Matlabi Dost Shayari
कुछ लोग दोस्ती का एहसास नहीं, उसका फ़ायदा समझते हैं।
जब तक ज़रूरत रही, तब तक रिश्तों में गर्माहट भी रही।
हमने उन्हें अपना वक़्त दिया, उन्होंने हमें सिर्फ़ काम के वक़्त याद किया।
मतलबी दोस्ती का सच यही है, वह साथ कम और उम्मीदें ज़्यादा रखती है।
कुछ लोग आपकी क़द्र नहीं करते, बस आपकी उपलब्धता के आदी हो जाते हैं।
हमने दोस्त समझकर हर बात साझा की, उन्होंने मौक़ा समझकर हर बात इस्तेमाल की।
मतलबी रिश्ते अक्सर मीठे लगते हैं, क्योंकि उनमें सच्चाई कम और ज़रूरत ज़्यादा होती है।
जो दोस्त आपकी परेशानी में ग़ायब हो जाए, वह आपकी ख़ुशी का भी हक़दार नहीं होता।
हमने साथ निभाने की सोची, उन्होंने सिर्फ़ अपना मतलब निभाया।
कुछ लोग दोस्ती की बातें खूब करते हैं, मगर निभाने के नाम पर पीछे हट जाते हैं।
मतलब का रिश्ता देर तक नहीं चलता, क्योंकि उसमें भरोसा टिक नहीं पाता।
जब हमें सहारे की ज़रूरत थी, तब कई दोस्त व्यस्त निकले।
कुछ लोग आपकी सफलता के साथ होते हैं, आपके संघर्ष के साथ नहीं।
हमने रिश्तों में दिल लगाया, उन्होंने हर रिश्ते में हिसाब लगाया।
मतलबी दोस्त आपकी अच्छाई नहीं देखते, बस उससे मिलने वाला लाभ देखते हैं।
जो लोग सिर्फ़ अपने काम से याद करें, वे दोस्त नहीं, परिचित होते हैं।
हमने कई लोगों को अपना समझा, मगर तजुर्बे ने फ़र्क़ समझा दिया।
मतलब की दोस्ती में वफ़ा नहीं होती, सिर्फ़ मौक़े बदलते रहते हैं।
कुछ दोस्त आपकी मौजूदगी चाहते हैं, मगर आपकी भावनाओं की परवाह नहीं करते।
हमने हर बार रिश्ता बचाया, उन्होंने हर बार अपना स्वार्थ बचाया।
मतलबी लोगों से मिली दूरी ने, दिल को थोड़ा समझदार बना दिया।
जो दोस्त हर बार लेते ही रहें, और कभी साथ न दें, वे अपने नहीं होते।
हमने जिन पर सबसे ज़्यादा भरोसा किया, कई बार वही सबसे कम अपने निकले।
मतलब के रिश्तों का अंत तय होता है, सच्चे रिश्तों का नहीं।
अब रिश्तों में भीड़ नहीं चाहिए, बस कुछ ऐसे लोग चाहिए जो बिना मतलब के साथ रहें।
कुछ लोग दोस्ती का हाथ इसलिए बढ़ाते हैं, ताकि ज़रूरत पड़ने पर सहारा नहीं, फ़ायदा ले सकें।
मतलबी रिश्तों की सबसे बड़ी कमी, उनमें अपनापन सिर्फ़ हालात तक रहता है।
जब तक उन्हें ज़रूरत थी, हम उनके सबसे क़रीब थे।
हमने दोस्ती में भरोसा रखा, उन्होंने हर बात में अपना मतलब ढूँढ़ा।
कुछ लोग साथ चलने का वादा करते हैं, मगर मंज़िल तक सिर्फ़ अपना रास्ता देखते हैं।
मतलबी दोस्त कभी रिश्ता नहीं निभाते, वे बस मौक़े निभाते हैं।
जो लोग हर बार अपने काम से याद करें, उनकी दोस्ती पर ज़्यादा यक़ीन नहीं होता।
हमने रिश्तों को दिल से देखा, उन्होंने उन्हें फ़ायदे से तौला।
कुछ दोस्त हाल नहीं पूछते, सीधे ज़रूरत की बात करते हैं।
मतलबी लोगों की महफ़िल में, सच्चाई अक्सर अकेली रह जाती है।
जब हमारा वक़्त अच्छा था, तो उनके लफ़्ज़ भी बहुत अपने थे।
कुछ रिश्तों की उम्र, सिर्फ़ स्वार्थ पूरा होने तक होती है।
हमने हर बार मदद की, मगर उन्हें कभी हमारी फ़िक्र नहीं हुई।
मतलबी दोस्ती में मुस्कान होती है, मगर दिल से निकला अपनापन नहीं।
जो रिश्ता सिर्फ़ एक तरफ़ से निभाया जाए, वह दोस्ती नहीं, आदत बन जाता है।
कुछ लोग आपकी अच्छाई का सम्मान नहीं करते, बस उसका इस्तेमाल करना जानते हैं।
हमने जिन्हें अपना समझा, उन्होंने हमें अपनी सुविधा समझा।
मतलब की दोस्ती का सच यही है, वह मुश्किल दिनों में नज़र नहीं आती।
कुछ लोग तब तक साथ रहते हैं, जब तक उन्हें कोई बेहतर सहारा न मिल जाए।
हमने शिकायत करना छोड़ दिया, क्योंकि स्वार्थ को वफ़ा समझाना मुश्किल है।
मतलबी दोस्तों की पहचान देर से होती है, मगर सबक़ हमेशा गहरा दे जाती है।
जो दोस्त हर बात में अपना फ़ायदा देखें, वे कभी आपका दर्द नहीं समझ सकते।
कुछ रिश्ते टूटते नहीं, बस उनकी असलियत सामने आ जाती है।
हमने दिल से निभाया, उन्होंने ज़रूरत से निभाया।
अब कम लोग हैं ज़िंदगी में, मगर जो हैं, बिना मतलब के हैं।
मतलबी दोस्तों की एक पहचान होती है, वे आपका हाल नहीं, आपकी ज़रूरत पूछते हैं।
हमने दोस्ती समझकर दिल खोल दिया, उन्होंने सुविधा समझकर इस्तेमाल कर लिया।
कुछ लोग साथ इसलिए नहीं होते कि उन्हें आप पसंद हैं, बल्कि इसलिए कि उन्हें आपसे कुछ चाहिए होता है।
मतलब की दोस्ती ज़्यादा दिन नहीं चलती, क्योंकि उसमें दिल नहीं, हिसाब रहता है।
जब तक काम था, रिश्ते भी गहरे थे, काम ख़त्म हुआ तो पहचान भी धुंधली हो गई।
हमने अपनापन समझा, उन्होंने उसे अपनी आसानी बना लिया।
मतलबी दोस्त कभी अचानक नहीं बदलते, बस उनका असली मक़सद सामने आ जाता है।
कुछ रिश्ते निभाए नहीं जाते, सिर्फ़ ज़रूरत पड़ने पर याद किए जाते हैं।
दर्द इस बात का नहीं कि लोग बदल गए, दर्द इस बात का है कि हमने उन्हें अपना समझ लिया था।
जो दोस्त सिर्फ़ अपने फ़ायदे में साथ दिखे, उन्होंने दोस्ती का मतलब कभी समझा ही नहीं।
हमने दिल से जगह दी, उन्होंने उसे एक मौक़े की तरह इस्तेमाल किया।
मतलबी लोगों से नाराज़गी नहीं रही, उन्होंने हमें पहचानना सिखा दिया।
कुछ दोस्त आपकी मौजूदगी नहीं चाहते, बस आपकी मदद चाहते हैं।
जहाँ हर बात में स्वार्थ नज़र आने लगे, वहाँ दोस्ती धीरे-धीरे ख़त्म हो जाती है।
हमने रिश्ते बचाने की कोशिश की, उन्होंने सिर्फ़ अपने मतलब बचाए।
मतलबी दोस्त अक्सर मीठा बोलते हैं, क्योंकि उन्हें सच नहीं, ज़रूरत प्यारी होती है।
जब उम्मीदें कम हुईं, तो लोगों की असलियत साफ़ दिखाई देने लगी।
कुछ लोग दोस्ती में साथ नहीं देते, बस फ़ायदा मिलने तक जुड़े रहते हैं।
हमने किसी को खोया नहीं, बस कुछ लोगों की हक़ीक़त जान ली।
मतलब के रिश्ते थका देते हैं, क्योंकि उनमें अपनापन नहीं होता।
जो हर बार सिर्फ़ काम पड़ने पर याद करे, वह दोस्त कम, आदत ज़्यादा होता है।
कुछ लोग दोस्ती का नाम लेते हैं, मगर निभाते सिर्फ़ अपना स्वार्थ हैं।
हमने दिल लगाया था रिश्ते से, उन्होंने रिश्ता लगाया था मतलब से।
मतलबी दोस्तों से मिली दूरी ने, सच्चे दोस्तों की अहमियत बढ़ा दी।
अब हर किसी को अपना नहीं कहते, क्योंकि तजुर्बे ने रिश्तों की क़ीमत समझा दी।