जिस दिन सच पता चला,
उस दिन रिश्ता नहीं टूटा था,
उस दिन बस यह भ्रम टूट गया था
कि तुम मेरे जैसे हो।
मैं तुम्हें भूल नहीं पाया,
क्योंकि मोहब्बत गहरी थी,
लेकिन भरोसा कभी वापस नहीं आया,
क्योंकि चोट भी वहीं लगी थी।
तुमने मेरा दिल नहीं दुखाया,
तुमने उस विश्वास को तोड़ा
जो मैंने दुनिया से बचाकर
सिर्फ़ तुम्हारे लिए रखा था।
कुछ लोग छोड़कर जाते हैं,
और कुछ लोग रहते हुए भी छोड़ देते हैं,
तुम दूसरी तरह के इंसान निकले।
तुम्हारी याद से नहीं,
तुम्हारी सच्चाई से डर लगता है,
क्योंकि जिसे अपना समझा,
वह सबसे अजनबी निकला।
मैंने तुम्हें कभी परखा नहीं,
यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी,
क्योंकि भरोसा आँखें बंद करता है,
और धोखा उसी अंधेरे में जन्म लेता है।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने मोहब्बत से दूरी नहीं बनाई,
बस लोगों को दिल तक आने में समय लगने लगा।
सब कुछ अचानक नहीं बदला था,
संकेत पहले भी थे,
मैं बस प्यार में था,
इसलिए सच को अनदेखा करता रहा।
तुम्हें खोने का दुख कुछ दिनों का था,
लेकिन खुद को वापस पाने में
बहुत समय लगा।
धोखा हमेशा शब्दों में नहीं मिलता,
कई बार किसी की बदलती प्राथमिकताएँ
सब कुछ बता देती हैं।
मैंने रिश्ता निभाने की कोशिश की,
तुमने रिश्ता चलाने की,
और दोनों में बहुत फ़र्क होता है।
तुम्हारे बाद समझ आया,
कि हर साथ देने वाला
सफ़र पूरा करने नहीं आता।
तुम्हारी बेवफ़ाई ने
मुझे कठोर नहीं बनाया,
बस थोड़ा सावधान कर दिया।
जिस इंसान को मैंने
अपनी सबसे बड़ी ताक़त समझा था,
वही मेरी सबसे बड़ी सीख बन गया।
तुमने कहा था,
"मुझ पर भरोसा करना",
काश तुमने यह भी बताया होता
कि कब तक।
अब जब पीछे मुड़कर देखता हूँ,
तो प्यार कम याद आता है,
और वह भरोसा ज़्यादा
जो मैंने तुम्हें दिया था।
कुछ रिश्ते टूटते नहीं,
धीरे-धीरे अंदर से खाली हो जाते हैं,
हमारा रिश्ता भी शायद ऐसा ही था।
तुम्हारे लिए मैं एक विकल्प था,
और मैं तुम्हें अपनी पूरी दुनिया समझ बैठा।
तुम्हारी बातों में कमी नहीं थी,
बस सच्चाई कम थी।
मैं आज भी लोगों से अच्छे से मिलता हूँ,
लेकिन अब किसी पर जल्दी यक़ीन नहीं करता।
सबसे गहरा दर्द जुदाई का नहीं था,
सबसे गहरा दर्द यह था
कि तुम वह इंसान नहीं निकले
जिसे मैं जानता था।
तुमने मेरा भरोसा तोड़ा,
और मैं आज तक
उसकी आवाज़ सुन सकता हूँ।
कुछ अलविदा शब्दों से होते हैं,
और कुछ व्यवहार से,
तुमने दूसरा रास्ता चुना था।
मैंने तुम्हें खोया नहीं,
मैंने एक भ्रम खोया,
और सच कहूँ,
वह नुकसान भी कम नहीं था।
तुम्हारी कमी से ज़्यादा
तुम्हारी सच्चाई की कमी महसूस हुई।
मैंने तुम्हें माफ़ कर दिया,
लेकिन उस दर्द को नहीं
जो तुम्हारे जाने के बाद रह गया।
धोखा देने वाले अक्सर आगे बढ़ जाते हैं,
पीछे रह जाता है वह इंसान
जो हर बात सच्चे दिल से करता था।
तुम्हारी याद अब आँसू नहीं लाती,
बस यह याद दिलाती है
कि वफ़ादारी हर किसी की आदत नहीं होती।
मैंने रिश्ते में अपना सब कुछ दिया,
और बदले में सीखा
कि हर रिश्ता बराबर नहीं निभाया जाता।
आज भी एक बात समझ नहीं आती,
जिसे खोने से डर लगता था,
उसे खोना इतना आसान कैसे था।
जिस इंसान पर सबसे ज़्यादा भरोसा किया था,
चोट भी वहीं से मिली,
अजनबी अगर दुख देते,
तो शायद इतना दर्द नहीं होता।
तुम्हारे जाने का दुख कम था,
तुम्हारे बदल जाने का दुख ज़्यादा था,
क्योंकि मैंने दूरी नहीं,
बेगानापन खोया था।
मोहब्बत हार जाने का अफ़सोस नहीं,
अफ़सोस इस बात का है,
कि जिसे अपना समझा,
उसे निभाना ज़रूरी नहीं लगा।
तुमने रिश्ता तोड़ा नहीं,
बस धीरे-धीरे उसकी अहमियत कम कर दी,
और कई बार यही ख़ामोशी
सबसे बड़ा धोखा बन जाती है।
मैं आज भी उस इंसान को याद करता हूँ,
जो तुम कभी हुआ करते थे,
क्योंकि जो आज हो,
उसे पहचानना मुश्किल है।
वफ़ादारी की सबसे बड़ी त्रासदी यह है,
कि वह अक्सर
गलत लोगों पर खर्च हो जाती है।
तुमने झूठ कम बोले,
सच छुपाए ज़्यादा,
और रिश्ते अक्सर
इन्हीं अधूरे सचों से टूटते हैं।
मुझे छोड़कर जाना तुम्हारा अधिकार था,
लेकिन भरोसा तोड़कर जाना
तुम्हारी पसंद थी।
कुछ वादे टूटने के बाद
आवाज़ नहीं करते,
बस इंसान का भरोसा
थोड़ा-थोड़ा मरने लगता है।
मैंने तुम्हें कभी कैद नहीं किया,
फिर भी तुमने आज़ादी ऐसे चुनी,
जैसे मैं कोई बंधन था।
सबसे कठिन बात यह नहीं थी
कि तुम किसी और के हो गए,
सबसे कठिन बात यह थी
कि तुम पहले मेरे भी नहीं थे।
तुम्हारी बेवफ़ाई ने
मोहब्बत से ज़्यादा
लोगों पर यक़ीन करना मुश्किल कर दिया।
रिश्ता खत्म होने का दुख एक बार होता है,
लेकिन टूटा हुआ भरोसा
बार-बार याद आता है।
तुमने कहा था,
"हमेशा साथ रहूँगा",
अब समझ आया,
कुछ लोग वादे निभाने के लिए नहीं,
उस वक़्त अच्छा लगने के लिए करते हैं।
मैंने तुम्हारी कमी से समझौता कर लिया,
लेकिन तुम्हारे झूठ की याद
आज भी परेशान करती है।
कभी-कभी सोचता हूँ,
अगर तुम सच बोल देते,
तो शायद दर्द कम होता,
धोखे से ज़्यादा
सच कभी नहीं चुभता।
तुम्हें खोने से ज़्यादा
खुद को खोने का दुख हुआ,
क्योंकि तुम्हें बचाते-बचाते
मैं अपनी ही क़ीमत भूल गया था।
जिस रिश्ते को मैं घर समझता रहा,
वह तुम्हारे लिए
शायद सिर्फ़ एक ठहराव था।
तुम्हारे बाद यह सीखा,
कि हर मुस्कुराता चेहरा
सच्ची नीयत नहीं रखता।
तुमने मेरा दिल नहीं तोड़ा,
तुमने मेरी उस आदत को तोड़ा
जो लोगों पर आसानी से भरोसा कर लेती थी।
कुछ लोग छोड़कर नहीं जाते,
बस बदल जाते हैं,
और वही बदलाव
सबसे गहरी दूरी बन जाता है।
तुम्हारे लिए शायद यह एक फैसला था,
मेरे लिए यह उन यादों का अंत था
जिन पर मैंने भविष्य बनाया था।
मैंने तुम्हें कभी गलत साबित करने की कोशिश नहीं की,
बस खुद को समझाता रहा
कि शायद तुम लौट आओ।
धोखा हमेशा किसी तीसरे इंसान से नहीं मिलता,
कई बार वही इंसान धोखा बन जाता है
जिसे हम अपनी दुनिया समझते हैं।
तुम्हारी सबसे बड़ी गलती
मुझे छोड़ना नहीं थी,
मेरी वफ़ादारी को हल्के में लेना थी।
अब शिकायत नहीं है,
बस हैरानी होती है,
कि जो इंसान मेरी ख़ामोशी पढ़ लेता था,
वह मेरे टूटने से अनजान कैसे रहा।
मैंने रिश्ता बचाने की कोशिश की,
तुमने वजहें ढूँढ़ीं दूर जाने की,
और यही फ़र्क
हमारी हार का कारण बना।
तुम्हारी याद आज भी आती है,
लेकिन अब उसमें प्यार कम,
एक अधूरा सवाल ज़्यादा होता है।
कुछ घाव समय भर देता है,
लेकिन कुछ घाव
इंसान को पहले जैसा नहीं रहने देते।
मैंने तुम्हें बददुआ नहीं दी,
क्योंकि मोहब्बत सच्ची थी,
बस अब दुआ में तुम्हारा नाम नहीं आता।