मैंने अपने लिए जगह बनाई है,
किसी की जगह लेकर नहीं।
हर मोड़ पर बदल जाना हुनर नहीं होता,
कुछ लोग अपने होने पर भी कायम रहते हैं।
मैंने पहचान को शोर से नहीं जोड़ा,
इसलिए ख़ामोशी भी मेरा परिचय देती है।
मैं वहाँ नहीं चमकता जहाँ रोशनी ज़्यादा हो,
मुझे अपना उजाला साथ रखने की आदत है।
मेरी सोच किराए की नहीं,
इसलिए हर चलन मुझ पर लागू नहीं होता।
मैंने भीड़ को ग़लत नहीं कहा,
बस ख़ुद को उसमें खोने से बचा लिया।
मेरे रास्ते अक्सर नक़्शों में नहीं मिलते,
मैं मंज़िल से पहले अर्थ तलाशता हूँ।
मैंने वक़्त से दोस्ती कर ली,
अब जल्दबाज़ी मुझे प्रभावित नहीं करती।
कुछ लोग पहचान बनाते हैं,
कुछ लोग ऐसा काम करते हैं कि पहचान बन जाती है।
मैंने अपने सपनों को आवाज़ नहीं दी,
उन्हें आदत बना लिया।
मुझे सबसे आगे नहीं रहना,
मुझे अपने मक़सद के सबसे क़रीब रहना है।
मैंने अपनी कहानी में शॉर्टकट नहीं लिखे,
इसलिए सफ़र आज भी गर्व देता है।
मेरे लिए क़ीमत का मतलब अलग है,
जो बिक जाए, उसे मैं उपलब्धि नहीं मानता।
मैं कम बोलता हूँ,
ताकि मेरे काम को बीच में अनुवादक न चाहिए।
मैंने अपने उसूलों को मौसम नहीं बनाया,
हर परिस्थिति में एक जैसा रखा है।
मैं हर जगह याद नहीं रखा जाना चाहता,
बस जहाँ रहूँ, वहाँ सच्चा रहूँ।
मैंने अपनी रफ़्तार दूसरों से नहीं नापी,
इसीलिए सफ़र का आनंद भी बचा रहा।
कुछ लोग मौक़ों का इंतज़ार करते हैं,
मैंने तैयारी को ही अपना मौक़ा बना लिया।
मेरे पास दिखाने को बहुत कम है,
मगर बनाने को अभी बहुत कुछ है।
मैंने कभी ऊँचा दिखने की कोशिश नहीं की,
गहराई अपने आप ध्यान खींच लेती है।
मैंने दुनिया को प्रभावित करने से पहले,
अपने विचारों को प्रभावित करना सीखा।
मेरी पहचान किसी एक उपलब्धि पर नहीं टिकी,
मैं रोज़ थोड़ा-थोड़ा बनता हूँ।
मैं हर आवाज़ पर मुड़ता नहीं,
मुझे अपनी दिशा पर भरोसा है।
मैंने पसंद किए जाने से ज़्यादा,
सम्मान के योग्य बनने पर मेहनत की है।
मैं साधारण दिख सकता हूँ,
मगर मेरी सोच ने कभी साधारण रास्ते नहीं चुने।
मैं भीड़ में शामिल नहीं हुआ,
इसलिए पहचान बनाने में थोड़ा वक़्त लगा।
कुछ लोग हस्ताक्षर बदलते रहे,
मैंने अपना किरदार मज़बूत कर लिया।
मैंने ख़ुद को साबित करने की जल्दी नहीं की,
बीज भी शोर नहीं करता, फिर पेड़ बन जाता है।
मेरे रास्ते सीधे नहीं दिखते,
मैं मंज़िल से ज़्यादा अपने तरीक़ों का ख़याल रखता हूँ।
मैं हर जगह मौजूद नहीं रहता,
कुछ चीज़ें दुर्लभ हों तो उनकी क़ीमत बनी रहती है।
मैंने ऊँचा दिखने के लिए क़द नहीं बढ़ाया,
बस झुकने की आदत कम कर दी।
मेरे बारे में राय अक्सर अधूरी होती है,
मैं पहली नज़र में कभी पूरा दिखाई नहीं देता।
मैंने अपने हिस्से का आसमान ख़ुद चुना है,
उड़ान की नकल करके परिंदे अलग नहीं होते।
मैं लकीरों पर चलने वालों में नहीं,
मुझे खाली जगहों में रास्ते दिखाई देते हैं।
मेरी सादगी को पढ़ना आसान नहीं,
सफ़ेद काग़ज़ भी कई बार पूरी किताब छुपाए रखता है।
मैं वहाँ कम दिखाई देता हूँ,
जहाँ लोग दिखने के लिए मौजूद होते हैं।
मेरे सपनों का शोर बाहर नहीं आता,
कुछ निर्माण दीवारों के पीछे होते हैं।
मैं तुलना की मेज़ पर कभी बैठा ही नहीं,
इसलिए हार और जीत का हिसाब अलग है मेरा।
मैंने पहचान को कपड़ों की तरह नहीं पहना,
उसे आदतों में बसाया है।
जो मुझे समझ लेते हैं,
उन्हें मेरा परिचय दोबारा नहीं चाहिए।
मैंने मंज़िलों से एक बात सीखी,
नक़्शे सबके पास होते हैं, दिशा सबकी अपनी होती है।
मैं भीड़ से अलग दिखने नहीं निकला,
बस ख़ुद से अलग होना कभी मंज़ूर नहीं किया।
मेरे शब्द कम हैं,
क्योंकि मैं असर को वाक्यों में नहीं, वजूद में रखता हूँ।
मैंने अपने लिए ऐसे उसूल चुने हैं,
जो ताली मिलने पर भी नहीं बदलते।
मैं उन दरवाज़ों पर नहीं जाता,
जहाँ पहचान बतानी पड़े।
कुछ लोग तस्वीर सँवारते हैं,
मैंने नज़रिया सँवारना ज़्यादा ज़रूरी समझा।
मेरी रफ़्तार का अंदाज़ा मत लगाओ,
मैं कई बार ठहरकर भी आगे बढ़ रहा होता हूँ।
मैं चलन से नहीं चलता,
मुझे अपने विचारों की ऋतु ज़्यादा पसंद है।
मैंने ख़ुद को इतना सच रखा है,
कि दिखावा मेरे पास आकर भी टिकता नहीं।
मेरी मौजूदगी का तरीका अलग है,
मैं याद कम आता हूँ, मगर भुलाया भी नहीं जाता।