जिस दिन तुम्हारी असलियत समझ आई,
उस दिन गुस्सा कम आया,
अफ़सोस ज़्यादा हुआ कि
मैंने तुम्हें गलत नहीं, सही समझा था।
तुमने झूठ बोलकर मुझे नहीं हराया,
तुमने अपना सच छुपाकर
मेरे भरोसे को हरा दिया।
मैंने रिश्ते में सवाल कम किए,
क्योंकि यक़ीन ज़्यादा था,
और शायद यही मेरी सबसे बड़ी भूल थी।
कुछ लोग वादे तोड़ते हैं,
कुछ लोग उम्मीद,
तुमने दोनों को एक साथ तोड़ दिया।
तुम्हारी बातों में कमी नहीं थी,
बस उनमें वह सच्चाई नहीं थी
जिस पर एक रिश्ता खड़ा रह सके।
मैंने तुम्हें कभी शक की नज़र से नहीं देखा,
और तुमने उसी भरोसे को
सबसे आसान रास्ता समझ लिया।
तुम्हारे जाने से ज़्यादा
तुम्हारे अभिनय का अंत चुभा,
क्योंकि जिसे मैं सच समझता रहा,
वह एक किरदार निकला।
तुम्हारे बाद यह समझ आया,
कि हर "हमेशा" सच नहीं होता,
कुछ "हमेशा" सिर्फ़ उस पल तक होते हैं।
धोखा मिलने के बाद
इंसान लोगों से नहीं,
अपने फैसलों से सवाल करने लगता है।
तुमने रिश्ता खत्म नहीं किया,
तुमने उसके अर्थ बदल दिए,
अब वही यादें
पहले जैसी नहीं लगतीं।
मैंने तुम्हारे लिए दरवाज़े खुले रखे,
और तुमने चुपचाप दूसरी राह चुन ली।
सबसे कठिन बात यह थी
कि तुम्हारे झूठ पर यक़ीन करना बंद कर दूँ,
क्योंकि कभी उन्हीं बातों में मेरा सुकून था।
तुम्हारे पास बहाने बहुत थे,
मेरे पास भरोसा,
और अंत में भरोसा हार गया।
मैंने तुम्हें खोया नहीं,
मैंने उस इंसान की कल्पना खोई
जो असल में कभी था ही नहीं।
कुछ रिश्ते दूरी से नहीं टूटते,
वे तब टूटते हैं
जब सच्चाई की जगह दिखावा ले लेता है।
तुम्हारी कमी से ज़्यादा
मुझे अपने उस भोलेपन की कमी महसूस हुई
जो तुम पर आँख बंद करके भरोसा करता था।
धोखा देने वाले अक्सर
एक कहानी छोड़ जाते हैं,
और भरोसा करने वाले
उसकी व्याख्या करते रह जाते हैं।
तुमने सच छुपाया,
और मैंने उसे समझने में देर कर दी,
बस यही पूरी कहानी है।
अब जब कोई बहुत मीठी बातें करता है,
तो मैं मुस्कुरा देता हूँ,
क्योंकि मीठे शब्दों का स्वाद
पहले भी चख चुका हूँ।
तुम्हारे लिए शायद यह एक फैसला था,
मेरे लिए यह कई सपनों का अंत था।
मैंने रिश्ता निभाया,
तुमने परिस्थिति,
और अंत में दोनों की नीयत सामने आ गई।
तुम्हारी चुप्पी ने
वह सब बता दिया,
जो तुम्हारे शब्द कभी नहीं बता पाए।
कुछ लोग माफ़ हो जाते हैं,
लेकिन उनके किए हुए भ्रम
बहुत देर तक याद रहते हैं।
जिस दिन भरोसा टूटा,
उस दिन दर्द तो हुआ,
लेकिन उसी दिन मेरी आँखें भी खुल गईं।
तुम्हें खोने का दुख समय ले गया,
लेकिन तुम्हारे झूठ की सीख आज भी साथ है।
मैंने तुम्हारी हर बात पर यक़ीन किया,
और तुमने हर यक़ीन को
एक सुविधा की तरह इस्तेमाल किया।
तुम्हारे बाद मैंने सीखा,
कि हर मुस्कुराहट स्वागत नहीं होती,
कुछ मुस्कुराहटें छुपाने का तरीका भी होती हैं।
तुमने मुझे नफ़रत करना नहीं सिखाया,
बस लोगों को समझने में सावधानी सिखा दी।
अब अगर कोई साथ छोड़ जाए,
तो उतना दुख नहीं होता,
जितना किसी का सच छुपाना दुख देता है।
तुम्हारे झूठ ने मुझे तोड़ा नहीं,
उसने मुझे बदल दिया,
और यह बदलाव शायद हमेशा रहेगा।
सबसे बड़ा धोखा वह नहीं होता
जो सामने दिखाई दे,
सबसे बड़ा धोखा वह होता है
जो भरोसे का रूप लेकर आता है।
मैंने तुम्हारी बातों पर भरोसा किया था,
तुम्हारे इरादों पर नहीं,
शायद इसलिए सच सामने आने पर
सबसे ज़्यादा चोट विश्वास को लगी।
तुम्हारे झूठ की सबसे बड़ी ख़ूबी यह थी,
कि वह सच जैसे लगते थे,
और मेरी सबसे बड़ी कमी यह थी,
कि मैं तुम पर यक़ीन करता था।
धोखा देने वाले अक्सर
एक दिन में नहीं बदलते,
हम बस देर से समझ पाते हैं
कि वे पहले से वैसे ही थे।
तुमने मुझे छोड़ा नहीं,
पहले उम्मीदें दीं,
फिर उन्हीं उम्मीदों को अकेला छोड़ दिया।
मैंने रिश्ते को सच माना,
तुमने उसे सुविधा,
और यही फ़र्क
हम दोनों की नीयत बता गया।
सबसे दर्दनाक बात यह नहीं थी
कि तुम झूठ बोलते रहे,
दर्द इस बात का था
कि मैं हर बार तुम्हें सच मानता रहा।
कुछ लोग अलविदा नहीं कहते,
बस धीरे-धीरे अपने वादों से गायब हो जाते हैं।
तुम्हारे शब्द आज भी याद हैं,
बस अब उन पर भरोसा नहीं रहा।
जिस इंसान ने मुझे
सुरक्षित महसूस कराया था,
उसी ने मुझे लोगों से डरना सिखा दिया।
मैंने तुम्हें मौका दिया,
तुमने उसे आदत बना लिया।
तुम्हारी हर बात में अपनापन था,
जब तक मुझे पता नहीं चला
कि वही बातें तुम सबसे कहते हो।
धोखा हमेशा किसी और को चुनना नहीं होता,
कई बार किसी का भरोसा चुनकर
उसे तोड़ देना भी धोखा होता है।
मैं तुम्हें खोकर नहीं टूटा,
मैं उस यक़ीन को खोकर टूटा
जो तुम्हारे नाम से जुड़ा था।
कुछ सच्चाइयाँ देर से सामने आती हैं,
लेकिन जब आती हैं,
तो कई यादों का मतलब बदल देती हैं।
तुम्हें सच बोलने में एक पल लगता,
मुझे उस झूठ से निकलने में महीनों लग गए।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने एक बात सीखी,
हर अच्छा व्यवहार
अच्छी नीयत का प्रमाण नहीं होता।
जिस रिश्ते पर मुझे गर्व था,
वह तुम्हारे लिए
शायद सिर्फ़ एक विकल्प था।
मैंने तुम्हारी कमी से समझौता कर लिया,
लेकिन तुम्हारी असलियत को स्वीकार करने में
बहुत समय लगा।
तुम्हारे वादे टूटे,
और उनके साथ
मेरे कई मासूम यक़ीन भी टूट गए।
धोखा खाकर इंसान
कमज़ोर नहीं होता,
बस अगली बार
दिल देने से पहले सोचता है।
मैंने तुम्हें कभी कटघरे में खड़ा नहीं किया,
सच ने यह काम
खुद ही कर दिया।
तुम्हारी सबसे बड़ी चालाकी
झूठ बोलना नहीं थी,
सच्चा होने का अभिनय करना थी।
अब समझ आया,
कुछ लोग रिश्ते निभाने नहीं,
रिश्तों का सहारा लेने आते हैं।
तुम्हारे बदलने का दुख कम था,
तुम्हारे असली होने का दुख ज़्यादा था।
मैंने तुम्हें अपनी सच्चाई दी,
और बदले में
एक अधूरी कहानी लेकर लौट आया।
हर धोखा शोर नहीं करता,
कुछ धोखे तब समझ आते हैं
जब पीछे मुड़कर पूरी कहानी देखो।
तुमने मुझे इस्तेमाल किया या नहीं,
यह तो तुम जानो,
लेकिन मैंने तुम्हें सच्चा माना था,
यह मैं जानता हूँ।
अब किसी की बातों से प्रभावित नहीं होता,
क्योंकि एक बार शब्दों के पीछे छुपा झूठ देख चुका हूँ।
तुम्हारे बाद मैंने लोगों से नफ़रत नहीं की,
बस भरोसे की कीमत समझ ली।
सबसे बड़ी राहत यह नहीं कि तुम चले गए,
सबसे बड़ी राहत यह है
कि अब सच छुपा हुआ नहीं है।