीं,
क्योंकि वहाँ चिंता से पहले
अपनापन मिलता है।
माँ की फ़िक्र की कोई छुट्टी नहीं होती,
वह बच्चों की उम्र के साथ
कभी कम नहीं होती।
माँ के पास हर समस्या का हल हो,
यह ज़रूरी नहीं,
लेकिन उनके पास बैठने से
मन हल्का ज़रूर हो जाता है।
माँ की सबसे सुंदर आदत
यह है कि वह
अपनी खुशी में नहीं,
बच्चों की खुशी में मुस्कुराती हैं।
जब भी जीवन उलझता है,
माँ की कोई पुरानी बात
रास्ता दिखा ही देती है।
माँ का प्रेम
कभी साबित नहीं किया जाता,
वह रोज़मर्रा की परवाह में
खुद दिखाई देता है।
बचपन की सबसे सुरक्षित जगह
कोई कमरा नहीं था,
वह माँ के पास बैठना था।
माँ की आवाज़ में
एक अजीब सा भरोसा होता है,
जो कठिन दिनों को भी
थोड़ा आसान बना देता है।
माँ हमें केवल पालती नहीं,
धीरे-धीरे हमें
बेहतर इंसान भी बनाती है।
जब सब व्यस्त हो जाते हैं,
तब भी माँ के पास
हमारे लिए चिंता का समय होता है।
माँ की डाँट में भी
नाराज़गी कम,
हमारी भलाई ज़्यादा छिपी होती है।
माँ वह रिश्ता है
जिसे हमारी उपलब्धियों से पहले
हमारी कोशिशों पर गर्व होता है।
घर की रौनक कई चीज़ों से बनती है,
लेकिन उसका सुकून
अक्सर माँ से आता है।
माँ की याद
किसी तस्वीर जैसी नहीं,
एक एहसास जैसी होती है
जो अचानक दिल के पास आ बैठती है।
माँ का विश्वास
वह ताकत है
जो कई बार हमें
खुद पर भरोसा करना सिखाती है।
माँ के हाथों की बनी चीज़ों में
सिर्फ़ स्वाद नहीं,
उनका अपनापन भी शामिल होता है।
माँ का प्रेम
कभी हिसाब नहीं रखता,
वह बस देता है
और बदले में मुस्कान चाहता है।
माँ की सबसे बड़ी पहचान
उनकी ममता नहीं,
उस ममता में छिपी समझ भी है।
जब जीवन बहुत तेज़ भागता है,
माँ की बातें
हमें ठहरकर सोचने की याद दिलाती हैं।
माँ के होने का एहसास
कई बार शब्दों से नहीं,
मन के सुकून से समझ आता है।
माँ की दुआएँ
किस्मत नहीं लिखतीं,
लेकिन मुश्किल दिनों में
हौसला ज़रूर देती हैं।
कुछ रिश्ते समय के साथ बदल जाते हैं,
माँ का रिश्ता
समय के साथ और गहरा हो जाता है।
माँ की मुस्कान देखकर
अक्सर लगता है,
जैसे घर ने
आज चैन की साँस ली हो।
माँ का दिल
अपने लिए कम,
अपनों के लिए ज़्यादा धड़कता है।
दुनिया हमें पहचान देती है,
लेकिन खुद को पहचानने की शुरुआत
अक्सर माँ से ही होती है।
माँ की सबसे बड़ी खूबी यह है,
वह हमारी बातों से पहले
हमारी ख़ामोशियाँ समझ लेती हैं।
माँ का प्रेम कभी शोर नहीं करता,
वह बस हर मुश्किल में
साथ खड़ा दिखाई देता है।
बचपन ख़त्म हो जाता है,
लेकिन माँ का दुलार
उम्र भर साथ चलता है।
जब भी मन थक जाता है,
माँ की याद
सुकून की तरह लौट आती है।
माँ का हाल पूछना आसान है,
माँ की चिंता को समझना
उम्र लग जाती है।
घर की सबसे सुंदर आवाज़
अक्सर वही होती है
जो हमें नाम लेकर बुलाती है।
माँ की मुस्कान में
पूरे परिवार की खुशी
छुपी हुई होती है।
कुछ दुआएँ शब्दों में नहीं होतीं,
वे माँ की चिंता बनकर
हमारे साथ चलती हैं।
माँ वह रिश्ता है
जो हमारी हार में भी
हम पर विश्वास बनाए रखता है।
ज़िंदगी चाहे जितनी बदल जाए,
माँ का अपनापन
वैसा ही रहता है।
माँ की याद
कभी केवल याद नहीं होती,
वह साथ बिताए हुए
सैकड़ों पलों की गर्माहट होती है।
जिस दिन माँ की चिंता समझ आ जाए,
उस दिन प्रेम का अर्थ भी
थोड़ा और समझ आ जाता है।
माँ के लिए सबसे बड़ा उपहार
महँगी चीज़ें नहीं,
उसके बच्चों की मुस्कान होती है।
माँ की परवरिश
वह दौलत है
जो हर परिस्थिति में साथ रहती है।
कई बार हिम्मत
किसी किताब से नहीं,
माँ के भरोसे से मिलती है।
माँ की मौजूदगी
घर को केवल भरा हुआ नहीं,
अपना भी बनाती है।
जब दुनिया समझने में देर लगाती है,
माँ बिना समझाए
समझ जाती है।
माँ का प्रेम
हमारी सफलताओं से नहीं,
हमसे जुड़ा होता है।
कुछ लोग जीवन का हिस्सा होते हैं,
माँ जीवन की नींव होती है।
माँ की आवाज़ सुन लेना भी
कई बार पूरे दिन की थकान
कम कर देता है।
माँ की दुआएँ
रास्ते नहीं बदलतीं,
लेकिन सफ़र आसान ज़रूर कर देती हैं।
माँ के साथ बिताए पल
समय के साथ पुराने नहीं होते,
और कीमती हो जाते हैं।
माँ का दिल
अपनी खुशियों से पहले
बच्चों की मुस्कान चुनता है।
दूरी बढ़ सकती है,
लेकिन माँ का अपनापन
कभी दूर नहीं होता।
माँ की सीखें
उम्र के साथ छोटी नहीं पड़तीं,
हर नए अनुभव के साथ
और गहरी लगने लगती हैं।