माँ, तेरे सम्मान की वजह केवल यह नहीं,
कि तूने मुझे जन्म दिया,
बल्कि यह है कि तूने मुझे,
एक अच्छा इंसान बनना सिखाया।
तेरी बातों में हमेशा,
अनुभव की सच्चाई होती थी,
जो उस समय समझ नहीं आई,
पर जीवन ने बाद में समझा दी।
माँ, तेरा आदर करते हुए,
मैं अपने संस्कारों का भी सम्मान करता हूँ,
क्योंकि जो कुछ अच्छा मुझमें है,
उसकी शुरुआत तुझसे हुई है।
जब भी किसी कठिन परिस्थिति में,
सही रास्ता चुन पाता हूँ,
मुझे लगता है तेरी सीख,
आज भी मेरा हाथ थामे हुए है।
माँ, तूने कभी अपने योगदान का,
ढिंढोरा नहीं पीटा,
फिर भी मेरे जीवन की नींव में,
तेरी मेहनत साफ़ दिखाई देती है।
तेरा सम्मान इसलिए भी है,
कि तूने मुझे जीतना ही नहीं,
हार के बाद संभलना भी सिखाया,
जो जीवन का बड़ा सबक था।
माँ, तेरे शब्द कभी आदेश नहीं लगे,
वे हमेशा मार्गदर्शन जैसे लगे,
जिन्होंने मुझे भटकने से बचाया,
और सही दिशा दिखाई।
जब मैं अपने व्यवहार को देखता हूँ,
तो उसमें तेरी झलक मिलती है,
और यही बात मुझे,
तेरे प्रति और विनम्र बना देती है।
माँ, तूने मुझे लोगों की इज़्ज़त करना सिखाया,
और खुद सबसे बड़ा उदाहरण बनी,
तेरा जीवन ही वह किताब है,
जिससे मैंने बहुत कुछ सीखा।
तेरी सादगी में जो गरिमा है,
वह बहुत कम लोगों में होती है,
तूने बिना दिखावे के,
सम्मान कमाने का हुनर सिखाया।
माँ, तेरे लिए आदर इसलिए भी है,
कि तूने हर परिस्थिति में,
अपने परिवार को पहले रखा,
और कभी इसका श्रेय नहीं लिया।
जब भी मैं किसी की मदद करता हूँ,
मुझे तेरी याद आती है,
क्योंकि दूसरों का दर्द समझना,
मैंने तुझसे ही सीखा है।
माँ, तेरी परवरिश का असर,
मेरे हर निर्णय में दिखाई देता है,
चाहे मैं कहीं भी रहूँ,
तेरी सीख मेरे साथ रहती है।
तेरे सम्मान में झुकना,
मेरे लिए परंपरा नहीं,
यह उस जीवन के प्रति कृतज्ञता है,
जो तूने मेरे लिए सँवारा।
माँ, तूने मुझे कभी ऊँचा बनने से पहले,
अच्छा बनने की सीख दी,
और यही सीख आज भी,
सबसे कीमती लगती है।
तेरी खामोश मेहनत को,
शब्दों में बाँधना मुश्किल है,
क्योंकि कुछ योगदान इतने बड़े होते हैं,
कि उन्हें केवल महसूस किया जा सकता है।
माँ, तेरे धैर्य ने सिखाया,
कि हर समस्या का समाधान शोर में नहीं,
कई बार शांत रहकर भी,
जीवन जीता जा सकता है।
जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ,
तो समझ आता है,
मेरे हर अच्छे कदम के पीछे,
तेरा विश्वास खड़ा था।
माँ, तेरे सम्मान की सबसे बड़ी वजह,
तेरा निस्वार्थ स्वभाव है,
जो बिना किसी अपेक्षा के,
सिर्फ़ प्रेम देना जानता है।
तेरी हर छोटी सीख,
आज बड़ी लगती है,
क्योंकि समय ने साबित किया,
कि तू जो कहती थी, सही कहती थी।
माँ, तेरी मौजूदगी ने मुझे,
सुरक्षित महसूस करना सिखाया,
और तेरी शिक्षा ने,
आत्मविश्वास से जीना सिखाया।
तेरा आदर केवल शब्दों में नहीं,
मेरे व्यवहार में भी है,
क्योंकि तेरे संस्कार ही,
मेरी सबसे बड़ी पहचान हैं।
माँ, जब भी लोग कहते हैं,
कि मैं अच्छा सोचता हूँ,
मैं मुस्कुरा देता हूँ,
क्योंकि यह तेरी परवरिश की तारीफ़ होती है।
तेरे सम्मान में सबसे सुंदर बात यह है,
कि वह समय के साथ बढ़ता जाता है,
जितना जीवन समझ में आता है,
उतना तेरा महत्व बढ़ता जाता है।
माँ, तुझे सम्मान देना,
मेरे लिए कोई कर्तव्य नहीं,
यह तो दिल से निकला हुआ वह भाव है,
जो हर दिन और गहरा होता जाता है।
माँ, तेरा सम्मान इसलिए नहीं करता,
कि यह मुझे सिखाया गया है,
बल्कि इसलिए कि मैंने देखा है,
तूने मेरे लिए कितना जिया है।
मेरे व्यक्तित्व की हर अच्छी बात में,
कहीं न कहीं तेरा योगदान है,
इसलिए तेरा आदर करना,
मेरे लिए गर्व की बात है।
माँ, तूने मुझे सिर्फ़ बड़ा नहीं किया,
जीवन जीने का तरीका भी दिया,
तेरे संस्कार आज भी,
हर मोड़ पर मेरा मार्गदर्शन करते हैं।
जब मैं अपनी उपलब्धियाँ देखता हूँ,
तो तेरा चेहरा याद आता है,
क्योंकि मेरी सफलता में,
तेरे विश्वास का भी हिस्सा है।
माँ, तेरी सादगी ने सिखाया,
कि महानता शोर में नहीं होती,
कुछ लोग चुप रहकर भी,
बहुत बड़ा प्रभाव छोड़ जाते हैं।
तेरे सामने सिर झुकाना,
मेरे लिए औपचारिकता नहीं,
यह उस प्रेम और धैर्य के प्रति,
मेरा आभार है।
माँ, तूने कभी खुद को महत्वपूर्ण नहीं बताया,
पर समय ने मुझे यह समझा दिया,
कि मेरे जीवन की सबसे बड़ी सीखें,
मुझे तुझसे ही मिली हैं।
जब भी सही और गलत के बीच,
कोई निर्णय लेना होता है,
तेरी बातें याद आती हैं,
और रास्ता साफ़ हो जाता है।
माँ, तेरे सम्मान का कारण,
सिर्फ़ तेरा प्रेम नहीं,
बल्कि वह चरित्र है,
जो तूने हर परिस्थिति में दिखाया।
तेरी हर सलाह उस समय,
साधारण लगती थी,
आज समझ आता है,
वह अनुभव का ख़ज़ाना थी।
माँ, तेरा आदर इसलिए भी है,
कि तूने कभी हार नहीं मानी,
चाहे हालात जैसे भी रहे,
तू हमेशा मज़बूत बनी रही।
मैंने जीवन में कई लोगों से सीखा,
पर सबसे गहरी सीख,
तेरे व्यवहार से मिली,
जिसने मुझे इंसान बनना सिखाया।
माँ, तेरी परवाह ने सिखाया,
कि प्रेम सिर्फ़ शब्द नहीं होता,
किसी की चिंता करना भी,
सम्मान का एक रूप होता है।
तेरा धैर्य देखकर अक्सर,
मैं खुद को छोटा महसूस करता हूँ,
क्योंकि जहाँ मैं घबरा जाता हूँ,
वहाँ तू शांत रहना जानती है।
माँ, तेरे सम्मान में कहे गए शब्द,
हमेशा कम पड़ जाते हैं,
क्योंकि तेरे योगदान को,
कुछ पंक्तियों में नहीं बाँधा जा सकता।
जब मैं दूसरों की मदद करता हूँ,
तो लगता है जैसे,
तेरी ही कोई सीख,
मेरे भीतर जीवित है।
माँ, तूने कभी ऊँची बातें नहीं कीं,
पर तेरा जीवन ही एक सीख था,
जिसे देखकर समझ आया,
कि अच्छे इंसान कैसे बनते हैं।
तेरा सम्मान इसलिए भी है,
कि तूने मुझे केवल सपने नहीं दिए,
उन्हें पूरा करने का साहस भी दिया।
माँ, तेरी विनम्रता ने सिखाया,
कि ऊँचा बनने से पहले,
अच्छा बनना ज़रूरी होता है,
और यही सबसे बड़ी सफलता है।
मैं जब भी अपने संस्कारों पर गर्व करता हूँ,
तो सबसे पहले तुझे याद करता हूँ,
क्योंकि वे मेरे नहीं,
तेरी परवरिश की पहचान हैं।
माँ, तेरी हर बात से सहमत होना ज़रूरी नहीं,
पर तेरे इरादों पर भरोसा हमेशा रहा,
क्योंकि उनमें केवल मेरा भला छिपा होता था।
तेरे सम्मान में सबसे सुंदर बात यह है,
कि वह समय के साथ बढ़ता गया,
जितना जीवन को समझा,
उतना तुझे समझ पाया।
माँ, तेरी मौजूदगी ने सिखाया,
कि परिवार केवल साथ रहने का नाम नहीं,
बल्कि एक-दूसरे के लिए खड़े रहने का नाम है।
जब लोग मेरी तारीफ़ करते हैं,
तो मैं भीतर ही भीतर तेरा धन्यवाद करता हूँ,
क्योंकि मेरी अच्छाइयों की जड़,
तेरे संस्कारों में है।
माँ, तेरे प्रति मेरा सम्मान,
सिर्फ़ एक भावना नहीं,
यह उस जीवनभर के प्रभाव की स्वीकृति है,
जो तूने मेरे व्यक्तित्व पर छोड़ा है।