कुछ साल पहले की अपनी तस्वीर देखी,
तो चेहरा वही नहीं लगा जो आईने में आज दिखता है।
समय ने सिर्फ उम्र नहीं बढ़ाई,
उसने मेरी पसंद, मेरी चुप्पी और मेरी प्राथमिकताएँ भी बदल दीं।
कभी एक छोटी-सी देरी बहुत बड़ी लगती थी,
मानो सब कुछ हाथ से निकल जाएगा।
आज भी देर परेशान करती है,
पर अब हर रुकी हुई चीज़ को अंत नहीं मानता।
बीते दिनों में कई फैसले जल्दबाज़ी में लिए,
क्योंकि उस समय इंतज़ार करना कठिन लगता था।
आज समझ आया,
हर निर्णय को तुरंत पूरा करना जरूरी नहीं, कुछ को समझने का समय देना पड़ता है।
कुछ लोग बिना किसी लड़ाई के दूर हो गए,
बस बातचीत कम हुई और फिर आदत बदल गई।
समय ने रिश्ते तोड़े नहीं,
उसने बस यह साफ़ कर दिया कि कौन-सा रिश्ता किस दूरी तक साथ चलता है।
कुछ पुराने सपने अब याद तो आते हैं,
लेकिन उन्हें पूरा करने की इच्छा पहले जैसी नहीं रही।
पहले इसे बदल जाना समझता था,
अब मानता हूँ कि इंसान के बदलने के साथ उसकी चाहतों का बदलना भी स्वाभाविक है।
कभी बीते समय को वापस पाने की इच्छा होती है,
खासकर जब कोई पुरानी जगह या आवाज़ याद आ जाए।
फिर सोचता हूँ,
वापस वही दिन मिल भी जाएँ तो क्या मैं वही इंसान रहूँगा?
समय ने मेरी कई गलतियाँ नहीं मिटाईं,
बस उन्हें देखने का तरीका बदल दिया।
अब हर गलती पर शर्मिंदा होने के बजाय,
उससे मिली समझ को आज के फैसलों में इस्तेमाल करता हूँ।
कुछ इंतज़ार आज भी जारी हैं,
उनका कोई निश्चित अंत दिखाई नहीं देता।
फिर भी मैंने अपने वर्तमान को रोकना छोड़ दिया,
क्योंकि किसी उत्तर के आने तक पूरी जिंदगी स्थगित नहीं की जा सकती।
आज साधारण दिन भी थोड़ा ज्यादा महसूस करता हूँ,
किसी अपने से हुई छोटी बातचीत, शांत बैठने का समय, बिना कारण मिली खुशी।
पहले इन्हें सामान्य समझकर आगे बढ़ जाता था,
अब पता है कि जीवन का बड़ा हिस्सा इन्हीं पलों से बनता है।
भविष्य अभी भी अनिश्चित है,
पर अब उसकी हर अनिश्चितता से डरता नहीं।
समय क्या लेकर आएगा, यह मेरे हाथ में नहीं,
लेकिन जो समय अभी मिला है, उसे कैसे जीना है, यह चुनाव मेरा है।
कभी पीछे मुड़कर देखता हूँ,
तो लगता है बहुत कुछ बदल गया और पता भी नहीं चला।
कुछ आदतें छूट गईं, कुछ लोग दूर हो गए,
और कुछ बातें जिन्हें कभी बहुत बड़ा मानता था, अब मामूली लगती हैं।
बीते समय की सबसे अजीब बात यही है,
वह लौटकर नहीं आता, लेकिन अपने निशान छोड़ जाता है।
आज के कई फैसलों में,
किसी पुराने अनुभव की चुपचाप मौजूदगी महसूस होती है।
कभी किसी चीज़ के लिए बहुत जल्दी थी,
लगता था देर हुई तो सब हाथ से निकल जाएगा।
अब समझ आया,
कुछ फैसले जल्दी लेने से नहीं, सही समझ आने पर बेहतर होते हैं।
समय के साथ रिश्तों की भाषा भी बदलती है,
जो बातें पहले बिना कहे समझ आती थीं, अब समझानी पड़ती हैं।
फिर भी हर बदलाव को शिकायत नहीं बनाता,
कुछ दूरियाँ बस जीवन की बदलती जरूरतों का हिस्सा होती हैं।
कुछ पुराने सपने अब वैसे नहीं रहे,
लेकिन उन्हें याद करके अपना पुराना रूप जरूर दिखाई देता है।
शायद सपनों का बदलना भी जरूरी है,
क्योंकि उनके साथ उन्हें देखने वाला इंसान भी तो बदलता है।
कई बार लगता है कि कुछ साल यूँ ही निकल गए,
फिर उन वर्षों में किए छोटे फैसले याद आते हैं।
तब समझ आता है,
समय केवल बीता नहीं, उसने मुझे धीरे-धीरे बनाया भी है।
जो बातें आज समझ में आती हैं,
काश उन्हें कुछ साल पहले समझ पाता।
लेकिन हर समझ अपने समय पर आती है,
और देर से मिली सीख भी अगर जीवन बदल दे, तो देर पूरी तरह व्यर्थ नहीं जाती।
आज भी कुछ बीते पल लौटाने का मन करता है,
पर अब उनसे चिपके रहने की इच्छा नहीं।
यादों को साथ रख सकता हूँ,
बिना वर्तमान को उनके हवाले किए।
समय ने कुछ घावों को भरा नहीं,
बस उनके साथ जीने का तरीका बदल दिया।
अब हर दर्द को मिटाना जरूरी नहीं लगता,
कुछ अनुभव हमारे भीतर रहकर भी हमें आगे बढ़ने देते हैं।
कल को लेकर अब उतनी जल्दबाज़ी नहीं,
क्योंकि जीवन को केवल आने वाले समय के लिए टालते-टालते बहुत कुछ छूट सकता है।
जो आज मेरे पास है,
उसकी कीमत समझना भी भविष्य की तैयारी का हिस्सा है।
कुछ बीते हुए साल याद आते हैं तो लगता है,
तब परेशानियाँ बड़ी थीं या हम छोटे थे।
आज वही बातें समझ में कुछ और आती हैं,
शायद समय ने नहीं, हमारे देखने के तरीके ने हमें बदला है।
कभी एक अवसर निकल जाने पर लगा था,
कि जिंदगी ने मेरे लिए दरवाज़ा बंद कर दिया।
बहुत बाद में समझ आया,
एक छूटी हुई संभावना पूरी जिंदगी का फैसला नहीं होती।
कुछ लोग समय के साथ दूर हुए,
और कुछ ऐसे करीब आए जिनकी उम्मीद नहीं थी।
तब हर बदलाव का कारण ढूँढ़ता था,
अब हर रिश्ते को उसकी अपनी जगह स्वीकार करना सीख रहा हूँ।
बीते दिनों में लौटने की इच्छा कभी-कभी होती है,
खासकर जब कोई पुरानी चीज़ अचानक याद आ जाए।
फिर सोचता हूँ,
अगर लौट भी गया तो क्या आज वाला मैं वहाँ रह पाएगा?
समय ने कई सपनों की शक्ल बदल दी,
कुछ छोटे हुए, कुछ और स्पष्ट।
अब हर पुरानी इच्छा को बचाए रखना जरूरी नहीं लगता,
जो सच में अपना है, वह बदलकर भी भीतर पहचान में आ जाता है।
कभी लगता था कि देर होना हार है,
आज भी देर का दर्द कम नहीं हुआ।
बस इतना समझ आया,
कि समय निकलने के बाद भी जीवन में नए निर्णयों की जगह बची रहती है।
कुछ फैसलों की समझ बहुत देर से आई,
इतनी देर से कि उन्हें बदलना संभव नहीं था।
फिर मैंने पछतावे को सज़ा बनाना छोड़ दिया,
और उसकी जगह अगली बार बेहतर चुनने की जिम्मेदारी रखी।
आज के दिन भी कभी साधारण लगते हैं,
पर अब उन्हें यूँ ही गुजरने नहीं देता।
क्योंकि जो पल अभी मामूली लग रहा है,
वही किसी दिन याद बनकर सबसे ज्यादा अपना लग सकता है।
समय ने यह नहीं सिखाया कि हर चीज़ ठीक हो जाएगी,
उसने बस यह दिखाया कि भावनाएँ भी बदलती हैं।
जिस दर्द को कभी हमेशा का समझा था,
आज उसी को याद करके लगता है कि मन सच में बदल सकता है।
भविष्य अभी भी पूरी तरह साफ़ नहीं,
और शायद कभी होगा भी नहीं।
पर अब मुझे हर चीज़ पहले से जानने की जरूरत नहीं,
बस इतना काफी है कि आने वाले समय में अपने फैसलों के प्रति ईमानदार रहूँ।
कुछ साल पहले जो बहुत जरूरी लगता था,
आज उसकी जगह जीवन में कहीं और है।
समय ने मेरी पसंद नहीं छीनी,
बस यह दिखा दिया कि मेरी जरूरतें भी मेरे साथ बदलती हैं।
बीते दिनों को याद करता हूँ तो समझ आता है,
कितना कुछ उस समय बिना महसूस किए गुजर गया।
तब आगे पहुँचने की जल्दी थी,
आज पीछे छूटे साधारण पलों की कीमत समझ आती है।
कुछ मौके मेरे सामने थे,
पर मैंने उन्हें सही समय पहचानकर नहीं चुना।
अब पछतावा तो होता है,
लेकिन उसी के कारण आज के फैसलों को हल्के में नहीं लेता।
समय के साथ कुछ रिश्ते भी बदल गए,
बिना किसी बड़े झगड़े के, बस धीरे-धीरे।
पहले वजह खोजता था,
अब मानता हूँ कि हर दूरी का कोई एक दोषी होना जरूरी नहीं।
कभी किसी एक दिन को बदल देने की इच्छा होती थी,
फिर सोचता हूँ कि वही दिन मुझे आज तक लाया है।
गलतियाँ अच्छी नहीं थीं,
पर उनसे मिली समझ को अब बेकार भी नहीं मानता।
कुछ इंतज़ार इतने लंबे रहे,
कि उम्मीद से ज्यादा धैर्य की जरूरत पड़ी।
अब भी उत्तर बाकी हैं,
पर मैंने उनके आने तक अपनी जिंदगी को रोकना छोड़ दिया है।
समय ने यह भी दिखाया,
कि हर बदलाव का मतलब सुधार नहीं होता।
कुछ चीज़ें बदलकर बेहतर हुईं,
कुछ बदलीं तो बस हमें उन्हें स्वीकार करना सीखना पड़ा।
आज जब पुराने सपनों को याद करता हूँ,
तो उनमें अपना एक अलग रूप दिखाई देता है।
कुछ सपने अब मेरे नहीं रहे,
और कुछ ऐसे हैं जिन्हें समय के बाद भी छोड़ने का मन नहीं हुआ।
पहले लगता था कि देर हो गई तो सब खत्म,
अब समझता हूँ कि हर जीवन की गति अलग होती है।
देर का दुख अपनी जगह है,
पर उसे देखकर वर्तमान के सारे अवसर खो देना उससे बड़ा नुकसान है।
समय ने मुझे कोई आसान उत्तर नहीं दिया,
बस सवालों के साथ बैठना सिखाया।
जो बीत गया उसे सम्मान से याद करना,
जो सामने है उसे पूरी तरह जीना और जो आएगा उसे बिना घबराए स्वीकार करना—शायद यही सबसे बड़ी समझ है।
कुछ साल पहले जिन बातों पर घंटों सोचता था,
आज वही बातें याद बनकर हल्की मुस्कान दे जाती हैं।
समय ने सब कुछ नहीं बदला,
बस मुझे यह समझने लायक कर दिया कि क्या सच में जरूरी था।
कभी लगता था कुछ पल बहुत लंबे हैं,
अब वही पल यादों में इतने छोटे लगते हैं।
शायद जीते हुए समय की कीमत,
अक्सर उसके बीत जाने के बाद समझ आती है।
कुछ लोग जीवन में हमेशा रहने आए थे,
ऐसा उस समय सच में लगता था।
फिर समय ने दूरी बढ़ाई,
और समझ आया कि हर रिश्ता साथ रहने से नहीं, कुछ रिश्ते बदलकर भी अपना असर छोड़ जाते हैं।
कई फैसलों पर आज भी सोचता हूँ,
काश उस समय थोड़ा और समझदार होता।
फिर याद आता है,
उस उम्र में जितना समझ सकता था, उतना ही समझा था।
समय ने कुछ मौके चुपचाप सामने रखे,
और कुछ मेरी झिझक के कारण पीछे छूट गए।
अब हर बीती बात पर पछतावा नहीं करता,
कुछ खोई हुई चीज़ें भी आगे के फैसलों को साफ़ कर जाती हैं।
आज की जिंदगी कभी-कभी बहुत तेज़ लगती है,
इतनी कि अपने ही दिनों को महसूस करने का समय नहीं मिलता।
इसलिए अब कुछ पल बिना किसी उद्देश्य के भी रखता हूँ,
ताकि जीवन केवल पूरा किए गए कामों की सूची न बन जाए।
कुछ बदलाव मैंने चुने नहीं थे,
फिर भी उनके साथ जीना पड़ा।
शुरुआत में विरोध था,
बाद में समझ आया कि स्वीकार करना हमेशा सहमति नहीं होता, कभी-कभी आगे बढ़ने की जरूरत होता है।
समय बीता तो कुछ शिकायतें छोटी लगने लगीं,
और कुछ साधारण पल बहुत कीमती।
जो कभी सामान्य लगता था,
आज उसी की कमी सबसे ज्यादा महसूस होती है।
भविष्य को लेकर पहले जल्दी रहती थी,
हर चीज़ अभी और तुरंत चाहिए होती थी।
अब थोड़ा ठहरना सीख गया हूँ,
क्योंकि हर देरी नुकसान नहीं और हर जल्दी सही नहीं होती।
मैं पीछे मुड़कर अपने पुराने रूप को देखता हूँ,
तो कई गलतियाँ साफ़ दिखाई देती हैं।
उन्हें मिटा नहीं सकता,
पर उनसे मिली समझ को आज की जिंदगी में बेकार जाने भी नहीं देता।