Attitude Shayari on Fame
मैंने पहचान की फ़सल बोई नहीं थी, बस हर दिन मेहनत की, और लोग नाम याद रखने लगे।
मेरा ज़िक्र इसलिए नहीं होता कि मैं बोलता बहुत हूँ, मेरा ज़िक्र इसलिए होता है कि मेरा काम चुप नहीं रहता।
सफलता का सबसे सुंदर रूप वही है, जब लोग चेहरा नहीं, पहचान याद रखें।
मैं भीड़ का हिस्सा बन सकता था, मगर मैंने अपनी दिशा चुन ली।
मेरी कहानी में शोर कम है, इसीलिए असर ज़्यादा है।
पहचान उन लोगों को मिलती है, जो नज़रें मंज़िल पर रखते हैं, लोगों पर नहीं।
मैंने वक़्त को अपनी क़ीमत समझाई नहीं, बस उसे साबित होने का मौक़ा दिया।
कुछ लोग अवसर ढूँढते रहते हैं, कुछ लोग ऐसे बनते हैं कि अवसर उन्हें ढूँढे।
मुझे चर्चा में रहने का शौक़ नहीं, मगर मेरे काम को ख़ामोश रहना नहीं आता।
जो लोग आज नाम जानते हैं, उन्हें अंदाज़ा नहीं कि इसे बनाने में कितनी रातें लगी हैं।
मैंने पहचान की इमारत शब्दों से नहीं बनाई, हर मंज़िल पर एक उपलब्धि जोड़ी है।
मेरे बारे में राय बदल सकती है, मेरे काम की छाप नहीं।
मैं वहाँ तक पहुँचा हूँ जहाँ परिचय छोटा पड़ जाता है, और उपलब्धियाँ बोलना शुरू कर देती हैं।
मेरे लिए मशहूर होना उपलब्धि नहीं, क़ाबिल बने रहना उपलब्धि है।
मैंने मंज़िल का ऐलान नहीं किया, रास्तों ने ख़ुद मेरी तरफ़ इशारा कर दिया।
कुछ लोग नाम कमाते हैं, कुछ लोग नाम का मतलब बन जाते हैं।
मैंने अपने काम को इतना मज़बूत किया, कि पहचान को सहारे की ज़रूरत ही नहीं रही।
भीड़ में खड़े होकर अलग दिखना कठिन है, मैंने अलग बनकर दिखाया है।
मेरी मौजूदगी का असर इतना है, कि अनुपस्थिति भी नोटिस की जाती है।
जो लोग मुझे नज़रअंदाज़ करना चाहते थे, उन्हें पहले मेरा नाम याद रखना पड़ा।
मैंने ऊँचाई पाने से पहले नींव मज़बूत की, शायद इसलिए पहचान टिकाऊ बनी।
अक्सर वही लोग सबसे ज़्यादा पहचाने जाते हैं, जो पहचान पाने के लिए नहीं जीते।
मैंने अपनी क़ीमत ख़ुद तय की है, इसलिए लोगों की राय से फ़र्क़ कम पड़ता है।
मेरे सफ़र की सबसे बड़ी जीत यही है, कि मंज़िल से पहले पहचान बन गई।
मैंने अपनी जगह माँगी नहीं, इतना अच्छा किया कि जगह बन गई।
नाम कमाने का शॉर्टकट नहीं चुना, इसीलिए पहचान लंबी चली।
कुछ लोगों की आवाज़ दूर तक जाती है, कुछ लोगों का असर।
मैंने समय को अपना परिचय दिया था, आज समय मेरा परिचय देता है।
मेरी सफलता की सबसे बड़ी घोषणा यही है, कि मुझे बार-बार साबित नहीं करना पड़ता।
जो काम लोगों की ज़ुबान तक पहुँच जाए, वही पहचान की असली शुरुआत है।
ख़ामोश रहकर जो अपने हुनर को निखारते हैं, महफ़िलें अक्सर उन्हीं का ज़िक्र संभालते हैं।
भीड़ से अलग दिखने की कोशिश नहीं की कभी, बस अपने काम में सच्चा रहा, लोग पहचानते गए।
शोहरत मेरे दरवाज़े तक ख़ुद चलकर आई है, मैंने तो बरसों सिर्फ़ अपने सफ़र पर ध्यान रखा।
हर किसी को जवाब देना ज़रूरी नहीं समझा, मेरी पहचान ने कई सवालों के उत्तर दे दिए।
नाम ऊँचा करने की चाह से नहीं चला था मैं, बस गिरकर उठता रहा, और रास्ते याद रखते गए।
जो आज पहचान बन गई है, वह एक दिन आदत थी, जब कोई देख नहीं रहा था, तब भी मेहनत जारी थी।
मुझे मशहूर होने से ज़्यादा क़ीमतदार लगती है वह बात, कि मेरी गैरमौजूदगी में भी मेरा काम याद रखा जाए।
तारीफ़ों ने नहीं बनाया मुझे, लगातार बेहतर बनने की ज़िद ने पहचान लिखी है।
मेरे बारे में राय बनाने वालों की कमी नहीं, शायद इसलिए कि मेरी मौजूदगी नज़रअंदाज़ करना आसान नहीं।
मैंने लोगों को मनाने में वक़्त नहीं गंवाया, जो करना था ऐसा किया कि लोग ख़ुद जानने लगे।
पहचान का शोर आज सुनाई देता है, मगर इसकी बुनियाद उन दिनों में रखी गई थी, जब सन्नाटा था।
कुछ लोग आगे निकलने का ऐलान करते हैं, कुछ लोग इतना आगे निकल जाते हैं कि ऐलान की ज़रूरत नहीं रहती।