आज आसमान कुछ इस तरह झुककर ज़मीन से मिला है,
जैसे बरसों बाद दो पुराने चाहने वालों का शिकवा गिला है।
इस भीगे मौसम में तुम्हारा यूं ख्यालों में चले आना,
बिलकुल वैसा ही है जैसे जलते हुए दिए पर किसी का आंचल आ जाना।
बाहर बारिश का शोर है और अंदर एक अजीब सी ख़ामोशी,
यह मौसम लाया है तुम्हारी यादों की एक मीठी सी मदहोशी।
मिट्टी की सोंधी महक अब पूरे कमरे में समाने लगी है,
तुम्हारी बातें इस ठंडी हवा के साथ मिलकर मुझे सताने लगी हैं।
इन गिरती हुई बूंदों को अपनी हथेलियों में समेटने की कोशिश न कर,
मोहब्बत तो वह अहसास है जो रूह में उतर जाता है बिना किसी शोर के।
शाम ढलते ही जब यह रिमझिम और तेज़ होने लगती है,
तुम्हारी हँसी मेरे सूनेपन के अंधेरे को धीरे से धोने लगती है।
इस भीगे हुए कांच पर उंगली से तुम्हारा नाम लिखना और मिटाना,
बस यही एक जरिया बचा है इस तन्हाई में दिल को बहलाने का।
ज़रा देखो तो सही इस बरसते हुए सावन की बेबाकी को,
यह भी ज़िद पर अड़ा है आज मेरी इस तन्हाई को मिटाने की।
ग़रज़ते हुए बादलों से मुझे कोई ख़ौफ़ नहीं आता अब,
जब से तुम्हारी यादों ने मेरे दिल में अपना बसेरा बना लिया है।
इस भीगे हुए दिन का हर एक लम्हा बस यही दुआ करता है,
कि काश अगली बार जब यह अंबर बरसे तो हम दोनों एक साथ हों।
हवा की थपकियों से जब खिड़की का वह पर्दा हिलता है,
ऐसा लगता है जैसे तुम्हारी बांहों का कोई कोना मुझे मिलता है।
भीगी हुई सड़कों पर पेड़ों से टपकता हुआ यह पानी,
बिना कहे बयां कर रहा है हमारी मोहब्बत की पुरानी कहानी।
इस सुहाने दिन की धूप न जाने बादलों में कहाँ खो गई है,
पर तुम्हारी यादों की सुलगती गर्माहट मेरे बहुत पास सो गई है।
जब भी बरसती हैं ये बूंदें इस सूनी ज़मीन के सीने पर,
एक नया हौसला मिल जाता है मुझे तुम्हारी उम्मीद में जीने का।
कमरे की मद्धम रोशनी और बाहर चलता हुआ यह तेज़ अंधड़,
ऐसे में सिर्फ तुम्हारा साथ होना ही बचा सकता है मेरा यह दिल।
कोई कागज़ की कश्ती नहीं जो बह जाए पानी के तेज़ बहाव में,
हमारी चाहत का रंग तो गहरा हुआ है वक़्त के हर उतार-चढ़ाव में।
खिड़की के पल्लों से छनकर आती हुई यह ठंडी बौछार,
जैसे धीरे से सहलाकर कह रही हो कि तुम्हें आज भी है मुझसे प्यार।
इस भीगे मंज़र में जब आँखें मूंदकर तुम्हें सोचता हूँ,
तो दूरियों के सारे फासले सिमट जाते हैं बस एक पल के पार।
आसमान ने आज अपने दिल का सारा गुबार बहा दिया है,
और तुम्हारी ज़रा सी याद ने मेरे इस वीरान मन को महका दिया है।
यह सर्द हवा जब भी मेरे चेहरे को छूकर गुज़रती है,
ऐसा लगता है जैसे तुम्हारी उंगलियाँ मेरी ज़ुल्फ़ों को संवारती हैं।
चलो इस भीगे हुए मौसम का पूरा एहतराम करते हैं,
आज की यह हसीन शाम सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे नाम करते हैं।
बूंदों का थम जाना और हवाओं का यह धीमा पड़ जाना,
बिलकुल वैसा ही है जैसे तुम्हारी बाँहों में आकर मेरा ठहर जाना।
एक अकेली सुबह और बाहर गिरती हुई यह रिमझिम फुहार,
जैसे चुपके से कानों में कह रही हो तुम्हारा ही नाम बार-बार।
इस गीली हवा में एक अजीब सा अपनापन छुपा हुआ है,
लगता है मेरे दिल का हाल आज बादलों को भी पता हुआ है।
खिड़की के पास बैठकर बस यही सोचता रहता हूँ अक्सर,
काश तुम भी देख पाते कि यह मौसम कितना हसीन है मेरे घर।
हथेली पर रुकी हुई इस बूंद को जब मैं गौर से देखता हूँ,
तुम्हारी हँसी की खनक को मैं अपने इतने पास पाता हूँ।
बाहर सब कुछ कितना शांत और ठहरा हुआ सा लगता है,
तेरी यादों का यह साया इस ठंडे मौसम में भी सच्चा लगता है।
चाय के दो कप और अधूरी रह गई वह पुरानी बात,
इस भीनी महक में आज फिर जी उठती है वह मुलाक़ात।
सर्द हवाएं जब भी गुज़रती हैं मेरे इस सूने कमरे से,
ऐसा लगता है जैसे तुमने छूकर बढ़ा दी हो दिल की धड़कन ज़रा से।
मौसम का यह बदलना तो बस एक ख़ूबसूरत सा बहाना है,
असल में तो इस दिल को तुम्हारी पनाह में वापस लौट कर आना है।
ग़लती से भी अगर इस मौसम में तुम्हारा ख्याल आ जाता है,
तो सूखा पड़ा यह मन भी अंदर तक पूरी तरह भीग जाता है।
आसमान का यह गाढ़ा रंग और परिंदों का अपने घर लौट जाना,
याद दिलाता है कि कितना सुकून देता है सिर्फ तुम्हारा हो जाना।
यह सावन तो हर बार इसी तरह चुपचाप गुज़र जाता है,
पर पीछे मेरे दिल में तुम्हारी मोहब्बत का एक समंदर छोड़ जाता है
हवा में आज फिर एक भीनी सी महक तैरने लगी है,
लगता है बरसती बूंदों ने तुम्हारा पता पूछ लिया है।
खिड़की पर गिरती हर बूंद एक अलग ही धुन सुनाती है,
जब पास होते हो तुम तो यह बारिश संगीत बन जाती है।
ठंडी हवाओं ने जब भी मेरी चौखट को छुआ है,
इस दिल में सिर्फ तुम्हें करीब पाने का ख्याल जगा है।
चाय की प्याली से उठती इस भीनी सी भाप में,
चेहरा तुम्हारा ही दिखता है इस सुहाने ख्वाब में।
दूर बैठकर भी तुम इतने करीब महसूस होते हो,
जैसे बरस रहा हो यह सावन सिर्फ हमारे साथ में।
बाहर मौसम अपनी पूरी शिद्दत से बरस रहा है,
और अंदर यह दिल तुम्हारी एक झलक को तरस रहा है।
इन बूंदों का कांच पर आकर ठहर जाना भी अच्छा लगता है,
तेरी यादों के साए में अब हर लम्हा सच्चा लगता है।
मौसम की इस पहली फुहार ने मन में एक हलचल सी कर दी,
तुम्हारी पुरानी बातों ने आज फिर मेरी तन्हाई महका दी।
आसमान से गिरता पानी ज़मीन को गले लगा रहा है,
शायद दूर रहकर भी कोई मुझे चुपके से याद कर रहा है।
चलो आज इस ठंडी हवा के बहाने थोड़ा ठहर जाते हैं,
दूरियों को भूलकर कुछ पल तुम्हारी यादों में बिखर जाते हैं।
शाम का धुंधलका और ये लगातार होती रिमझिम,
कमरे का हर कोना पूछ रहा है कि कहां हो तुम।
इस ठंडे मौसम में तुम्हारी बातों की गर्माहट याद आती है,
यह बारिश न जाने कितने बीते हुए लम्हे जगा जाती है।
कोई वादा नहीं फिर भी ये बूंदें हर साल चली आती हैं,
बिलकुल तुम्हारी उन मीठी यादों की तरह जो बिन बताए दिल को छू जाती हैं।
तुम्हारी मौजूदगी का अहसास इस मौसम में और गहरा हो जाता है,
जब भी हवा का झोंका आता है दिल बस तुम्हारा हो जाता है।
ये आसमां आज इतना रोया है कि सब कुछ धुंधला सा लगता है,
सिर्फ एक तुम्हारी याद है जो इस अंधेरे में भी साफ़ चमकती है।
कच्ची मिट्टी की वह खुशबू और इस मौसम का मिजाज़,
याद दिलाता है मुझे हमारा वह अधूरा सा ताल-मेल आज।
चाहत बढ़ जाती है तुम्हें बांहों में समेट लेने की,
जब भी गूंजती है इन बादलों की मदहोश करती आवाज़।
बारिश की इन बूंदों को अपने हाथ की हथेली पर रोक कर देखा है,
हर एक कतरे में मुझे बस तुम्हारा ही मुस्कुराता चेहरा दिखा है।
शहर की इस भागदौड़ में जब यह सावन सुकून बनकर बरसता है,
तब मेरा यह दिल सिर्फ तुम्हारी बांहों के घेरे के लिए तरसता है।
इस सुहाने मौसम में कोई शिकायत नहीं है मुझे इस दूरी से,
तुम्हारी याद का सहारा ही काफी है इस दिल की पूरी खुशी के लिए।
बाहर गिरती बूंदों की आवाज़ दिल की धड़कन से मिल गई है,
तुम्हारे साथ बिताए हर पल की कली आज फिर खिल गई है।
इस सर्द हवा में भी एक अजीब सा सुकून छुपा हुआ है,
शायद तुम्हारी मोहब्बत का रंग इस पूरे मौसम पर चढ़ा हुआ है।
ख्वाहिश बस इतनी सी है कि जब भी यह अंबर बरसे,
हम और तुम एक ही छत के नीचे बैठकर इस मंज़र को देखें।
यह सावन गवाह है मेरी इस बेइंतहा मोहब्बत का,
जो हर बूंद के साथ तुम्हारे और करीब आती जा रही है।