रॉयल होना ऊँची जगह पर बैठना नहीं,
हर हाल में अपने स्तर को बनाए रखना है,
क्योंकि पद बदल सकते हैं,
मगर व्यक्तित्व की ऊँचाई नहीं।
मैंने अपनी पहचान
लोगों की वाहवाही से नहीं बनाई,
मेरे निर्णय और मेरे उसूल ही
मेरी सबसे बड़ी सिफ़ारिश हैं।
हमारी शख्सियत का असर
बोलने से नहीं, निभाने से आता है,
क्योंकि वादे करने वाले बहुत मिलते हैं,
उन्हें पूरा करने वाले कम।
मैं हर किसी की नज़रों में बड़ा नहीं बनना चाहता,
बस इतना चाहता हूँ
कि मेरा चरित्र मेरी गैरमौजूदगी में भी
मेरा सम्मान बनाए रखे।
रुतबा उस इंसान का सबसे अलग होता है,
जो सफलता मिलने पर भी
अपने व्यवहार की सादगी नहीं खोता,
क्योंकि विनम्रता ही असली शान है।
मैंने कभी अपनी क़ीमत
दूसरों की राय से नहीं आँकी,
क्योंकि जो खुद को समझता हो,
वह पहचान के लिए बेचैन नहीं होता।
हमारी ताक़त यह नहीं
कि लोग हमें सुनते हैं,
हमारी ताक़त यह है
कि लोग हमारी बात पर भरोसा करते हैं।
मैंने हर परिस्थिति में
अपनी गरिमा को प्राथमिकता दी है,
क्योंकि सम्मान खोकर मिली जीत
मुझे कभी जीत नहीं लगी।
रॉयल सोच वाले लोग
हर दरवाज़े पर दस्तक नहीं देते,
वे खुद को इतना योग्य बनाते हैं
कि सही दरवाज़े अपने आप खुल जाएँ।
मैं आज भी शांत हूँ,
आज भी संयमित हूँ,
मगर इतना तय है कि
मेरी शख्सियत का स्तर किसी परिचय का मोहताज नहीं।
रुतबा विरासत में नहीं मिला,
उसे व्यवहार से कमाया है,
इसलिए हमारी पहचान नाम से नहीं,
किरदार से शुरू होती है।
हम हर जगह अपनी अहमियत नहीं बताते,
क्योंकि असली प्रभाव परिचय का मोहताज नहीं होता,
वह लोगों की यादों में
अपने आप जगह बना लेता है।
मैंने ऊँचा दिखने की कोशिश नहीं की,
बस अपने स्तर को ऊँचा रखा है,
क्योंकि शख्सियत की असली चमक
अंदर की गुणवत्ता से आती है।
हमारी मौजूदगी का शोर नहीं होता,
मगर असर गहरा होता है,
जैसे खुशबू का कोई परिचय नहीं होता,
फिर भी पहचान बन जाती है।
रॉयल सोच का मतलब यह नहीं
कि दुनिया आपके हिसाब से चले,
बल्कि यह कि हालात जैसे भी हों,
आप अपने स्तर से नीचे न गिरें।
मैंने सम्मान के लिए
कभी खुद को बदला नहीं,
जो लोग समझ सके, अपने बन गए,
बाक़ी वक़्त के साथ पीछे छूट गए।
हमारी शालीनता को कमजोरी समझना भूल है,
क्योंकि संयम रखने के लिए
उतनी ही ताक़त चाहिए,
जितनी प्रतिक्रिया देने के लिए।
मैं वहाँ कम बोलता हूँ
जहाँ लोग सिर्फ़ सुनना चाहते हैं,
और वहाँ खुलकर बोलता हूँ
जहाँ लोग समझना जानते हैं।
रुतबा ऊँची कुर्सियों से नहीं बनता,
बल्कि उन लोगों से बनता है
जो आपके जाने के बाद भी
आपकी अच्छाई का ज़िक्र करें।
हमारी सोच का स्तर
परिस्थितियों से तय नहीं होता,
क्योंकि मूल्यों वाले लोग
सुविधा नहीं, सिद्धांत चुनते हैं।
मैंने कभी भीड़ जुटाने की कोशिश नहीं की,
बस अपने व्यक्तित्व को निखारा है,
और जब इंसान निखरता है,
तो पहचान अपने आप बनती है।
हमारी सबसे बड़ी दौलत
विश्वास है,
जो एक बार कमाया जाए,
तो किसी भी परिचय से बड़ा हो जाता है।
मैं जीतने से पहले
योग्य बनने पर ध्यान देता हूँ,
क्योंकि स्थायी प्रतिष्ठा
उपलब्धियों से नहीं, क्षमता से बनती है।
रॉयल अंदाज़ कपड़ों में नहीं,
निर्णयों में दिखाई देता है,
जहाँ आत्मसम्मान भी हो,
और विनम्रता भी।
हमारी नज़र सिर्फ़ ऊँचाई पर नहीं,
गहराई पर भी है,
क्योंकि ऊँचा वही टिकता है
जिसकी नींव मज़बूत हो।
मैं हर किसी को प्रभावित करने नहीं निकला,
बस इतना चाहता हूँ
कि मेरे कर्म मेरे शब्दों से बड़े रहें,
यही असली प्रभाव है।
कुछ लोग पहचान के पीछे भागते हैं,
हमने काबिलियत के पीछे भागना चुना,
क्योंकि पहचान बदल सकती है,
काबिलियत नहीं।
मैं अपनी सफलता का प्रदर्शन नहीं करता,
उसे अपने व्यवहार में रखता हूँ,
क्योंकि असली रुतबा
दिखाने से नहीं, महसूस कराने से बनता है।
हमारी शख्सियत का नियम सरल है,
सम्मान दो, सम्मान लो,
मगर अपने आत्मसम्मान की कीमत पर
कभी किसी को खुश मत करो।
मैं आज भी वही हूँ,
बस अनुभवों ने मुझे और संवार दिया है,
अब मेरी ख़ामोशी में भी
एक अलग तरह का रुतबा दिखाई देता है।
शान कपड़ों से नहीं,
किरदार से पहचानी जाती है,
हम वहाँ भी सम्मान छोड़ आते हैं,
जहाँ नाम तक याद नहीं रखा जाता।
हमारी पहचान ऊँची आवाज़ नहीं,
ऊँचे उसूल हैं,
क्योंकि असली रुतबा
लोगों को दबाने से नहीं, प्रभावित करने से बनता है।
मैं हर जगह अपनी मौजूदगी नहीं दिखाता,
मगर जहाँ खड़ा हो जाऊँ,
वहाँ मेरे व्यवहार की छाप
लंबे समय तक रह जाती है।
रॉयल होना पद नहीं,
एक आदत है,
जिसमें इंसान मुश्किल वक़्त में भी
अपनी गरिमा नहीं खोता।
मैंने कभी सम्मान माँगा नहीं,
बस अपने कर्म ऐसे रखे,
कि लोगों को देना पड़ा,
और यही सबसे सुंदर प्रतिष्ठा है।
हमारी सादगी को कम मत समझना,
उसके पीछे वर्षों की समझ खड़ी है,
क्योंकि शोर अक्सर खाली होता है,
गहराई शांत रहती है।
मैं भीड़ का हिस्सा बन सकता था,
मगर मैंने अपना स्तर चुना,
क्योंकि अलग दिखना आसान है,
अलग सोच रखना मुश्किल।
मेरे फैसले भावनाओं से नहीं,
मूल्यों से चलते हैं,
और यही बात मुझे
हर परिस्थिति में स्थिर रखती है।
जो लोग हर किसी को प्रभावित करना चाहते हैं,
वे अक्सर खुद को खो देते हैं,
मैंने खुद को बचाकर रखा है,
इसीलिए मेरा व्यक्तित्व अलग है।
हमारी शख्सियत की खूबी यह नहीं
कि लोग हमें जानते हैं,
खूबी यह है कि
जो जानते हैं, सम्मान करते हैं।
मैंने वक़्त को अपनी पहचान बनाने दी है,
दिखावे को नहीं,
क्योंकि जो मूल्यवान होता है,
उसे साबित करने की जल्दी नहीं होती।
रुतबा वह नहीं
जो लोगों को आपके सामने झुका दे,
रुतबा वह है
जो आपकी गैरमौजूदगी में भी सम्मान दिलाए।
मैंने अपनी सीमाएँ तय की हैं,
और अपने सिद्धांत भी,
क्योंकि बिना मूल्यों का प्रभाव
ज़्यादा दिन नहीं टिकता।
हमारी मौजूदगी शोर नहीं करती,
मगर असर छोड़ती है,
क्योंकि प्रभावशाली लोग
पहचान के लिए संघर्ष नहीं करते।
मैंने सफलता को सिर पर नहीं चढ़ने दिया,
उसे चरित्र में उतारा है,
तभी उपलब्धियाँ बढ़ीं,
और विनम्रता भी साथ रही।
रॉयल सोच का मतलब
सबसे ऊपर होना नहीं,
बल्कि हर परिस्थिति में
अपने स्तर को बनाए रखना है।
मैं हर बहस में नहीं उतरता,
कुछ बातें वक़्त पर छोड़ देता हूँ,
क्योंकि परिपक्वता का भी
अपना एक अलग रुतबा होता है।
हम वहाँ तक पहुँचना चाहते हैं
जहाँ नाम से पहले चरित्र याद आए,
क्योंकि प्रतिष्ठा बनती है कर्मों से,
परिचय से नहीं।
मेरी सबसे बड़ी ताक़त
मेरा आत्मविश्वास नहीं,
मेरा संतुलन है,
जो सफलता और संघर्ष दोनों में साथ रहता है।
मैं आज भी विनम्र हूँ,
आज भी शांत हूँ,
मगर इतना तय है कि
मेरी गरिमा किसी भी परिस्थिति से बड़ी है।