Sad Attitude Shayari
कुछ रिश्ते आख़िरी साँस तक नहीं चलते, मगर उनकी यादें इंसान को उम्रभर समझदार बना जाती हैं।
मैंने दर्द से भागने की कोशिश नहीं की, उसे स्वीकार किया और आगे बढ़ गया।
जिसे मेरी मौजूदगी की कद्र नहीं थी, उसे मेरी कमी का एहसास दिलाना भी ज़रूरी नहीं लगा।
मैं आज भी लोगों पर भरोसा करता हूँ, बस अब अपनी उम्मीदें संभालकर रखता हूँ।
कई बार दिल ने रुकने को कहा, मगर आत्मसम्मान ने आगे बढ़ना सिखा दिया।
कुछ बातें अधूरी रह गईं, और मैंने उन्हें अधूरा ही रहने दिया।
मैंने किसी को गलत साबित करने की कोशिश नहीं की, बस खुद को संभालने में व्यस्त हो गया।
जो दर्द शब्दों में नहीं आया, उसी ने मुझे सबसे ज़्यादा मज़बूत बनाया।
अब किसी से शिकायत करने का मन नहीं करता, हर इंसान अपनी समझ के मुताबिक़ ही साथ देता है।
मैंने खोने का दुख देखा है, इसलिए अब मिलने वाली हर सच्ची चीज़ की कद्र करता हूँ।
जिसे जाना था, वह चला गया, और मैंने अपने रास्ते की रफ़्तार कम नहीं की।
कभी-कभी दूरी ही सबसे सम्मानजनक जवाब होती है, खासकर वहाँ, जहाँ भावनाओं की कीमत न हो।
मैंने अपने घावों को पहचान बना लिया, ताकि कोई दर्द मुझे फिर अनजान न लगे।
अब मैं हर रिश्ते में खुद को नहीं भूलता, क्योंकि एक बार खोकर खुद को ढूँढ़ना आसान नहीं था।
दिल में दर्द आज भी कहीं बाकी है, मगर अब उससे ज़्यादा हिम्मत मेरे साथ चलती है।
मैंने दर्द को छुपाया नहीं, समझा है, इसीलिए अब हर ज़ख्म मुझे कमज़ोर नहीं करता।
जिसे मेरी ख़ामोशी समझ नहीं आई, उसे मेरे शब्द भी कभी समझ नहीं आते।
कुछ लोग चले गए बिना वजह बताए, मैंने भी उन्हें रोकने की वजह ढूँढ़नी छोड़ दी।
दिल से जुड़े रिश्ते टूटे थे, इसीलिए सबक भी गहरा मिला।
मैंने किसी को खोकर खुद को पाया है, ये सौदा उतना बुरा भी नहीं था।
अब किसी के बदल जाने पर दुख तो होता है, मगर हैरानी बिल्कुल नहीं होती।
मैंने अपने हिस्से की वफ़ा पूरी की थी, अब अफ़सोस की कोई वजह नहीं बची।
कुछ दूरियाँ मजबूरी नहीं होतीं, कभी-कभी वे आत्मसम्मान का फैसला होती हैं।
जो बात दिल में रह गई, रहने दी, हर एहसास को आवाज़ देना ज़रूरी नहीं होता।
मैं आज भी भावनाएँ रखता हूँ, बस अब उन्हें हर किसी पर खर्च नहीं करता।
जिसने जाना था, वह चला गया, और मैंने पीछे मुड़कर देखना छोड़ दिया।
दर्द ने मेरा रास्ता नहीं रोका, बस मुझे लोगों को पहचानना सिखा दिया।
मैं बिखरा था, ये सच है, मगर मैंने अपने टुकड़े खुद ही जोड़े हैं।
अब किसी के लौट आने की उम्मीद नहीं रखता, जो मेरा होगा, वह रुकना जानता होगा।
मैंने रिश्तों की उम्र नहीं देखी, बस उनकी सच्चाई को महत्व दिया।
कुछ लोग सबक बनकर आए, और वही उनकी सबसे बड़ी अहमियत थी।
मैंने खुद को मनाना सीख लिया है, अब हर खुशी किसी और की मोहताज नहीं।
जो दर्द कभी सबसे बड़ा लगता था, आज वही मेरी समझ का हिस्सा है।
मैंने खोने के डर से जीना नहीं छोड़ा, बस पकड़कर रखने की ज़िद छोड़ दी।
अब मेरी ख़ामोशी में उदासी कम, और आत्मसम्मान ज़्यादा सुनाई देता है।
कुछ रिश्ते अधूरे रह गए, मगर मैंने खुद को अधूरा नहीं रहने दिया।
जिस पर सबसे ज़्यादा यक़ीन था, वही दूर हो गया, अच्छा हुआ... अब भरोसा खुद पर ज़्यादा है।
दर्द हुआ था, ये बात छुपाऊँगा नहीं, मगर उसी दर्द में ठहर जाऊँ, इतना कमज़ोर भी नहीं।
कुछ जवाब कभी मिले नहीं, और मैंने कुछ सवाल पूछना छोड़ दिया।
जिसे खोया, उसकी कमी आज भी महसूस होती है, मगर अब वो कमी मेरी पहचान नहीं है।
मैंने चुप रहना इसलिए नहीं चुना कि कुछ कह नहीं सकता था, बस हर बात समझाना ज़रूरी नहीं लगा।
दिल टूटा था, मगर नज़र नहीं झुकी, मैंने दर्द सहा है, खुद को खोया नहीं।
कुछ लोग ज़िंदगी से चले गए, और मैं समझ गया कि हर साथ हमेशा के लिए नहीं होता।
अब किसी से शिकायत नहीं करता, क्योंकि उम्मीदें कम और समझ ज़्यादा हो गई है।
जिस दिन एहसास हुआ कि कद्र एकतरफ़ा है, उस दिन मोहब्बत से पहले खुद को चुन लिया।
मैं आज भी वही इंसान हूँ, बस अब हर किसी को अपनी कहानी नहीं सुनाता।
दर्द ने मुझे कड़वा नहीं बनाया, बस थोड़ा शांत और थोड़ा समझदार कर दिया।
कभी जिन बातों पर नींद उड़ जाती थी, आज उन्हीं बातों पर मुस्कुरा देता हूँ।
कुछ घाव भर जाते हैं, कुछ साथ चलते हैं, मैंने दोनों के साथ जीना सीख लिया है।
जिसे जाना था, वो चला गया, और जिसे रहना है, वो बिना मनाए रहेगा।
मैंने रिश्तों को बचाने की पूरी कोशिश की, अब खुद को बचाना भी सीख लिया है।
अंदर बहुत कुछ टूटा था, फिर भी बाहर से मुस्कुराना दिखावा नहीं, हिम्मत थी।
अब किसी के बदल जाने से हैरानी नहीं होती, मैंने वक़्त को भी बदलते देखा है।
मोहब्बत कम नहीं हुई थी, बस आत्मसम्मान उससे थोड़ा ज़्यादा ज़रूरी हो गया।
कुछ कहानियाँ पूरी नहीं होतीं, फिर भी उनका अंत इंसान को मज़बूत बना जाता है।