कुछ लोग दोस्ती का लिबास पहनकर आए,
मगर दिल में अपनापन कभी था ही नहीं।
हमने जिन्हें भरोसे की जगह दी,
उन्होंने हमें तजुर्बे की वजह बना दिया।
झूठी दोस्ती का सच अक्सर देर से सामने आता है,
मगर तब तक इंसान बहुत कुछ सीख चुका होता है।
कुछ लोग साथ इसलिए थे,
क्योंकि उन्हें साथ से ज़्यादा फायदा चाहिए था।
दोस्ती का दर्द तब गहरा लगता है,
जब धोखा किसी अजनबी से नहीं, अपने से मिले।
हमने हर रिश्ते को सच्चाई से निभाया,
कुछ लोगों ने उसे हमारी कमज़ोरी समझ लिया।
जो लोग हर वक़्त साथ होने की बात करते थे,
वही मुश्किल दिनों में सबसे दूर मिले।
कुछ चेहरे मुस्कुराहटों से भरे थे,
मगर नीयत में सच्चाई कम थी।
झूठे दोस्तों की सबसे बड़ी पहचान,
वे आपकी मौजूदगी नहीं, आपकी ज़रूरत तलाशते हैं।
हमने लोगों को बदलते नहीं देखा,
बस उनके मतलब बदलते देखे हैं।
कुछ रिश्ते टूटने का दुख नहीं देते,
उनकी सच्चाई जानने का दुख देते हैं।
जो दोस्त सिर्फ़ भीड़ में साथ दिखे,
वह तन्हाई में कभी अपना नहीं होता।
हमने हर किसी को दिल से जगह दी,
मगर हर कोई उस जगह के लायक नहीं था।
झूठी दोस्ती ने इतना तो सिखा दिया,
कि भरोसा अब सोच-समझकर किया जाता है।
कुछ लोग आपके सामने आपकी तारीफ़ करते हैं,
और पीठ पीछे आपकी अहमियत कम करते हैं।
दोस्ती का नाम लेना आसान है,
मगर उसमें वफ़ा रखना हर किसी के बस की बात नहीं।
हमने शिकायत करना छोड़ दिया,
क्योंकि लोगों की फ़ितरत बदलना हमारे बस में नहीं।
कुछ दोस्त सिर्फ़ तस्वीरों में अच्छे लगते हैं,
ज़िंदगी में नहीं।
जब मतलब पूरे हो गए,
तो कई रिश्तों की गर्मजोशी भी चली गई।
झूठे दोस्तों से मिली दूरी ने,
सच्चे लोगों की पहचान आसान कर दी।
कुछ लोग आपका साथ नहीं चाहते,
बस आपकी मौजूदगी का इस्तेमाल करना चाहते हैं।
हमने किसी से नफ़रत नहीं की,
बस अपनी उम्मीदें वापस ले लीं।
जो रिश्ता हर बार आपको ही समझौता करने पर मजबूर करे,
वह दोस्ती कम, बोझ ज़्यादा होता है।
कुछ लोग दोस्त बनकर आए,
और हमें अपनी क़ीमत समझाकर चले गए।
अब हर मुस्कुराते चेहरे पर यक़ीन नहीं होता,
क्योंकि तजुर्बे ने पहचानना सिखा दिया है।
कुछ लोग दोस्ती की बातें बहुत करते हैं,
मगर निभाने की बारी आए तो ख़ामोश हो जाते हैं।
जिन्हें अपना समझकर दिल की बात बताई,
वही लोग किस्से बनाकर सुनाने लगे।
दोस्ती का दर्द दुश्मनी से नहीं मिलता,
वह अपनों के बदल जाने से मिलता है।
कुछ चेहरे इतने क़रीब थे,
कि उनकी असलियत सबसे देर से समझ आई।
हमने रिश्ते बचाने की कोशिश की,
उन्होंने बहाने बचाने की।
झूठे दोस्तों की सबसे बड़ी पहचान,
वे आपकी ख़ुशी में कम और काम में ज़्यादा याद करते हैं।
कुछ लोग साथ चलकर भी अपने नहीं होते,
और कुछ दूर रहकर भी दोस्त बने रहते हैं।
भरोसा एक बार टूट जाए,
तो माफ़ी भी उसे पहले जैसा नहीं बना सकती।
हमने दिल से रिश्ते निभाए,
कुछ लोगों ने दिमाग़ से हिसाब लगाए।
जो दोस्त हर बात में हाँ कहे,
ज़रूरी नहीं वह आपका भला भी चाहता हो।
कुछ रिश्तों की हक़ीक़त तब समझ आती है,
जब आपको उनकी ज़रूरत पड़ती है।
झूठी दोस्ती का बोझ उठाने से बेहतर है,
कम रिश्ते रखना मगर सच्चे रखना।
वक़्त ने चेहरों से नक़ाब हटा दिए,
और हम लोगों को पहचानना सीख गए।
कुछ लोग सिर्फ़ आपकी कहानी जानना चाहते हैं,
आपका दर्द समझना नहीं।
हमने जिन्हें अपना वक़्त दिया,
उन्होंने हमें अपनी प्राथमिकता भी न समझा।
झूठे दोस्तों से शिकायत नहीं रही,
उन्होंने हमें ख़ुद की क़द्र करना सिखा दिया।
जो रिश्ता सिर्फ़ सुविधा पर टिका हो,
वह मुश्किलों में अक्सर टूट जाता है।
कुछ लोग आपकी मौजूदगी के आदी होते हैं,
आपकी अहमियत के नहीं।
दोस्ती की आड़ में हर रिश्ता सच्चा नहीं होता,
कुछ लोग सिर्फ़ क़रीब आने का हुनर जानते हैं।
जब उम्मीदें कम कर दीं,
तो लोगों की असलियत साफ़ दिखाई देने लगी।
हमने किसी से बदला नहीं लिया,
बस दूरी बनाकर सुकून चुन लिया।
कुछ दोस्त वक़्त के साथ नहीं बदले,
बस उनका असली चेहरा सामने आ गया।
दिल तोड़ा उन्होंने,
मगर हमें मज़बूत भी वही बना गए।
जो लोग हर बात में साथ होने का दावा करते थे,
वे सबसे पहले रास्ता बदल गए।
अब रिश्ते कम हैं,
मगर जो हैं, उनमें दिखावा नहीं है।
जो लोग हर बात में अपने लगते थे,
वही ज़रूरत ख़त्म होते ही बदल गए।
दोस्ती का दुख जुदाई नहीं देती,
कभी-कभी दिखावे की नज़दीकियाँ देती हैं।
कुछ चेहरों ने साथ का दावा बहुत किया,
मगर वक़्त आने पर पहचान भी न सके।
हमने हर रिश्ते को दिल से निभाया,
कुछ लोगों ने उसे मौक़ा समझ लिया।
झूठी दोस्ती की सबसे बड़ी पहचान,
वह आपकी मौजूदगी नहीं, फ़ायदा तलाशती है।
कुछ लोग दोस्त बनकर आए,
और हमें लोगों को पहचानना सिखा गए।
भरोसा टूटने की आवाज़ नहीं होती,
मगर उसकी गूँज बहुत दूर तक जाती है।
हर मुस्कुराने वाला दोस्त नहीं होता,
कुछ लोग सिर्फ़ माहौल का हिस्सा होते हैं।
जब सच सामने आया,
तो दुख धोखे का नहीं, भरोसे का था।
कुछ रिश्ते इसलिए टूट जाते हैं,
क्योंकि उनमें सच्चाई कम और दिखावा ज़्यादा होता है।
हमने जिन्हें अपना समझा,
उन्होंने हमें विकल्प समझा।
झूठे दोस्तों की भी एक ख़ासियत होती है,
वे हमेशा अच्छे दिनों में नज़र आते हैं।
कभी-कभी दूरी बनाना नाराज़गी नहीं,
ख़ुद की इज़्ज़त बचाना होता है।
वक़्त ने यह सिखाया,
हर साथ देने वाला हमसफ़र नहीं होता।
कुछ लोग आपकी बातों में साथ देते हैं,
मगर हालात में नहीं।
दोस्ती का नाम लेना आसान है,
उसका मतलब निभाना मुश्किल।
जो रिश्ता मतलब से शुरू हो,
वह अक्सर मतलब पर ही ख़त्म होता है।
हमने लोगों को खोया नहीं,
बस उनकी असलियत देख ली।
झूठे दोस्तों से मिली चोट ने,
सच्चे लोगों की क़द्र सिखा दी।
कुछ लोग सिर्फ़ भीड़ बढ़ाते हैं,
दोस्त बहुत कम लोग बन पाते हैं।
दिल दुखा उन लोगों ने,
जिनसे कभी दुख की उम्मीद नहीं थी।
अब हर किसी को अपना नहीं कहते,
तजुर्बों ने हमें थोड़ा समझदार बना दिया।
जो दोस्त हर बात में आपके साथ हो,
ज़रूरी नहीं हर हाल में भी साथ हो।
कुछ रिश्ते टूटकर भी सबक़ दे जाते हैं,
और वही सबक़ सबसे कीमती होता है।
झूठी दोस्ती से मिली तन्हाई बेहतर है,
क्योंकि उसमें कम से कम धोखा नहीं होता।