तेरी ख़ामोशी से ज़्यादा
मुझे किसी बात ने परेशान नहीं किया,
क्योंकि नाराज़गी से डर नहीं लगता,
तुझसे दूर होने का एहसास डराता है।
मैं यह नहीं कहूँगा कि गलती सिर्फ़ मेरी थी,
या सिर्फ़ तेरी,
बस इतना जानता हूँ कि
हमारा रिश्ता उस बहस से कहीं ज़्यादा कीमती है।
तेरे नाराज़ होने का दुख इसलिए नहीं,
कि तू बात नहीं कर रही,
दुख इसलिए है कि
जिस चेहरे पर मुस्कान देखना अच्छा लगता है,
वहीं उदासी मेरी वजह से है।
कुछ रिश्ते जीतने के लिए नहीं होते,
संभालने के लिए होते हैं,
और तू उन रिश्तों में शामिल है
जिन्हें मैं बहस से नहीं, मोहब्बत से बचाना चाहता हूँ।
तेरी जगह आज भी वही है,
बस हमारी बातों के बीच थोड़ी दूरी आ गई है,
और सच कहूँ,
मुझे यह दूरी बिल्कुल अच्छी नहीं लगती।
मैं तुझे मनाने नहीं,
तुझे समझाने आया हूँ,
कि नाराज़गी चाहे जितनी बड़ी हो,
मेरी परवाह आज भी उतनी ही है।
तेरी ख़ुशी से कभी मुकाबला नहीं किया,
फिर तेरी नाराज़गी से कैसे करूँ,
बस चाहता हूँ कि
जो मुस्कान मुझे पसंद है, वह लौट आए।
कभी-कभी शब्द सही होते हैं,
लेकिन तरीका गलत हो जाता है,
शायद उस दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ,
मगर मेरा इरादा तुझे दुख देने का नहीं था।
तेरे बिना दिन गुजर तो जाता है,
मगर मन बार-बार उसी जगह लौटता है,
जहाँ हम बिना वजह हँस लिया करते थे।
मुझे तेरी आदत नहीं,
तेरी मौजूदगी की अहमियत है,
इसलिए तेरी नाराज़गी
सिर्फ़ एक झगड़ा नहीं लगती।
अगर आज तू चुप है,
तो मैं तेरी चुप्पी का सम्मान करूँगा,
मगर यह भी सच है
कि तेरी कमी हर पल महसूस होगी।
मैं तुझसे यह नहीं कहता
कि सब भूल जा,
बस इतना कहता हूँ,
कि हमें याद भी रख लेना।
नाराज़ होना तेरा हक़ है,
और इंतज़ार करना मेरा,
क्योंकि कुछ रिश्तों को
जल्दी नहीं, सच्चाई चाहिए होती है।
जो बातें हमें दूर कर रही हैं,
काश हम उन्हें बैठकर सुन लें,
क्योंकि कई बार गलतफ़हमियाँ
बात न करने से बड़ी हो जाती हैं।
तेरे साथ मेरी सबसे प्यारी यादें
किसी बड़े मौके की नहीं हैं,
वे छोटी-छोटी बातें हैं,
जिन्हें मैं आज भी मुस्कुराकर याद करता हूँ।
अगर मेरी किसी बात ने
तेरा दिल दुखाया है,
तो यक़ीन मान,
उस बात का बोझ मुझे भी हल्का नहीं लग रहा।
मुझे तुझसे बहस जीतने में
कभी दिलचस्पी नहीं थी,
मुझे तो हमेशा
तेरा साथ बचाए रखना था।
तेरी नाराज़गी में भी
मुझे अपना हक़ दिखाई देता है,
क्योंकि जो लोग मायने नहीं रखते,
उनसे कोई नाराज़ भी नहीं होता।
आज भी फ़ोन उठाते ही
सबसे पहले तेरी चैट ढूँढ़ता हूँ,
शायद उम्मीद अभी भी
हमारी बातों से जुड़ी हुई है।
मैं तुझे मनाने के लिए
बड़े वादे नहीं करूँगा,
बस इतना कहूँगा कि
तेरी अहमियत आज भी पहले जैसी है।
कुछ दूरियाँ कदमों से नहीं,
ख़ामोशियों से बनती हैं,
और मैं चाहता हूँ कि
हम दोनों मिलकर यह ख़ामोशी तोड़ दें।
तेरी नाराज़गी ने मुझे यह समझाया,
कि रिश्ता कितना कीमती है,
क्योंकि जो चीज़ दिल के करीब होती है,
उसकी कमी सबसे ज़्यादा महसूस होती है।
अगर तू अभी बात नहीं करना चाहती,
तो मैं समझ सकता हूँ,
मगर मेरी परवाह
तेरे जवाब की मोहताज नहीं है।
तेरे साथ बिताए पल
आज भी मेरे दिन का सबसे नरम हिस्सा हैं,
और मैं नहीं चाहता
कि एक गलत दिन उन्हें धुंधला कर दे।
मैंने हमेशा तुझे
सिर्फ़ प्यार नहीं किया,
तेरी इज़्ज़त भी की है,
और आज भी वही इज़्ज़त मुझे धैर्य रखना सिखा रही है।
कभी समय मिले,
तो हमारी आख़िरी बहस नहीं,
हमारी पहली मुस्कान याद कर लेना।
तेरे बिना सब कुछ ठीक होते हुए भी
कुछ अधूरा-सा लगता है,
शायद इसलिए कि
कुछ लोगों की मौजूदगी आदत नहीं, सुकून बन जाती है।
मैं यह साबित नहीं करना चाहता
कि मैं सही था,
मैं सिर्फ़ यह जताना चाहता हूँ
कि तू मेरे लिए ज़रूरी है।
हम दोनों ने शायद
कुछ ऐसी बातें कह दीं,
जो दिल में नहीं थीं,
मगर मैं चाहता हूँ कि
हम दिल की बातों को ज़्यादा महत्व दें।
तेरा गुस्सा कम हो या न हो,
मेरा अपनापन कम नहीं होगा,
क्योंकि सच्चे रिश्ते
मौसम देखकर नहीं बदलते।
मुझे तेरी हँसी याद आती है,
क्योंकि वही इस रिश्ते की सबसे प्यारी आवाज़ है।
अगर रिश्तों की मरम्मत होती है,
तो वह शब्दों से कम,
इरादों से ज़्यादा होती है,
और मेरा इरादा आज भी हमें साथ रखने का है।
तेरी नाराज़ आँखों से ज़्यादा
मुझे तेरी चुप्पी चुभती है,
क्योंकि उसमें वह दूरी होती है
जिसे मैं मिटाना चाहता हूँ।
तू अगर कुछ देर और नाराज़ रहना चाहे,
तो रह सकती है,
बस इतना जान ले,
मैं अब भी उसी जगह खड़ा हूँ जहाँ हम थे।
रिश्ते तब ख़ास नहीं होते
जब सब कुछ अच्छा चल रहा हो,
रिश्ते तब ख़ास साबित होते हैं
जब लोग नाराज़गी के बाद भी साथ चुनते हैं।
मैं तुझे मनाने के लिए
कविताएँ लिख सकता हूँ,
मगर सच यह है कि
मुझे तेरी मुस्कान किसी भी शायरी से ज़्यादा प्यारी है।
तेरे साथ की सबसे सुंदर बात यह थी,
कि हम हर बात कह लेते थे,
चलो एक बार फिर
उसी जगह लौटने की कोशिश करते हैं।
मुझे तेरी कमी तब नहीं खलती
जब मैं अकेला होता हूँ,
मुझे तेरी कमी तब खलती है
जब कुछ अच्छा होता है और बताने को तू नहीं होती।
नाराज़गी रिश्ते का अंत नहीं होती,
कई बार वह यह बताती है
कि दोनों के लिए रिश्ता अब भी मायने रखता है।
मैं तुझसे माफ़ी माँगने से ज़्यादा
तुझे समझना चाहता हूँ,
क्योंकि कई बार दिल को शब्द नहीं,
समझ की ज़रूरत होती है।
तेरे लिए मेरा प्यार
आज किसी बड़े इज़हार में नहीं,
इस धैर्य में दिखाई देगा
कि मैं तेरी भावनाओं का सम्मान करता हूँ।
अगर कभी तेरा मन माने,
तो फिर से वैसे ही बात करेंगे,
जैसे कुछ नहीं टूटा,
क्योंकि मेरे लिए आज भी
हम पहले से ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं।
मैं तुझसे यह नहीं कहूँगा
कि जल्दी मान जा,
बस इतना कहूँगा,
कि जब भी लौटना चाहे,
तुझे वही अपनापन मिलेगा।
कुछ रिश्तों में
"मुझे अफ़सोस है" से भी बड़ी बात होती है,
और वह है,
"मैं अब भी तुम्हें महत्व देता हूँ।"
तेरी नाराज़गी ने
मोहब्बत कम नहीं की,
बस यह एहसास और गहरा कर दिया
कि तू मेरे लिए कितनी ख़ास है।
मैं आज भी यही चाहता हूँ,
कि हमारी अगली बातचीत
बहस की नहीं,
मुस्कान की वजह बने।
अगर प्यार का कोई सच्चा रूप है,
तो शायद वह यही है,
कि नाराज़गी के बीच भी
दिल तुम्हारी ख़ुशी की ही दुआ करे।
चलो इस कहानी को
एक गलत पन्ने पर खत्म न होने दें,
क्योंकि हमारी सबसे सुंदर यादें
अभी लिखी जानी बाकी हैं।