ज़िंदगी ने मुझे हर बार वही नहीं दिया जो मैं चाहता था,
लेकिन जो दिया, उसने मुझे पहले से बेहतर बना दिया।
मैं अब रास्तों की कठिनाई नहीं गिनता,
मुझे अपनी मंज़िल पर भरोसा ज़्यादा है।
ज़िंदगी की सबसे बड़ी सीख यह रही,
कि टूटे बिना मज़बूत होना संभव नहीं।
मैंने कई बार ख़ामोशी में संघर्ष किया है,
इसीलिए आज शोर से प्रभावित नहीं होता।
ज़िंदगी ने जब उम्मीदों के विपरीत मोड़ लिया,
तब मैंने शिकायत नहीं, दिशा बदलना सीखा।
मैं अपने बीते हुए कल से भागता नहीं,
वहीं से तो मेरी ताकत की शुरुआत हुई थी।
ज़िंदगी ने मुझे लोगों की पहचान कराई,
और अकेले चलने का साहस भी दिया।
मैंने मुश्किल दिनों को सज़ा नहीं समझा,
वो मेरे धैर्य की परीक्षा थे।
ज़िंदगी में कुछ जीतें देर से मिलीं,
लेकिन इतनी पक्की मिलीं कि अब खोने का डर नहीं।
मैंने हर मोड़ पर ख़ुद को चुना है,
तभी आज आईने में नज़रें मिलाकर खड़ा हूँ।
ज़िंदगी ने मुझे गिराया भी है,
मगर हर बार उठने का कारण भी दिया है।
अब मैं हर बंद दरवाज़े पर दस्तक नहीं देता,
कुछ रास्ते मेरे लिए बने ही नहीं थे।
ज़िंदगी ने सिखाया कि सम्मान माँगा नहीं जाता,
उसे अपने व्यवहार से कमाया जाता है।
मैंने वक़्त के साथ बदलना सीखा है,
लेकिन अपने उसूल कभी नहीं बदले।
ज़िंदगी में सबसे कीमती चीज़ सुकून है,
और मैंने उसे किसी भी कीमत पर बेचने से इंकार किया है।
मैं अब मंज़ूरी की तलाश में नहीं रहता,
मेरे फैसलों का भरोसा ही मेरी ताकत है।
ज़िंदगी ने मेरे धैर्य को कई बार परखा,
और हर परीक्षा के बाद मैं पहले से शांत हुआ हूँ।
मैंने अपने संघर्षों को बोझ नहीं बनने दिया,
उन्हें अपनी पहचान का हिस्सा बना लिया।
ज़िंदगी ने मुझे सिखाया कि मज़बूत लोग रोते नहीं, यह सच नहीं,
सच यह है कि वे आँसू के बाद भी रुकते नहीं।
मैं आज जहाँ हूँ, वहाँ किस्मत से कम पहुँचा हूँ,
और लगातार कोशिशों से ज़्यादा।
ज़िंदगी ने मुझे आसान रास्ते कम दिए हैं,
शायद इसलिए मुश्किलों से डरना कभी सीखा ही नहीं।
मैं अब हर चोट का हिसाब नहीं रखता,
कुछ ज़ख्म इंसान को समझदार बनाने आते हैं।
ज़िंदगी ने जब दरवाज़े बंद किए,
तब मैंने अपनी हिम्मत को रास्ता बनाते देखा।
मैं पहले हालातों से लड़ता था,
अब उनसे सीखकर आगे बढ़ता हूँ।
ज़िंदगी की सबसे बड़ी जीत यही रही,
कि कठिन दिनों ने मेरा भरोसा नहीं तोड़ा।
मैंने कई बार शुरुआत दोबारा की है,
इसलिए अब अंत मुझे डराते नहीं।
ज़िंदगी ने सिखाया कि हर साथ हमेशा का नहीं होता,
तभी मैंने ख़ुद का साथ निभाना सीख लिया।
मैंने हार को बदनामी नहीं माना,
वो तो मेरे सफ़र की सबसे ईमानदार शिक्षक निकली।
ज़िंदगी ने कभी वादे नहीं किए,
फिर भी मैंने उम्मीदों को मेहनत से जोड़कर रखा।
मैं आज भी मुस्कुराता हूँ,
क्योंकि संघर्षों ने मुझे कड़वा नहीं, मज़बूत बनाया है।
ज़िंदगी के हर कठिन मोड़ ने एक बात साफ़ की,
सहारा बदल सकता है, हौसला नहीं।
मैंने शिकायतों की जगह प्रयास चुना,
तभी रास्ते धीरे-धीरे साफ़ होते गए।
ज़िंदगी ने मुझे भीड़ में नहीं निखारा,
अक्सर मैं अकेला था जब सबसे ज़्यादा बढ़ रहा था।
अब मैं हर हार पर परेशान नहीं होता,
कुछ देरी से मिलने वाली चीज़ें ज़्यादा स्थायी होती हैं।
ज़िंदगी ने मेरी योजनाएँ कई बार बदलीं,
लेकिन मेरे इरादों को कभी नहीं झुका पाई।
मैंने उन दिनों में भी ख़ुद पर भरोसा रखा,
जब मेरे पास भरोसा करने वाला कोई और नहीं था।
ज़िंदगी का दबाव मुझे रोक नहीं पाया,
क्योंकि मैंने बोझ नहीं, ज़िम्मेदारी उठाना सीखा था।
अब मैं हर किसी को अपनी कहानी नहीं सुनाता,
मेरी सोच और मेरा व्यवहार बहुत कुछ कह देते हैं।
ज़िंदगी ने जो नहीं दिया, उसका दुख कम है,
जो सिखाया है, उसकी कीमत ज़्यादा है।
मैंने अपने सफ़र को दूसरों की गति से नहीं मापा,
हर इंसान की मंज़िल का समय अलग होता है।
ज़िंदगी ने कई बार मुझे परखा है,
और हर बार मैं पहले से थोड़ा बेहतर निकला हूँ।
मैंने अपने आत्मसम्मान को परिस्थितियों पर नहीं छोड़ा,
इसलिए मुश्किल वक़्त भी मुझे छोटा नहीं कर पाया।
ज़िंदगी में ठोकरें कम नहीं मिलीं,
लेकिन अब मेरा संतुलन पहले से बेहतर है।
मैंने दर्द को पहचान बना लेने से इंकार किया,
मैंने उसे ताकत में बदलना चुना।
ज़िंदगी के कुछ अध्याय बहुत कठिन थे,
लेकिन उन्हीं ने मुझे अपने बारे में सबसे ज़्यादा सिखाया।
मैं अब हर बात पर प्रतिक्रिया नहीं देता,
अनुभव ने सिखाया है कि शांति भी एक जवाब होती है।
ज़िंदगी ने कभी मुझे विशेष छूट नहीं दी,
शायद इसी वजह से मैं मज़बूत बन गया।
मैंने अपने सपनों को हालातों के भरोसे नहीं छोड़ा,
उनके लिए रोज़ थोड़ा-थोड़ा संघर्ष किया है।
ज़िंदगी को जीतना मेरा लक्ष्य नहीं,
उसे सम्मान के साथ जीना मेरी प्राथमिकता है।
आज जो आत्मविश्वास दिखता है,
वो किसी एक जीत का नहीं, पूरी ज़िंदगी के अनुभव का परिणाम है।