तुमसे दूर होने के बाद यह जाना,
किसी की कमी और किसी की याद एक जैसी नहीं होती।
कमी रोज़मर्रा को बदल देती है,
और याद कभी-कभी बस एक पल को रोकती है।
तुम्हारे साथ बिताए कुछ बिल्कुल साधारण दिन,
अब सबसे ज्यादा याद आते हैं।
तब तुम्हारा साथ सामान्य लगता था,
अब वही सामान्यपन जिंदगी की सबसे कोमल स्मृति है।
हम दोनों ने शायद प्रेम में कोई कमी नहीं छोड़ी,
बस समय और परिस्थितियाँ हमारे पक्ष में नहीं थीं।
इसलिए आज भी कोई दोषी नहीं लगता,
बस एक अधूरी कहानी का हिस्सा होने का एहसास है।
कभी मन करता है तुम्हें सब कुछ बता दूँ,
फिर सोचता हूँ, कुछ बातें समय के साथ अपनी जगह खो देती हैं।
जो कहना था, वह उस समय नहीं कहा गया,
अब उसे दोहराना शायद उस पुराने पल को वापस नहीं ला सकता।
तुम्हारी याद आती है तो अब मन सवाल नहीं करता,
न यह सोचता है कि तुम मुझे याद करते हो या नहीं।
बस कुछ पल तुम्हारे साथ बिताए समय के हो जाते हैं,
फिर जिंदगी धीरे से मुझे वापस अपनी ओर बुला लेती है।
तुम्हें चाहने की बात अब किसी से कहने की जरूरत नहीं,
वह भावना अपने आप में एक सच्चाई थी।
हम साथ नहीं रह सके,
फिर भी उस प्रेम को झूठा कह देना अपने ही अनुभव से बेईमानी होगी।
कभी किसी परिचित जगह से गुजरता हूँ,
तो लगता है जैसे समय वहीं कहीं रुका हुआ है।
फिर कदम आगे बढ़ते हैं,
और समझ आता है कि यादें पीछे रहती हैं, जिंदगी आगे चलती है।
तुमसे बिछड़ना आसान नहीं था,
पर तुम्हारे बिना खुद को पहचानना उससे भी जरूरी था।
धीरे-धीरे समझ आया,
प्रेम का अंत हमेशा मन का अंत नहीं होता।
अब उदासी आती है तो उसे जगह देता हूँ,
हर बार खुद को खुश साबित करने की कोशिश नहीं करता।
कुछ दर्द समय के साथ कम होते हैं,
और कुछ बस हमारे भीतर शांत होना सीख जाते हैं।
तुम्हारी जगह अब भी मेरी यादों में है,
पर मेरी पूरी जिंदगी में नहीं।
शायद यही वह दूरी है,
जहाँ प्रेम की सच्चाई बची रहती है और इंसान खुद को भी वापस पा लेता है।
तुम्हारी कमी अब हर पल नहीं खलती,
बस कुछ साधारण क्षणों में अचानक तुम्हारा ख्याल आ जाता है।
तब समझ आता है,
कुछ लोग जिंदगी से जाते हैं, उनकी आदतें थोड़ी देर बाद जाती हैं।
हमने साथ रहने के सपने तो देखे थे,
पर जिंदगी ने हमारे हिस्से में दूरी लिख दी।
अजीब बात है,
प्रेम सच्चा था, फिर भी कहानी पूरी नहीं हो सकी।
कभी तुम्हें कुछ बताने का मन होता है,
फिर याद आता है कि अब हमारी बातचीत वैसी नहीं रही।
एक समय था जब हर छोटी बात तुम्हारी थी,
अब वही बातें मन में आती हैं और वहीं रह जाती हैं।
तुमसे बिछड़कर मैंने तुम्हें कम नहीं चाहा,
बस तुम्हें चाहने का तरीका बदल गया।
पहले तुम्हें पाने की इच्छा थी,
अब तुम्हारी याद आती है तो बस मन थोड़ी देर ठहर जाता है।
कुछ पुराने पल आज भी बहुत करीब लगते हैं,
हालाँकि उन्हें जीने वाले लोग अब पहले जैसे नहीं रहे।
शायद समय रिश्ते नहीं मिटाता,
बस उनके भीतर छिपे अर्थ बदल देता है।
मैंने कई बार सोचा कि तुम्हें भूल जाना चाहिए,
फिर लगा, भूलना क्यों जरूरी है?
जो प्रेम कभी मेरी जिंदगी में सच्चा था,
उसे याद रखते हुए भी आगे बढ़ा जा सकता है।
तुम्हारी गैरमौजूदगी का दुख है,
पर अपनी जिंदगी रोक देने जितना नहीं।
तुम्हें खोने के बाद इतना तो सीखा,
किसी की याद को सम्मान देना और उसके लौटने की प्रतीक्षा करना अलग बातें हैं।
हमारे बीच अब कोई वादा नहीं,
फिर भी तुम्हारी खुशी की खबर सुनने की इच्छा रहती है।
शायद प्रेम का सबसे शांत रूप यही है,
जहाँ अपना हक़ खत्म हो जाए, पर शुभकामना नहीं।
कुछ शामें तुम्हारी याद को ज्यादा करीब ले आती हैं,
और कुछ दिन बिना तुम्हारे भी सहज बीत जाते हैं।
अब दोनों से शिकायत नहीं,
मन ने शायद स्वीकार करना शुरू कर दिया है कि भावनाएँ भी अपना रूप बदलती हैं।
तुम मेरी जिंदगी में नहीं हो,
लेकिन तुम्हारे साथ बिताया समय आज भी मेरे भीतर सुरक्षित है।
उदासी अब भी कभी लौटती है,
मगर उसके साथ यह भरोसा भी है कि मैं इस प्रेम को याद रखते हुए आगे जी सकता हूँ।
तुम्हारे जाने से जिंदगी खाली नहीं हुई,
बस उसमें एक ऐसी जगह बन गई जिसे कोई दूसरा भर नहीं सकता।
मैंने उस जगह को मिटाने की कोशिश नहीं की,
बस उसके आसपास अपनी जिंदगी फिर से सजाना सीख लिया।
तुमसे जुड़ी कुछ यादें आज भी मन को रोक लेती हैं,
खासकर वे पल जिन्हें हमने कभी खास समझा ही नहीं था।
तब साथ होना साधारण लगता था,
अब वही साधारणपन सबसे ज्यादा याद आता है।
हमारा प्रेम अधूरा रहा,
पर उसकी सच्चाई अधूरी नहीं थी।
शायद हर चाहत का मिलन तक पहुँचना जरूरी नहीं,
कुछ भाव अपने पूरेपन के लिए बस महसूस किए जाने भर को होते हैं।
कभी तुम्हारी याद आती है,
तो मन तुम्हें वापस बुलाने की कोशिश नहीं करता।
बस कुछ पल तुम्हारे साथ बिताए समय को याद करता है,
फिर धीरे से वर्तमान में लौट आता है।
तुमसे दूर होने के बाद जाना,
किसी की कमी और अपनी पहचान अलग चीज़ें हैं।
तुम्हारी जगह अपनी है,
लेकिन मेरी जिंदगी में अब मेरे लिए भी जगह बननी चाहिए।
कुछ सवाल आज भी भीतर चुपचाप रहते हैं,
क्यों बदला सब, कहाँ कम पड़ गया साथ।
हर सवाल का जवाब मिले, यह जरूरी नहीं,
कभी बिना जवाब के भी मन धीरे-धीरे शांत होना सीखता है।
तुम्हें भूलने की कोशिश अब नहीं करता,
क्योंकि याद मिटाना ही ठीक होना नहीं।
अब तुम्हारी याद आती है,
तो उसे स्वीकार करके अपनी राह पर आगे बढ़ जाता हूँ।
कभी किसी परिचित जगह से गुजरते हुए,
मन को लगता है जैसे तुम अभी यहीं कहीं हो।
फिर वर्तमान अपनी सच्चाई दिखाता है,
और मैं उस पल को बिना शिकायत जाने देता हूँ।
तुम्हारे साथ जो अच्छा था,
उसे सिर्फ अंत की वजह से बुरा नहीं कहूँगा।
हम साथ नहीं रह सके,
पर इसका अर्थ यह नहीं कि जो प्रेम था, वह कभी सच्चा नहीं था।
अब उदासी आती है तो बैठने देता हूँ,
उसे तुरंत खुशी में बदलने की कोशिश नहीं करता।
शायद दिल को भी अपनी गति से ठीक होने का अधिकार है,
और शायद आगे बढ़ना इसी तरह धीरे-धीरे होता है।
तुम्हारे साथ बिताए हुए दिन अब लौटते नहीं,
पर उनकी आदत अभी भी कभी-कभी मन को रोक लेती है।
अजीब-सा रिश्ता है इन यादों का,
दर्द भी देती हैं और उन्हें छोड़ने का मन भी नहीं करता।
तुम्हें चाहना धीरे-धीरे कम नहीं हुआ,
बस उसे जताने की जरूरत खत्म हो गई।
अब तुम्हारा नाम मन में आता है,
तो कोई शिकायत नहीं होती, बस एक हल्की-सी उदासी ठहर जाती है।
हमारे बीच जो अधूरा रह गया,
उसका अफसोस आज भी कहीं मौजूद है।
काश ऐसा नहीं होता, यह ख्याल आता है,
पर अब उसे बदलने की कोशिश नहीं करता।
तुमसे दूर होकर समझ आया,
प्रेम केवल साथ रहने का नाम नहीं।
कभी किसी की खुशी की खबर सुनकर भी मन अच्छा लगे,
भले उस खुशी में हमारी कोई जगह न बची हो।
कुछ शामें ऐसी होती हैं,
जब बिना किसी वजह तुम्हारी याद ज्यादा करीब लगती है।
मैं उसे रोकता नहीं,
क्योंकि हर याद को भूलना ही आगे बढ़ना नहीं होता।
तुम्हारी कमी अब मेरी जिंदगी नहीं रोकती,
बस कभी-कभी किसी खाली जगह का एहसास करा देती है।
शायद यही प्रेम का शांत रूप है,
जहाँ चाहत रहती है, पर अधिकार नहीं।
मैंने हमारे पुराने पलों को बुरा कहना नहीं सीखा,
क्योंकि उनका अंत अच्छा नहीं हुआ तो शुरुआत झूठी नहीं हो जाती।
जो समय हमने सच्चाई से जिया,
वह आज भी मेरी जिंदगी का सम्मानित हिस्सा है।
कभी लगता है तुमसे बहुत कुछ कहना बाकी है,
फिर समझ आता है कि कुछ बातें समय से बाहर निकल चुकी हैं।
अब उन्हें दोहराने के बजाय,
उनके साथ जीना सीखना शायद ज्यादा जरूरी है।
तुम लौटो, ऐसी कोई जिद नहीं,
पर तुम्हारी याद आए तो मन को रोकता भी नहीं।
प्रेम शायद वहीं सबसे शांत हो जाता है,
जहाँ चाहत रहती है, मगर सामने वाले की राह पर अपना अधिकार नहीं।
अब उदासी से डर नहीं लगता,
क्योंकि यह जानता हूँ कि वह हमेशा नहीं रहती।
तुम्हारी याद आज भी आती है,
पर उसके बाद मैं अपनी जिंदगी की ओर लौटना भी सीख गया हूँ।
तुम्हें चाहना आज भी गलत नहीं लगता,
बस अब उस चाहत का कोई भविष्य नहीं दिखता।
अजीब है न,
कुछ प्रेम खत्म नहीं होते, बस उनके साथ चलने की राह खत्म हो जाती है।
तुम्हारी याद अब किसी तय समय पर नहीं आती,
कभी किसी परिचित आवाज़ में, कभी किसी साधारण-सी बात में।
कुछ पल के लिए मन तुम्हारे पास पहुँच जाता है,
फिर वर्तमान धीरे से याद दिलाता है कि अब वहाँ मेरा ठिकाना नहीं।
हमारे बीच जो था, वह कम सच्चा नहीं था,
सिर्फ इसलिए कि वह पूरा नहीं हो पाया।
कुछ रिश्ते जिंदगी में थोड़ी देर के लिए आते हैं,
मगर जाते-जाते भीतर बहुत कुछ हमेशा के लिए बदल जाते हैं।
कभी-कभी लगता है,
अगर थोड़ा और समय मिला होता तो शायद कहानी अलग होती।
फिर खुद को समझाता हूँ,
हर अधूरी कहानी किसी गलती का परिणाम नहीं होती, कुछ बस अपने समय से छोटी होती हैं।
तुमसे जुड़ी यादों को मैंने संभालकर रखा है,
उन्हें मिटाना अब जरूरी नहीं लगता।
वे दुख देती हैं तो देती रहें,
कम से कम यह तो याद दिलाती हैं कि मैंने कभी किसी को पूरी सच्चाई से चाहा था।
तुम पास नहीं हो,
फिर भी कुछ दिनों में तुम्हारी मौजूदगी बहुत साफ़ महसूस होती है।
शायद प्रेम का यही उदास हिस्सा है,
इंसान दूर चला जाता है और उसकी आदत कुछ समय तक हमारे साथ रहती है।
मैंने तुम्हें भूलने की कोशिश नहीं की,
बस तुम्हारी याद के साथ जीना थोड़ा सीख लिया।
अब तुम्हारा ख्याल आता है,
तो मन तुम्हें पाने के बजाय बस कुछ देर तुम्हें याद करता है।
हमारी बातें अधूरी रह गईं,
कुछ सवाल पूछे नहीं गए और कुछ जवाब मिले नहीं।
शायद इसी अधूरेपन में हमारा प्रेम बचा है,
क्योंकि हर चीज़ का अंत शब्दों में होना जरूरी नहीं।
कभी तुम्हारी कमी बहुत महसूस होती है,
फिर खुद को याद दिलाता हूँ कि कमी और वापसी एक बात नहीं।
तुम्हें याद करते हुए भी आगे बढ़ना संभव है,
बस दिल को यह बात समझने में थोड़ा समय लगता है।
अब प्रेम से शिकायत नहीं,
बस उसके उस हिस्से से थोड़ी उदासी है जो मेरे हिस्से में पूरा नहीं आया।
तुम मेरी जिंदगी में नहीं हो,
फिर भी तुम्हें चाहने की सच्चाई मेरे भीतर आज भी शांत होकर मौजूद है।