Shayari to thank your partner for being there
भीड़ से भरे इस रास्ते में जहाँ सब अपनी धुन में थे, तुमने रुक कर मेरा हाथ थामने में एक पल भी नहीं गँवाया।
जब भी मैं अपनी ही बनाई उलझनों में घिर जाता हूँ, तुम्हारी ज़रा सी हँसी मेरे सारे तनाव को पिघला देती है।
तुमने कभी मेरे बीते हुए कल का हिसाब नहीं माँगा, बस आने वाले हर पल को अपनी वफ़ा से ख़ूबसूरत बना दिया।
सच्चा रिश्ता वो नहीं जो सिर्फ़ जीत का जश्न मनाए, तुमने तो मेरी हर हार को भी बड़े लाड़ से सँभाला है।
तुम्हारे साथ बिताए हुए वो आम से, शांत लम्हे, ज़िंदगी की सबसे महँगी ख़्वाहिशों से ज़्यादा सुकून देते हैं।
जब पूरी दुनिया मेरे फ़ैसलों पर शक कर रही थी, तुम्हारी आँखों में मेरे लिए वही पुराना अटूट यक़ीन था।
तुम्हारी सबसे बड़ी ताक़त यही है कि तुम शिकायत नहीं करतीं, बस खामोशी से हर मुश्किल वक़्त को आधा बाँट लेती हो।
कभी-कभी सोचता हूँ कि अगर तुम इस सफ़र में न होतीं, तो शायद मैं आज इतना सुलझा हुआ इंसान न बन पाता।
दिखावे की इस दौड़ में जहाँ हर कोई मुखौटा पहने है, तुम्हारी सादगी ही मेरे दिल के लिए सबसे बड़ा आराम है।
मेरी हर छोटी-बड़ी कोशिश को जो तुम इतना मान देती हो, वही एहसास मुझे रोज़ थोड़ा बेहतर बनने का हौसला देता है।
जब कोई मेरी खामोशी की वजह तक नहीं समझना चाहता था, तुमने तब मेरी आँखों में छिपी उदासी को चुपके से पढ़ लिया।
ज़िंदगी के थपेड़ों ने जब भी मुझे थोड़ा कमज़ोर किया, तुम्हारी तसल्ली भरी बातों ने मुझे फिर से सँभाल लिया।
तुमने कभी ऊँचे ख्वाबों की ज़िद में मुझे मजबूर नहीं किया, जो मेरे पास था, तुमने उसी में अपनी खुशियों को ढूँढ लिया।
अक्सर दुनिया की भीड़ में मैं अकेला महसूस करता था, पर जब से तुम आए हो, तन्हाई का वह ख़ौफ़ मिट गया है।
तुम्हारी सबसे बड़ी ख़ूबी यही है कि तुम मुझे परखते नहीं, जैसे मैं हूँ, वैसे ही पूरे मान के साथ अपना लेते हो।
बुरे वक़्त में जब अपने भी रास्ता बदलने लगे थे, तुम चट्टान की तरह मेरे सम्मान के आगे खड़ी रहीं।
तुम्हारी वफ़ा ने मुझे कभी बँधा हुआ महसूस नहीं होने दिया, एक आज़ाद परिंदे को जैसे उड़ने के लिए खुला आसमान मिल गया।
यह जो हमारे बीच का मौन है, यह भी कितना गहरा है, बिना शब्दों के भी हम एक-दूजे के जज़्बात समझ लेते हैं।
मैंने कभी किसी फ़रिश्ते को तो नहीं देखा इस ज़मीन पर, पर तुम्हारी निश्छल ममता और फिक्र में रब की झलक ज़रूर देखी है।
मेरी हर कामयाबी के पीछे जो एक खामोश दुआ काम करती है, वह कोई और नहीं, सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी पाकीज़ा मोहब्बत है।
तुम्हारी सादगी ने मुझे ज़िंदगी जीना सिखाया है, वरना इस दिखावे की दुनिया में हम तो कब के खो गए होते।
जब सारा जहाँ मेरी नाकामियों का हिसाब रख रहा था, तुमने तब भी मेरी मेहनत पर पूरा भरोसा जताया।
कोई शिकायत नहीं की तुमने कभी हमारे कम साधनों से, हर हाल में खुश रहकर तुमने इस घर को मंदिर बनाया।
जब भी मैं किसी उलझन में खुद से ही हारने लगता हूँ, तुम्हारा बस हाथ पकड़ लेना ही मुझे दोबारा खड़ा कर देता है।
दुआओं में माँगने के लिए अब कुछ बचा ही नहीं मेरे पास, तुम्हें पाकर जैसे मेरी बंदगी मुकम्मल हो गई है।
रिश्ते तो बहुत बनते हैं नाम और पहचान के सहारे, पर तुमने सिर्फ मेरी रूह से नाता जोड़ा है।
तुम्हारी डाँट में भी जो एक अजीब सी फ़िक्र छुपी होती है, वही फ़िक्र मुझे इस बेपरवाह दुनिया में महफ़ूज़ रखती है।
सफ़र चाहे कितना भी थका देने वाला क्यों न हो, शाम को तुम्हारा मुस्कुराता हुआ चेहरा सब भुला देता है।
तुमने कभी जताकर मुझ पर कोई अहसान नहीं किया, बस साये की तरह साथ रहकर मेरी हर मुश्किल आसान की।
यह जो आज मैं बिना किसी डर के मुस्कुरा पा रहा हूँ, यह सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी दी हुई हिम्मत का नतीजा है।
तुमने हर मोड़ पर मेरा हाथ थाम कर रखा है, जब दुनिया ने साथ छोड़ दिया, तब तुम्हारा ही आसरा था।
जब भी टूटने लगा मेरा हौसला इस ज़िंदगी की धूप में, तुम्हारी ख़ामोश मौजूदगी ने मुझे एक ठंडा साया दिया।
मुझे किसी बड़े वादे या तोहफ़े की चाहत कभी नहीं रही, बस बुरा वक़्त आने पर तुम्हारा मुस्कुरा देना ही काफ़ी है।
चुप रहकर भी जो तुम मेरे दिल की हर बात सुन लेते हो, सच्ची मोहब्बत का इससे ख़ूबसूरत सबूत और क्या होगा।
थक कर जब भी लौटता हूँ मैं दुनिया के बवालों से, तुम्हारी सादगी भरी बातें मुझे फिर से ज़िंदा कर देती हैं।
तुमने कभी मेरे हालात पर कोई सवाल नहीं उठाया, बस चुपके से मेरे साथ चलने का फ़ैसला कर लिया।
मेरी कमियों को जानते हुए भी तुमने मुझे अपनाया है, इस बेमुरव्वत दौर में ऐसा सुकून सिर्फ़ तुम्हारे पास पाया है।
ज़िंदगी की उलझनों में जब भी मैं ख़ुद को भूल जाता हूँ, तुम्हारी आँखों में देखकर मुझे मेरा वजूद वापस मिल जाता है।
कोई शोर नहीं, कोई दिखावा नहीं तुम्हारी चाहत में, इक ठहराव है, इक सुकून है जो मुझे सँभाले रखता है।
जब सब अपनी सहूलियत के हिसाब से रिश्ते निभा रहे थे, तब तुम बिना किसी शर्त के मेरे हर दर्द में साझीदार थे।
तुम्हारी मौजूदगी ने मुझे एक अजीब सा हौसला दिया है, अब रास्ते चाहे जैसे भी हों, डरना मैंने छोड़ दिया है।
कितनी आसानी से तुम मेरी हर परेशानी को आधा कर देते हो, बिना कुछ कहे, बस पास बैठकर मेरा बोझ घटा देते हो।
यह जो दिल में एक तसल्ली सी रहती है हर लम्हा, यह तुम्हारी वफ़ा और बेपनाह सब्र का ही असर है।
ग़लतियाँ मेरी होती हैं और सँभाल तुम लेते हो, नाराज़गी के बीच भी तुम कितना ख़याल रखते हो।
सच्चा हमसफ़र वो नहीं जो सिर्फ़ ख़ास दिनों में साथ हो, तुम तो वो हो जिसने आम से दिनों को भी मुकम्मल बनाया है।
तुम्हारी आँखों में जो मेरे लिए इज़्ज़त और भरोसा है, वही इस दुनिया में मेरी सबसे बड़ी जागीर है।
वक्त बदला, लोग बदले और बदले जीने के तरीक़े, अगर कुछ नहीं बदला, तो वो है तुम्हारा मेरे प्रति झुकाव।
तुमने मुझे कभी बदलने की ज़िद नहीं की, जैसी भी हूँ, मुझे वैसे ही क़बूल कर के मान दिया।
ज़िंदगी के इस सफ़र में बहुत से चेहरे मिले, पर दिल को जहाँ ठहरना था, वो सिरा सिर्फ़ तुम हो।
शुक्रिया कहना बहुत छोटा लफ़्ज़ लगता है तुम्हारी मोहब्बत के आगे, तुमने तो अपनी मौजूदगी से मेरी पूरी ज़िंदगी को सँवार दिया है।