तुम्हारे लिए मेरा स्नेह उन दिनों में भी कम नहीं होता,
जब तुम खुद अपने भीतर उलझी होती हो।
मैं तुम्हारी हर उलझन सुलझा दूँ, यह दावा नहीं,
बस इतना चाहता हूँ कि तुम्हें उसे अकेले छिपाना न पड़े।
तुम्हारी खुशी में शामिल होना आसान है,
तुम्हारी उदासी को बिना कारण पूछे समझना कठिन।
फिर भी तुम्हारे कठिन दिनों में मौजूद रहना चाहता हूँ,
क्योंकि अपनापन केवल अच्छे समय की आदत नहीं होता।
तुम्हारी खूबियाँ मुझे आकर्षित करती हैं,
पर तुम्हारी कमियाँ तुम्हें इंसान बनाती हैं।
मैं तुम्हें आदर्श बनाकर नहीं चाहता,
मैं तुम्हें समझते हुए चाहता हूँ, और यही भावना मुझे सच्ची लगती है।
तुम्हारे हर निर्णय में मेरी सहमति जरूरी नहीं,
तुम्हें अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का पूरा अधिकार है।
मेरा प्रेम तुम्हारे रास्ते को छोटा नहीं करेगा,
बस जब तुम चाहो, मेरे साथ को तुम्हारे लिए सहज रखेगा।
मैं तुम्हारी हर गलती माफ़ कर दूँगा, ऐसा वादा भी नहीं,
क्योंकि प्रेम में सीमाएँ भी जरूरी हैं।
पर किसी एक गलती के कारण
तुम्हारे पूरे व्यक्तित्व को नकार देना भी मुझे सही नहीं लगता।
तुम्हारे साथ होने की खुशी मुझे है,
लेकिन तुम्हें हर समय अपने पास रखने की ज़िद नहीं।
तुम अपनी दुनिया में व्यस्त रहो,
फिर भी जब मिलो तो हमारे बीच अपनापन वैसा ही सहज रहे।
मैं तुमसे बदले में कुछ माँगकर प्रेम नहीं करता,
बस ईमानदारी चाहता हूँ ताकि हमारा रिश्ता भ्रम पर न टिका रहे।
तुम्हारा मन जहाँ हो, उसे सच कहने की जगह मिले,
और मेरे मन को भी वही अधिकार मिले।
अगर कभी तुम मुझसे आगे बढ़कर कुछ हासिल करो,
तो मेरी खुशी में कोई कमी नहीं आएगी।
तुम्हारी सफलता मेरी जगह कम नहीं करती,
क्योंकि प्रेम प्रतियोगिता नहीं, एक-दूसरे की खुशी में जगह बनाने का नाम है।
कभी तुम्हें मेरी जरूरत होगी तो पास रहूँगा,
और कभी तुम्हें अकेले अपने फैसले लेने होंगे तो पीछे हट जाऊँगा।
हर समय साथ रहना जरूरी नहीं,
विश्वास इतना होना चाहिए कि दूरी में भी अपनापन सुरक्षित रहे।
तुम्हें चाहना मेरे लिए तुम्हें पूरा करने की कोशिश नहीं,
क्योंकि तुम मेरे आने से पहले भी पूरी थीं।
मैं बस तुम्हारी जिंदगी में ऐसा रिश्ता बनना चाहता हूँ,
जहाँ तुम खुद होकर रह सको और फिर भी खुद को अकेला महसूस न करो।
तुम्हें चाहना मेरे लिए कोई सौदा नहीं,
कि मैं कुछ दूँ और बदले में तुम्हारा प्रेम माँगूँ।
तुम्हारी खुशी मेरे लिए मायने रखती है,
भले उस खुशी में मेरी कोई भूमिका न हो।
तुम्हारी कमियों से प्रेम करना उन्हें सही मान लेना नहीं,
बस तुम्हें केवल तुम्हारी गलतियों से पहचानने से इनकार करना है।
मैं तुम्हें पूरा इंसान मानता हूँ,
जिसमें खूबियाँ भी हैं और सीखते रहने की जगह भी।
तुम्हें अपनी बात कहने के लिए मेरे सामने बदलने की जरूरत न पड़े,
मेरे साथ तुम्हें अपने मन की सच्चाई छिपानी न पड़े।
अगर प्रेम में मन को हर समय सावधान रहना पड़े,
तो साथ होते हुए भी इंसान अकेला महसूस करने लगता है।
तुम्हारे कठिन दिनों में मैं तुम्हें जल्दी से ठीक नहीं करना चाहता,
बस तुम्हारे पास इतनी जगह बनाना चाहता हूँ कि तुम खुलकर थक सको।
हर परेशानी का हल मेरे पास नहीं,
मगर तुम्हारी परेशानी को समझने की कोशिश हमेशा रहे।
तुम अपने फैसले खुद लो,
मेरी परवाह तुम्हारी स्वतंत्रता से बड़ी नहीं होनी चाहिए।
मैं तुम्हारे करीब रहना चाहता हूँ,
तुम्हारी जिंदगी पर अधिकार नहीं रखना।
अगर कभी मेरी बात तुम्हें गलत लगे,
तो मुझसे असहमत होने में तुम्हें डर न लगे।
सच्चा अपनापन वह है,
जहाँ प्रेम बना रहे और फिर भी दोनों अपने सच बोल सकें।
तुम बदलोगी तो मैं तुम्हें पुराने रूप में खोजने की जिद नहीं करूँगा,
क्योंकि मुझे तुम्हारी बीती तस्वीर से नहीं, तुम्हारे आज से रिश्ता रखना है।
समय तुम्हें नया बनाए,
तो मुझे तुम्हें नए सिरे से समझने का धैर्य भी रखना होगा।
तुम्हारी खुशी के लिए हर बार कुछ बड़ा करना जरूरी नहीं,
कभी तुम्हारी चुप्पी को जगह देना भी care है,
कभी तुम्हारी थकान पहचान लेना,
और कभी बिना पूछे तुम्हें थोड़ा अपना समय दे देना भी प्रेम है।
मैं तुम्हें खोने के डर से तुम्हें बाँधना नहीं चाहता,
क्योंकि डर से बचा रिश्ता सुरक्षित नहीं होता।
मुझे वह अपनापन चाहिए,
जिसमें तुम रहो क्योंकि तुम्हारा मन चाहता है, इसलिए नहीं कि तुम्हें जाना मुश्किल लगे।
और अगर किसी दिन हमारी राहें अलग भी हो जाएँ,
तो मेरा प्रेम तुम्हारे लिए बुरा नहीं चाहेगा।
क्योंकि तुम्हें सच्चा चाहना
सिर्फ तुम्हें अपने पास रखने की इच्छा नहीं, तुम्हारे सुख का सम्मान करना भी है।
तुम्हें चाहने के लिए तुम्हारी हर बात का मेरे मन के मुताबिक होना जरूरी नहीं,
तुम्हारी अपनी सोच रहे, अपनी जिद रहे, अपने फैसले रहें।
मुझे बस इतना चाहिए,
कि इन सबके बीच हम एक-दूसरे को समझने की कोशिश न खोएँ।
तुम्हारी खुशी देखकर मन प्रसन्न होता है,
भले उस खुशी की वजह मैं न हूँ।
शायद यही प्रेम की सबसे साफ़ पहचान है,
जब किसी की मुस्कान पर अपना अधिकार नहीं, बस सच्ची खुशी होती है।
तुम्हारी कमियों को जानकर भी तुम्हारे पास रहना चाहता हूँ,
मगर उन्हें बदलने का भार अपने प्रेम पर नहीं रखूँगा।
तुम्हें स्वीकार करना अलग बात है,
और तुम्हारी गलतियों को सही ठहराना अलग।
जब तुम्हारा दिन अच्छा न हो,
तो मैं तुम्हें तुरंत संभालने की कोशिश नहीं करूँगा।
कभी-कभी मन को समाधान नहीं,
बस एक ऐसी जगह चाहिए होती है जहाँ वह बिना डर के अपना बोझ रख सके।
तुम्हें मेरे लिए हर समय उपलब्ध रहना जरूरी नहीं,
तुम्हारे अपने काम और अपनी दुनिया भी उतनी ही जरूरी हैं।
हमारा रिश्ता तुम्हारी जिंदगी का हिस्सा हो,
तुम्हारी पूरी जिंदगी नहीं।
मैं तुमसे प्रेम करता हूँ,
इसलिए तुम्हारी हर बात पर सहमत होना जरूरी नहीं समझता।
जहाँ तुम्हें रोकना सही लगेगा, वहाँ सच कहूँगा,
और जहाँ तुम्हारा फैसला तुम्हारा अधिकार है, वहाँ पीछे हटना भी जानूँगा।
तुम्हारे बदलते रूप से डरना नहीं चाहता,
क्योंकि इंसान समय के साथ एक जैसा नहीं रहता।
अगर तुम्हारी सोच बदले,
तो मैं पुराने रूप की याद में तुम्हें बाँधने के बजाय तुम्हें फिर से जानना चाहूँगा।
मेरी परवाह का अर्थ यह नहीं कि मैं तुम्हारी हर परेशानी अपने ऊपर ले लूँ,
बस इतना कि तुम्हें अकेले सब कुछ छिपाकर सहना न पड़े।
जब साथ चाहिए हो, मैं रहूँ,
और जब तुम्हें अपनी जगह चाहिए हो, उसे भी सम्मान दूँ।
तुम्हारे बदले में प्रेम मिले, यह इच्छा स्वाभाविक है,
पर मेरे स्नेह की कीमत तुम्हारी मजबूरी नहीं हो सकती।
तुम्हारा मन स्वतंत्र रहे,
और फिर भी मेरे पास आने में तुम्हें अपनापन महसूस हो—बस इतना काफी है।
अगर कभी हम एक-दूसरे से असहमत हों,
तो मैं जीतने से पहले रिश्ते को बचाने की कोशिश करूँगा।
क्योंकि मेरे लिए बिना शर्त प्रेम का अर्थ यह नहीं कि सब कुछ सह लिया जाए,
बल्कि यह है कि सच, सम्मान और स्वतंत्रता के साथ भी अपनापन बना रहे।
तुम्हारे लिए मेरा अपनापन किसी हिसाब पर नहीं टिका,
तुम कितना देती हो, कितना समझती हो—मैंने कभी यह गिना नहीं।
बस तुम्हारी खुशी की खबर मन को अच्छी लगती है,
और तुम्हारी परेशानी में बिना कहे साथ देने का मन करता है।
तुम्हारी हर बात मुझे पसंद आए, ऐसा नहीं,
कभी तुम्हारी सोच से मेरी सोच बिल्कुल अलग भी होगी।
फिर भी मतभेद के उस पार तुम्हें समझने की इच्छा रहे,
क्योंकि प्रेम में सहमत होना ही नहीं, सम्मान करना भी जरूरी है।
तुम्हारे जीवन में मेरी जगह महत्वपूर्ण हो,
यह चाहत हो सकती है, अधिकार नहीं।
तुम्हारे अपने फैसले, अपने सपने और अपनी दुनिया रहें,
मैं उनमें जगह माँगूँ नहीं, मिले तो उसे सहेजकर रखूँ।
तुम्हारे कठिन दिनों में तुम्हें मजबूत बनने की सलाह नहीं दूँगा,
अगर मन थक गया हो तो उसे थकने की जगह दूँगा।
हर परेशानी का समाधान नहीं होता,
कभी किसी का बिना निर्णय किए साथ रहना ही काफी होता है।
तुम्हारी कमियाँ देखकर मेरा अपनापन कम नहीं होना चाहिए,
लेकिन उन्हें सही ठहराना भी प्रेम नहीं।
अगर कभी मेरी बात सच में तुम्हारे काम आ सके,
तो तुम्हें खुश करने के बजाय ईमानदारी से सच कहना चुनूँगा।
मैं तुम्हारे लिए बहुत कुछ करना चाहता हूँ,
मगर ऐसा कुछ नहीं जो तुम्हारी स्वतंत्रता छीन ले।
मेरी परवाह तुम्हें सहारा दे,
तुम्हें अपने ही फैसलों के लिए मुझ पर निर्भर न बनाए।
अगर कभी तुम्हें मेरी जरूरत न हो,
तो भी मेरा सम्मान कम नहीं होगा।
प्रेम का अर्थ हर समय पास रहना नहीं,
कभी-कभी बिना शोर किए दूसरे को अपनी जगह देना भी होता है।
तुम बदलोगी, तुम्हारी प्राथमिकताएँ बदलेंगी,
और शायद मेरी भी।
बस इतना रहे,
कि बदलाव के बीच हम एक-दूसरे को समझने की कोशिश करना बंद न करें।
तुम्हारे साथ अच्छा समय बाँटना आसान है,
तुम्हारे कठिन समय को समझना ज्यादा जरूरी।
क्योंकि खुशी में साथ देने वाले बहुत मिलते हैं,
पर बिना कोई श्रेय चाहे किसी की थकान समझ लेना दुर्लभ होता है।
मैं तुम्हें इसलिए नहीं चाहता कि तुम मेरी जरूरत पूरी करती हो,
तुम्हें चाहना मेरे लिए किसी कमी को भरना नहीं।
तुम अपनी जगह पूरी हो,
और मेरा प्रेम बस इतना है कि तुम्हारी पूरी जिंदगी में मेरी मौजूदगी तुम्हारे लिए सुकून की वजह बने, बोझ की नहीं।
तुम्हारी अच्छाइयों से लगाव होना आसान था,
पर तुम्हारी कमियों को समझते हुए भी अपनापन बना रहे, वहीं प्रेम गहरा हुआ।
मुझे तुम्हारा हर रूप पसंद आए, यह जरूरी नहीं,
बस तुम्हें समझने की इच्छा हर बार खत्म न हो।
मैं तुम्हारी खुशी का कारण बनना चाहता हूँ,
लेकिन तुम्हारी खुशी की एकमात्र वजह नहीं।
तुम्हारी अपनी दुनिया, अपने सपने और अपने फैसले रहें,
और उनमें मेरे लिए भी एक सहज-सी जगह बनी रहे।
तुमसे प्रेम का अर्थ तुम्हारी हर बात मान लेना नहीं,
कभी तुम्हें सच बताना भी उसी अपनापन का हिस्सा है।
जहाँ सम्मान बचा रहे,
वहाँ असहमति भी रिश्ते को तोड़ने के बजाय समझने का रास्ता बन सकती है।
तुम्हारे कठिन दिनों में मैं तुम्हें बदलने नहीं,
तुम्हें वैसे ही सुनने के लिए रहना चाहता हूँ।
हर परेशानी का हल मेरे पास नहीं होगा,
पर तुम्हारी परेशानी को छोटा समझने की गलती नहीं करूँगा।
तुम्हारी कुछ आदतें मुझे पसंद नहीं,
और मेरी कुछ बातें तुम्हें भी खल सकती हैं।
फिर भी अगर हम दोनों एक-दूसरे को सुधारने से पहले समझने लगें,
तो शायद प्रेम अपनी सबसे सच्ची जगह पा लेता है।
मैं तुम्हें अपने प्रेम के बदले कुछ देने के लिए मजबूर नहीं करना चाहता,
न तुम्हारी भावनाओं को अपने पक्ष में मोड़ना।
मैं जो महसूस करता हूँ,
उसे सच्चाई से जीना ही मेरे लिए पर्याप्त है।
तुम्हारे फैसले हमेशा मेरे मन के मुताबिक हों,
ऐसी कोई इच्छा नहीं।
बस इतना भरोसा रहे,
कि अलग सोचने पर भी हम एक-दूसरे की गरिमा कम नहीं करेंगे।
कभी तुम बहुत पास रहोगी,
कभी अपने काम और सपनों में व्यस्त।
मैं हर दूरी को कमी नहीं समझना चाहता,
क्योंकि प्रेम में जगह देना भी उतना ही जरूरी है जितना साथ देना।
अगर कभी मेरी वजह से तुम्हें दुख पहुँचे,
तो मेरे प्रेम का हवाला देकर उसे सही नहीं ठहराऊँगा।
तुम्हारी चोट मेरे लिए महत्वपूर्ण होगी,
क्योंकि अपनापन वही है जिसमें दूसरे की सीमा भी अपनी जिम्मेदारी लगने लगे।
तुम्हें पाने से ज्यादा,
मैं चाहता हूँ कि तुम्हारे साथ रहते हुए तुम खुद जैसी रह सको।
मेरे प्रेम में तुम्हें बदलने की शर्त न हो,
बस इतनी जगह हो कि तुम सुरक्षित होकर अपने सारे रंग जी सको।
तुम्हारी खूबियों से प्रेम करना आसान था,
मुझे तुम्हारी उलझनों ने तुम्हें और करीब से समझना सिखाया।
तुम हर दिन एक जैसे नहीं रहोगे,
फिर भी तुम्हें हर नए रूप में जानने की इच्छा बनी रहेगी।
तुम खुश हो तो अच्छा लगता है,
पर तुम्हारी खुशी को अपनी मौजूदगी का ऋणी नहीं बनाना चाहता।
तुम्हारी अपनी दुनिया बनी रहे,
मेरे प्रेम की खूबसूरती तभी है जब उसमें तुम्हारी आज़ादी भी सुरक्षित रहे।
मैं तुम्हारी हर बात से सहमत रहूँ, ऐसा नहीं,
कभी तुम्हारी गलती पर तुम्हें रोकूँगा भी।
क्योंकि सच्चा अपनापन सिर्फ सहमति नहीं देता,
वह जरूरत पड़ने पर सच कहने का साहस भी रखता है।
तुम्हें कुछ साबित करके मेरा प्रेम हासिल नहीं करना,
न मुझे हर दिन अपने प्रेम का प्रमाण चाहिए।
तुम जैसे सहज होकर मेरे पास रह सको,
मेरे लिए वही रिश्ते की सबसे बड़ी खूबसूरती है।
तुम्हारी कमियाँ मुझे डराती नहीं,
क्योंकि मुझे कोई पूरा इंसान नहीं चाहिए।
बस इतना चाहता हूँ,
तुम अपनी कमियों को समझो और मैं तुम्हें समझने में जल्दबाज़ी न करूँ।
तुम्हारे कठिन दिनों में तुम्हें ठीक करने नहीं आऊँगा,
बस इतना चाहता हूँ कि तुम्हें सब कुछ अकेले संभालने का दिखावा न करना पड़े।
कभी मेरी जरूरत हो तो कह देना,
और कभी मेरी जरूरत न हो तो भी अपने रास्ते पर निःसंकोच चलना।
मैं तुम्हें इसलिए नहीं चाहता कि तुम मेरी जिंदगी आसान बनाती हो,
बल्कि इसलिए कि तुम्हारे होने से मुझे तुम्हारी खुशी की परवाह होने लगी है।
इसमें कोई हिसाब नहीं,
बस एक शांत-सी इच्छा है कि तुम्हारे हिस्से में सुकून ज्यादा हो।
अगर कभी हमारे बीच दूरी आ जाए,
तो मेरा अपनापन तुम्हारी सीमाएँ पार नहीं करेगा।
प्रेम तुम्हारे पास रहने की इच्छा है,
तुम्हारी जगह पर कब्ज़ा करने का अधिकार नहीं।
तुम्हारे बदलने से मेरा प्रेम हर बार वैसा ही रहे,
यह दावा नहीं करूँगा।
पर इतना जरूर चाहता हूँ,
हर बदलाव के बाद तुम्हें नए सिरे से समझने की ईमानदार कोशिश करूँ।
तुम्हें चाहना मेरे लिए पाना नहीं,
तुम्हारे अस्तित्व की कद्र करना है।
तुम मेरे साथ रहो तो आभार,
अपनी राह चुनो तो भी तुम्हारे लिए मन में सम्मान बना रहे।