Miss You Maa Shayari
माँ, कभी-कभी सुबह की पहली चाय के साथ तुम्हारी याद भी आ बैठती है, और फिर पूरा दिन जाने क्यों थोड़ा-सा तुम्हारा हो जाता है।
अब भी जब कोई कहता है, "अपना ख़याल रखा करो", तो तुम्हारी आवाज़ सुनाई देती है, क्योंकि दुनिया के बहुत से शब्द भूल गए, मगर तुम्हारी फ़िक्र नहीं भूली।
तुम्हारे जाने के बाद घर का पता वही रहा, मगर लौटने का एहसास बदल गया, क्योंकि कुछ लोग दरवाज़े नहीं, पूरे घर की रूह होते हैं।
माँ, कई बार पुरानी तस्वीरों को नहीं, उन तस्वीरों के पीछे के दिनों को देखता हूँ, जहाँ तुम्हारी हँसी थी, तुम्हारी आवाज़ थी, और जीवन कुछ हल्का था।
जब कोई मुश्किल आती है, तो मैं अक्सर सोचता हूँ, तुम होतीं तो क्या कहतीं, और हैरानी होती है, उत्तर आज भी मिल जाता है।
तुम्हारी याद का सबसे कठिन हिस्सा तुम्हारा दूर होना नहीं, यह है कि हर नई खुशी में तुम्हारी जगह खाली महसूस होती है।
माँ, तुम्हारे साथ बिताई हुई शामें अब किसी कहानी जैसी लगती हैं, लेकिन उनकी गर्माहट आज भी वैसी ही है।
कभी-कभी भीड़ में चलते हुए अचानक कोई चेहरा तुम्हारी याद दिला देता है, और कुछ कदमों तक दिल पुराने दिनों में चलने लगता है।
तुम्हारे हाथों की बनी चीज़ों का स्वाद अब यादों में बचा है, मगर उससे जुड़ा अपनापन आज भी ताज़ा है।
माँ, जब मैं अपने जीवन की सबसे सुंदर बातों को गिनता हूँ, तो उनमें कोई बड़ी उपलब्धि नहीं होती, बस तुम्हारे साथ बिताए हुए कुछ साधारण पल होते हैं।
तुम्हारी कमी हमेशा दुख बनकर नहीं आती, कभी वह कृतज्ञता बनकर आती है, कि मुझे तुम्हारा साथ मिला, भले ही उतने समय के लिए जितना मिला।
अब भी कभी किसी बात पर मुस्कुराता हूँ, तो मन करता है तुम्हें बताऊँ, फिर याद आता है कि कुछ संवाद अब यादों के सहारे चलते हैं।
माँ, तुम्हारे जाने के बाद मैंने यह सीखा कि प्रेम समाप्त नहीं होता, वह बस अपना रूप बदल लेता है, मौजूदगी से स्मृति बन जाता है।
तुम्हारी पुरानी आदतें, तुम्हारे कहे हुए वाक्य, तुम्हारा सामान रखने का ढंग, सब कुछ आज भी कहीं न कहीं तुम्हें जीवित रखे हुए है।
माँ, अगर यादों की कोई चौखट होती, तो मैं अक्सर वहाँ बैठा मिलता, जहाँ तुम मुझे पुकार रही होतीं, और मैं निश्चिंत होकर तुम्हारी ओर भाग रहा होता।
माँ, आज भी कभी कोई परेशानी आती है, तो मन अनजाने में तुम्हें ही याद करता है, जैसे वर्षों पुरानी कोई आदत समय के साथ भी बदलना नहीं चाहती।
तुम्हारे जाने के बाद मैंने कई लोगों का साथ देखा, लेकिन वह निस्वार्थ चिंता कहीं नहीं मिली जो तुम्हारी आँखों में मेरे लिए हर दिन रहती थी।
कभी-कभी पुरानी कॉपियों के बीच तुम्हारी लिखी हुई दो-चार पंक्तियाँ मिल जाती हैं, और अचानक लगता है कि वक़्त ने सब कुछ नहीं छीना।
माँ, तुम्हारी याद किसी तूफ़ान की तरह नहीं आती, वह तो धीरे-धीरे मन में उतरती है, और फिर पूरे दिन तुम्हारी कमी को महसूस कराती रहती है।
जब मैं अपने बच्चों को समझाता हूँ, तो कई बार तुम्हारे शब्द मेरे मुँह से निकलते हैं, और उस पल लगता है कि तुम अब भी कहीं मेरे साथ चल रही हो।
तुम्हारे होने पर मैंने कभी यह नहीं सोचा था कि एक दिन तुम्हें याद करके जीना पड़ेगा, तब तुम्हारी मौजूदगी सामान्य लगती थी, आज वही सबसे अनमोल लगती है।
माँ, तुम्हारी हँसी की आवाज़ धीरे-धीरे यादों में धुँधली हो सकती है, लेकिन उससे मिला सुकून अब भी वैसा ही साफ़ है।
कई बार किसी बाज़ार में तुम्हारी पसंद की कोई चीज़ दिख जाती है, और मैं कुछ पल वहीं ठहर जाता हूँ, जैसे यादों ने मेरा हाथ पकड़ लिया हो।
तुम्हारे साथ बिताए हुए साधारण दिन आज किसी ख़ज़ाने जैसे लगते हैं, क्योंकि उनमें कोई बड़ी घटना नहीं थी, बस तुम थीं।
माँ, जब कभी बहुत थक जाता हूँ, तो मन उन दिनों में लौट जाता है जब तुम बिना पूछे समझ जाती थीं कि मैं ठीक नहीं हूँ।
तुम्हारी तस्वीर के सामने बैठकर कई बार चुप रहता हूँ, क्योंकि कुछ रिश्तों में ख़ामोशी भी बातचीत जैसी लगती है।
अब समझता हूँ, तुम्हारा बार-बार पूछना, "खाना खाया?" सिर्फ़ एक सवाल नहीं था, वह तुम्हारे प्रेम का रोज़ का रूप था।
माँ, तुम्हारी याद में सबसे ज़्यादा दर्द तुम्हारे न होने का नहीं, उन बातों का है जो अब तुम्हें बता नहीं सकता।
जब कोई मेरी तारीफ़ करता है, तो दिल में एक ख़याल आता है, काश तुम सुन रही होतीं, क्योंकि मेरी हर छोटी जीत में तुम्हारी मेहनत शामिल है।
माँ, समय ने तुम्हें मुझसे दूर कर दिया, लेकिन तुम्हारी यादों को नहीं, वे आज भी मेरे दिनों में वैसे ही आती हैं, जैसे तुम कभी बिना आवाज़ दिए मेरे कमरे में आ जाया करती थीं।
माँ, आज भी कभी रसोई से वैसी ही खुशबू आती है, तो कुछ पल के लिए लगता है कि तुम पास ही कहीं हो, फिर याद आता है, कुछ लोग चले जाने के बाद भी अपनी मौजूदगी छोड़ जाते हैं।
तुम्हारी याद हमेशा आँसू लेकर नहीं आती, कभी-कभी वह मुस्कान बनकर भी आती है, जब किसी पुरानी बात पर हँसी आ जाती है, और साथ ही दिल में एक हल्की-सी कसक भी।
बचपन में मुझे लगता था कि तुम हमेशा रहोगी, जैसे घर की दीवारें रहती हैं, समय ने सिखाया कि सबसे स्थायी लगने वाली चीज़ें भी एक दिन याद बन जाती हैं।
माँ, अब जब कोई पूछता है कि सबसे सुरक्षित जगह कौन-सी थी, तो किसी घर का नाम नहीं याद आता, बस तुम्हारी गोद याद आती है, जहाँ बैठकर दुनिया थोड़ी आसान लगती थी।
तुम्हारी आवाज़ का एक हिस्सा अब भी मेरे भीतर रहता है, जब मैं किसी मुश्किल में होता हूँ, तो अनजाने में वही शब्द याद आते हैं जो तुमने कभी समझाते हुए कहे थे।
कई बार पुरानी अलमारी खोलता हूँ, तो वहाँ रखी चीज़ों से ज़्यादा उनसे जुड़ी तुम्हारी यादें मिलती हैं, और कुछ देर के लिए पूरा बचपन लौट आता है।
माँ, तुम्हारे जाने के बाद मैंने यह जाना कि यादें भी साथ चलती हैं, वे पीछे नहीं छूटतीं, बस जीवन का एक शांत हिस्सा बन जाती हैं।
जब बहुत अच्छा दिन होता है, तो तुम्हारी कमी और महसूस होती है, क्योंकि कुछ खुशियाँ ऐसी होती हैं जिन्हें सबसे पहले माँ के साथ बाँटने का मन करता है।
तुम्हारे हाथों का स्पर्श याद नहीं रहा पूरा, लेकिन उससे मिला सुकून आज भी याद है, शायद प्रेम की यही खूबी है, वह रूप से पहले एहसास बनकर रह जाता है।
माँ, कभी-कभी किसी बच्चे को अपनी माँ का हाथ पकड़े देखता हूँ, तो दिल अनायास उस समय में लौट जाता है जब मेरी पूरी दुनिया तुम्हारी उँगली से शुरू होती थी।
तुम्हारी डाँट भी अब याद आती है, क्योंकि उसमें छुपी चिंता उस समय समझ नहीं पाता था, आज वही बातें प्रेम की सबसे सच्ची भाषा लगती हैं।
कई बार रात को नींद नहीं आती, तो मैं पुराने दिनों को याद करता हूँ, जहाँ तुम थीं, तुम्हारी आवाज़ थी, और हर परेशानी का आकार छोटा था।
माँ, तुम्हारी कमी कोई ऐसा घाव नहीं जो भरना चाहता हूँ, वह तो एक ऐसी याद है जिसे सँभालकर रखना चाहता हूँ, क्योंकि उसमें तुम्हारा पूरा प्रेम बसता है।
अब समझ आता है कि तुमने जो समय हमारे साथ बिताया, वही सबसे बड़ी दौलत थी, जिसकी कीमत उस वक़्त नहीं, तुम्हारी यादों ने समझाई।
माँ, तुम आज सामने नहीं हो, फिर भी मेरे जीवन में मौजूद हो, मेरी आदतों में, मेरे संस्कारों में, मेरी प्रार्थनाओं में, और उन हर पलों में जब दिल चुपचाप तुम्हें याद करता है।