नज़र ने तो बस एक बार देखा था तुझे,
मगर दिल ने उस मंज़र को उम्र भर के लिए रख लिया।
कुछ लोग मुलाक़ात से नहीं,
असर से पहचाने जाते हैं।
तेरे बारे में सोचते हुए अक्सर यह हुआ,
कि सवाल कोई और था, जवाब तू निकला।
दिल की किताब में न जाने कब,
हर सफ़्हे के बीच तेरा नाम आ गया।
हमने इश्क़ को शोर बनने नहीं दिया,
वह तहज़ीब से दिल में ठहरा रहा।
जैसे किसी पुराने घर में,
एक दिया रात भर ख़ामोशी से जलता है।
तेरी याद का करम देखिए,
तन्हाई भी अब वीरान नहीं लगती।
कोई तो है जो दिखाई नहीं देता,
मगर महसूस हर वक़्त होता है।
वो बात जो कभी कह न सके,
वही सबसे सच्ची निकली।
लबों ने जितना छुपाया,
दिल ने उतना ही संभाल कर रखा।
हमने चाहत को इज़हार का मोहताज नहीं समझा,
कुछ एहसास अपने होने से मुकम्मल होते हैं।
हर मोहब्बत का अंजाम मिलन नहीं होता,
मगर हर सच्ची मोहब्बत अधूरी भी नहीं होती।
तू पास था तो दिल को यक़ीन न आया,
तू दूर हुआ तो यक़ीन ही बाकी रह गया।
अजब दस्तूर है चाहत का,
हक़ीक़त से ज़्यादा यादें साथ देती हैं।
वो जो तेरी बातों में एक सादगी थी,
दिल उसी का क़ायल हुआ।
हुस्न तो बहुत देखे दुनिया में,
मगर सुकून हर किसी में नहीं मिला।
हमने दिल को बहुत समझाया कि भूल जाए तुझे,
दिल ने मुस्कुराकर पूछा—
जिसे भूलना हो,
क्या उसे पहले कभी भुलाया भी गया है?
तेरा ज़िक्र आते ही महफ़िल बदल जाती है,
हालाँकि नाम कोई नहीं लेता।
कुछ लोग मौजूद न होकर भी,
हर बातचीत में शामिल रहते हैं।
कभी तेरी याद धूप की तरह आई,
कभी शाम की हवा बनकर गुज़री।
मगर हर बार एक बात हुई,
दिल ने ख़ुद को तेरे क़रीब पाया।
मोहब्बत की सबसे बड़ी दिक्कत यही है,
यह समझदार लोगों को भी ख़ामोश कर देती है।
और हम तो वैसे भी,
दिल की बात कहने में कमज़ोर थे।
वो सामने बैठा रहा और हम सोचते रहे,
कि क्या उसे भी कुछ महसूस होता होगा।
इश्क़ अक्सर जवाबों से नहीं,
ऐसे ही सवालों से बना रहता है।
तेरे जाने का ग़म इतना नहीं था,
जितना तेरे बाद हर चीज़ में तुझे ढूँढने का।
कुछ लोग विदा होकर भी,
पूरी तरह जाते नहीं।
दिल ने तेरी चाहत को कोई नाम नहीं दिया,
क्योंकि हर रिश्ता नाम से नहीं बँधता।
कुछ लगाव ऐसे भी होते हैं,
जो सिर्फ़ महसूस किए जाते हैं।
तेरी यादों का भी अपना अदब है,
जब आती हैं तो शोर नहीं करतीं।
बस दिल के किसी कोने में बैठकर,
पुराने दिनों को जगा देती हैं।
हमने तुझसे मोहब्बत की थी,
यह बात दुनिया को बतानी ज़रूरी नहीं लगी।
कुछ ख़ज़ाने ऐसे होते हैं,
जिन्हें लोग नहीं, दिल सँभालते हैं।
तेरे बाद भी ज़िंदगी चलती रही,
मगर कुछ जगहें ख़ाली रहीं।
जैसे किसी किताब का सबसे सुंदर पन्ना,
अचानक गुम हो गया हो।
वो जो तेरे साथ ख़ामोश बैठने का सुख था,
वह किसी बातचीत में नहीं मिला।
हर रिश्ता शब्दों से नहीं बनता,
कुछ रिश्ते मौजूदगी से बनते हैं।
दिल को तेरी आरज़ू आज भी है,
मगर उसमें बेचैनी नहीं रही।
वक़्त ने चाहत को कम नहीं किया,
बस उसे तहज़ीब सिखा दी।
कभी लगता है तुझे भूल चुके हैं,
फिर कोई पुराना गीत सब बता देता है।
यादें अक्सर वहीं छुपी होती हैं,
जहाँ हम उन्हें खोजते नहीं।
वो इश्क़ ही क्या जिसमें ख़ुद से मुलाक़ात न हो,
तेरी चाहत ने हमें हमारा हाल बताया।
तुझे चाहने से पहले हम बस जी रहे थे,
तुझे चाहकर जीना समझ आया।
तेरे शहर का ज़िक्र आते ही,
दिल की रफ़्तार बदल जाती है।
अजब बात है कि कुछ जगहें,
सिर्फ़ इसलिए ख़ास हो जाती हैं क्योंकि वहाँ कोई रहता है।
हमने तेरी तारीफ़ कम की,
मगर तुझे सोचा बहुत।
क्योंकि कुछ लोग अल्फ़ाज़ से नहीं,
ख़यालों से चाहे जाते हैं।
तेरी ख़ामोशी भी कभी-कभी,
पूरी ग़ज़ल जैसी लगती है।
जितना समझने की कोशिश करो,
उतने नए मतलब खुलते जाते हैं।
मोहब्बत में हार-जीत का सवाल ही कहाँ था,
हम तो तेरे एहसास के हिस्सेदार बन गए।
और यह हिस्सा इतना क़ीमती निकला,
कि बाकी हिसाब भूल गए।
तेरा होना किसी जवाब जैसा नहीं,
एक रहस्य जैसा लगा हमेशा।
जितना जाना,
उतना ही और जानने की ख़्वाहिश हुई।
दिल ने तेरे लिए जो जगह बनाई थी,
वह अब भी वैसी ही है।
कुछ मकान वक़्त से पुराने होते हैं,
कुछ यादों से आबाद रहते हैं।
हमारी चाहत का अंदाज़ कुछ अलग था,
न शिकायत, न दावा, न शोर।
बस तेरे नाम की एक रौशनी थी,
जो भीतर ही भीतर जलती रही।
अगर कभी मेरी ग़ज़लों में उदासी दिखे,
तो उसे ग़म मत समझना।
कई बार गहरी मोहब्बत,
ख़ामोश लहजे में ही दिखाई देती है।
तेरी याद का भी अजब सिलसिला रहा उम्र भर,
भुलाने निकले तो और भी याद आता रहा।
न जाने इश्क़ था या कोई ख़ामोश इबादत,
तेरा ज़िक्र दिल से कभी जुदा न हो सका।
कभी तेरी बातों का असर समझ न पाए हम,
कभी अपनी ख़ामोशी का सबब खोजते रहे।
मोहब्बत शायद इसी का नाम है साहिब,
जिसे छिपाते रहे और उसी में डूबते रहे।
वो सामने था तो नज़र झुकाए बैठे रहे,
वो दूर गया तो उसी को सोचते रहे।
दिल का मुआमला भी कितना अजीब निकला,
जिसे कहना था उसी से छुपाते रहे।
तेरे ख़याल ने दिल में ऐसा घर कर लिया,
कि अब तन्हाई भी तेरी आहट लगती है।
हमने तो बहुत समझाया इस बेचैन रूह को,
मगर हर दलील तेरे नाम पर रुक जाती है।
वो पूछ बैठे कि आखिर बात क्या है,
हम मुस्कुरा दिए कि कोई बात नहीं।
किस तरह कहते कि सारी उलझनों के पीछे,
एक नाम है जो लबों तक आता नहीं।
तेरी महफ़िल में बैठे रहे ख़ामोश बहुत,
मगर दिल का शोर कम न हुआ।
अजब कैद थी तेरी मौजूदगी की,
जहाँ आज़ादी भी मिली और सुकून भी न हुआ।
मोहब्बत को हमने दावा नहीं बनाया,
बस एक एहसास की तरह सँभाल रखा है।
तू मिले या न मिले, यह और बात है,
तेरा ख़याल दिल में बसा रखा है।
वो हुस्न नहीं जो नज़रों को ठहरा दे,
वो असर है जो रूह तक उतर जाए।
कुछ लोग किताबों की तरह नहीं होते,
एक मिसरे की तरह उम्र भर याद आते हैं।
तेरे जाने के बाद भी तुझसे रिश्ता रहा,
याद की शक्ल में, दुआ की तरह।
कुछ मोहब्बतें मुकम्मल नहीं होतीं,
मगर अधूरी होकर भी कम नहीं होतीं।
दिल को तेरी चाहत का इल्म देर से हुआ,
पहले तो बस तेरी बात अच्छी लगती थी।
फिर एक दिन महसूस हुआ,
कि हर बात में तेरा होना ज़रूरी लगने लगा है।
हमने चाहा भी तो तहज़ीब के साथ चाहा,
तेरे सामने अपने दिल को कम ही खोला।
मगर यह भी सच है कि तेरे बाद,
किसी और का ख़याल दिल में न ठहरा।
तेरी याद का रंग कुछ ऐसा गहरा है,
कि वक़्त भी उसे फीका नहीं कर पाया।
कई मौसम गुज़र गए मगर,
दिल ने तेरा मौसम अलग सँभाल रखा है।
वो इश्क़ ही क्या जो हर बात कह दे,
कुछ एहसास पर्दों में अच्छे लगते हैं।
तेरा नाम लबों पर लाना ज़रूरी नहीं,
कुछ लोग ख़ामोशियों में भी बसते हैं।
अजब बात है कि तुझे सोचते हुए,
हम ख़ुद को ज़्यादा समझने लगे।
मोहब्बत शायद दूसरे तक पहुँचने से पहले,
इंसान को अपने भीतर ले जाती है।
तेरी याद आई तो कोई शोर न हुआ,
बस दिल कुछ देर तक चुप रहा।
और कभी-कभी ख़ामोशी ही बता देती है,
कि कौन अब भी भीतर मौजूद है।
हमने तुझे पाने की ज़िद कभी न की,
बस तेरे होने की ख़ुशी काफ़ी लगी।
कुछ रिश्ते नाम नहीं माँगते,
सिर्फ़ दिल में एक जगह माँगते हैं।
तेरी एक झलक पर उम्रें निसार करने वाले बहुत होंगे,
हम तो तेरी फ़िक्र पर दिल हार बैठे।
हुस्न से आगे जो इंसान दिखाई दिया,
वहीं से मोहब्बत का सफ़र शुरू हुआ।
दिल को अब भी तेरी उम्मीद नहीं,
मगर तेरी याद से इंकार भी नहीं।
यह कैसी वफ़ा है कि कोई दावा नहीं,
और कोई दूरी भी असरदार नहीं।
तेरी महक अब भी कुछ लफ़्ज़ों में रहती है,
तेरा असर कुछ ख़यालों में ठहरा हुआ है।
तू सामने नहीं तो क्या हुआ,
दिल का एक कोना अब भी तेरा हुआ है।
कभी यूँ लगा कि तुझे भूल गए हैं हम,
फिर किसी बात पर तेरा ज़िक्र आ गया।
मोहब्बत भी पुराने ख़त जैसी होती है,
बरसों बाद भी खोलो तो ताज़ा लगती है।